फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Even though he was from Lucknow, Munavvar Rana was from Allahabad, Sangam used to live in lions

Prayagraj News: लखनऊ के होकर भी इलाहाबाद के थे मुनौव्वर राना, शेरों बसता था संगम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jan 2024 03:44 AM IST
विज्ञापन
Even though he was from Lucknow, Munavvar Rana was from Allahabad, Sangam used to live in lions
इलाहाबाद आना हम तुम्हें संगम दिखाएंगे...। अपने शेरों में इलाहाबाद और संगम को पिरोने वाले अजीम शायर मुनौव्वर राना ने वर्षों की संगमनगरी में शायरी की है। उनकी यहां के गलियों से गजब की जुस्तजू रही है। कम लोग जानते हैं, कि वह लखनऊ के होकर भी इलाहाबाद के ही थे। लंबे समय तक पुराने शहर में रहकर उन्होंने न सिर्फ कारोबार किया था, बल्कि देर रात तक अड़ियों और चौपालों में शायरी को नई ऊंचाई भी इसी सरजमीं से दी।
विज्ञापन


रविवार की देर रात मुनौव्वर राना के इंतकाल की खबर आने के बाद शायरी के शौकीनों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके करीबी शायर अख्तर अजीम को यकीन ही नहीं हो रहा था। खुदबुदाते हुए बोले कि उनके वेंटिलेटर पर होने की इत्तिला मिली थी। उनका घर तो लखनऊ में था, लेकिन वह पक्के इलाहाबादी थे। उनकी भावना में संगम और इलाहाबाद रचा बसा था। वह बताते हैं कि वर्ष 1997 में मुनौव्वर राना इसी शहर में मार्बल के कारोबारी के तौर पर वर्षों तक रहे। तब होटल रेगीना में एक कमला उनका हमेशा बुक रहता था। वह शाम होते ही काटजू रेड पर ओरिएंट केमिस्ट के नाम से मशहूर मेडिकल स्टोर पर आ जाते थे। वहीं पर असलम इलाहाबादी, अतीक इलाहाबादी, अहमद अबरार, नैयर आतिल भी चौपाल में शामिल हो जाते थे। वहीं देर रात तक शायरी होती रहती थी। अख्तर साहब बताते हैं कि वह तो रात 11:30 बजे तक घर आ जाते थे, लेकिन मुनौव्वर राना की गुफ्तगू जारी रहती थी। वर्ष 1998 में मजीदिया इंटर कॉलेज में अतीक इलाहाबादी की किताब के विमोचन के मौके पर एक स्मारिका का भी मुनौव्वर साहब ने विमोचन किया था। तब उनकी एक गजल उस स्मारिका में प्रकाशित हुई थी। उनके गजल का शेर था- इलाहाबाद आना हम तुम्हें संगम दिखाएंगे...।
विज्ञापन


वह इलाहाबाद के मुरीद थे। इलाहाबादी अमरूद पर भी उन्होंने खूब लिखा था। इसी तरह कवि श्लेष गौतम भी उनसे जुड़ी स्मृतियां साझा करते हैं। वह बताते हैं कि वर्ष 2027 में कल्याणी देवी के चौधरी गार्डेन मे हुए मुशायरे में आखिरी बार वह आए थे। वह बहुत मस्तमौला इंसान होने के साथ ही शायरी के जादूगर थे। गुफ्तगू पत्रिका के संपादक इम्तियाज अहमद गाजी से भी उनका गहरा ताल्लुक रहा है। वह बताते हैं कि कभी भी उन्होंने उनके आग्रह को नहीं ठुकराया। गुफ्तगू पत्रिका के विमोचन में भी एक बार वह शामिल हुए थे। वह हमेशा इलाहाबाद को अपने दिल में बसाए रहे। करीब 12 वर्ष पहले मुनौव्वर राना ने एक कार खरीदी थी, तब उन्होंने उसका नंबर इलाहाबाद का लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed