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Prayagraj : 1.50 करोड़ से अधिक खर्च करने के बाद भी बना है कुत्तों का खौफ, रोज 400 लोगों को काट रहे

Wed, 13 Aug 2025 08:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 13 Aug 2025 08:31 PM IST
सार

दो वर्षों में आवारा कुत्तों की धरपकड़ व नसबंदी पर नगर निगम डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है इसके बावजूद इनका खौफ कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में रोजाना करीब 400 लोगों को आवारा कुत्ते काट रहे हैं।

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Even after spending more than 1.50 crores, the fear of dogs still persists, they are biting 400 people every
कुत्ता - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दो वर्षों में आवारा कुत्तों की धरपकड़ व नसबंदी पर नगर निगम डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है इसके बावजूद इनका खौफ कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में रोजाना करीब 400 लोगों को आवारा कुत्ते काट रहे हैं। नगर निगम ने कुत्तों के जन्म दर पर नियंत्रण के लिए 2022 में अभियान शुरू किया। अफसरों का दावा है कि 2023 से आवारा कुत्तों के बधियाकरण अभियान को प्रभावी तरीके से लागू किया गया।

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अभियान में डेढ़ करोड़ से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है लेकिन अब तक का नतीजा शून्य ही है। निगम के पशुधन विभाग के अफसरों के दावों के अनुसार 2023 में चंडीगढ़ की एक एजेंसी ने इस अभियान को अंजाम दिया और करीब एक साल में नौ हजार आवारा कुत्तों का ऑपरेशन किया गया। वर्ष 2024 से यह जिम्मेदारी मध्य प्रदेश की कंपनी के पास है। पशुधन अधिकारी विजय अमृतराज के अनुसार इस कंपनी ने भी अब तक 10 वार्डाें में आठ हजार से अधिक कुत्तों का ऑपरेशन किया है।
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इन दावों के बावजूद नतीजा यह है कि इस दौरान ही शहर में 20 से 25 हजार कुत्ते बढ़ गए। अफसरों का कहना है कि आमतौर पर हर वार्ड में 10 हजार आवारा कुत्ते हैं। इस लिहाज से शहरी क्षेत्र में करीब एक लाख कुत्ते थे। यह दो साल पहले का आंकड़ा है, अब यह संख्या सवा लाख से अधिक हो गई है।

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... तो कैसे होगा तीन साल में 100 फीसदी कुत्तों का ऑपरेशन

पशुधन विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले तीन साल में शहरी क्षेत्र में आवारा कुत्तों के नसबंदी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके तहत 75 से 80 फीसदी यानि करीब एक लाख कुत्तों का ऑपरेशन करने के साथ टीकाकरण अभियान पूरा हो जाएगा। इसके विपरीत विपरीत सच्चाई यह है कि अब तक तीन वर्षों में चले अभियान के दौरान 17 से 18 हजार कुत्तों का ही ऑपरेशन हो सका है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर की क्षमता रोजाना 20 से 25 कुत्तों के ऑपरेशन एवं टीकाकरण की है। हालांकि अफसरों का दावा है कि क्षमता बढ़ाई गई है और अब 50 से 60 कुत्तों की नसबंदी हो सकेगी। इस लिहाज से भी एक साल में अधिकतम करीब 22 हजार कुत्तों की ही नसबंदी हो पाएगी। इस तरह से तीन वर्ष में 65 से 66 हजार आवारा कुत्तों का ही ऑपरेशन हो पाएगा। ऐसे में आगामी तीन वर्ष में एक लाख कुत्तों का ऑपरेशन कैसे हो पाएगा यह सवाल बना हुआ है।

कुत्तों के काटने की घटनाएं कम हुई हैं। इसे लेकर शिकायतें भी कम आ रही हैं। अब कुत्तों के ऑपरेशन एवं टीका लगाने की मांग को लेकर ज्यादा फोन आने लगे हैं। आवारा कुत्तों की धड़पकड़ में तेजी भी लाई गई है। अभियान का असर अभी नहीं दिख रहा लेकिन तीन-चार साल बाद लाभ दिखेगा। - विजय अमृतराज, पशुधन अधिकारी, नगर निगम

आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए चले अभियान

पार्षद मीनू तिवारी ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर आवारा कुत्तों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर में कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। उन्होंने कुत्तों को शहर से बाहर करने के साथ टोल फ्री नंबर जारी करने की भी मांग की। 

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