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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   establishment of the Kalash, the beginning of the great festival of worship of Adi Shakti

नवरात्रि 2022 : कलश स्थापना के साथ आदि शक्ति की आराधना के महापर्व का श्रीगणेश

Mon, 26 Sep 2022 09:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 26 Sep 2022 09:56 PM IST
सार

सोमवार को प्रतिपदा तिथि लगने के साथ ही ब्रह्म मुहूर्त में ही कलश स्थापना शुरू हो गई। वैदिक मंत्रोच्चार गूंजने लगे। कहीं मंगल कामना के लिए दुर्गा शप्तसती के सस्वर पाठ आरंभ हुए तो कहीं सुख-समृद्धि और शांति के लिए अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ।

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establishment of the Kalash, the beginning of the great festival of worship of Adi Shakti
शारदीय नवरात्रि आरंभ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वास्तिक और शुभ की अल्पनाओं से सजी वेदियों पर सोमवार को कामनाओं के कलश की स्थापना कर जगत प्रतिपालिका मां दुर्गा का आह्वान किया गया। इसी के साथ आस्था के भावों की अखंड ज्योति जल उठी। घरों से लेकर मंदिरों तक मां दुर्गा के आह्वान के साथ ही आदि जगदंबा की आराधना का नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया।

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सोमवार को प्रतिपदा तिथि लगने के साथ ही ब्रह्म मुहूर्त में ही कलश स्थापना शुरू हो गई। वैदिक मंत्रोच्चार गूंजने लगे। कहीं मंगल कामना के लिए दुर्गा शप्तसती के सस्वर पाठ आरंभ हुए तो कहीं सुख-समृद्धि और शांति के लिए अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। इस दौरान घरों से लेकर देवी मंदिरों तक नवरात्र की आराधना के लिए भक्तों का उत्साह देखने लायक रहा। मंदिरों में घंटे-घड़ियाल के साथ दिन भर मंत्रोच्चार गूंजते रहे।

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अधिकतर सनातनी परिवारों में कलश स्थापना होने की वजह से कई पुरोहितों को तीन से चार यजमानों के यहां मां दुर्गा का आह्वान कराना पड़ा। कोरोना महामारी में पुत्र और पति की जान बचने की खुशी में इस बार लूकरगंज की श्रद्धा शुक्ला ने कलश स्थापना की। लूकरगंज में दुर्गापूजा पार्क के सामने वाली गली में विमला देवी ने घर-परिवार की समृद्धि के लिए कलश की स्थापना की। इसी तरह गोविंदपुर की श्रद्धा सिन्हा ने भी कलश स्थापन किया।

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मीरापुर के वैदिक आचार्य पं. ओम पांडेय ने इस दोनों की स्थानों पर कलश स्थापना कराई। इसी तरह ज्योतिषाचार्य पं. बृजेंद्र मिश्र ने कई जगह कलश स्थापना कराई। दारागंज के तीर्थपुरोहित पं. रितुराज मिश्रा भी दिन भर कलश स्थापना में व्यस्त रहे। इस बार नवरात्र के प्रथम दिन कलाश स्थापना के लिए पुरोहित ढूंढे नहीं मिल रहे थे। इसी के साथ कलश में गंगा का जल, चांदी-तांबे का सिक्का और सुपारी के रूप में मां दुर्गा का आह्वान किया गया। कलश के ऊपर नारियल सजाए गए। मां को लाल चुनरी और तरह-तरह का भोग अर्पित किया गया। इसी के साथ अखंड दीप जलाकर नौ दिवसीय व्रत, अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई।



भयबाधा से मुक्ति के लिए अनुष्ठानों की होड़
भय बाधा से मुक्ति के लिए नवरात्र के अनुष्ठानों की इस बार होड़ मची रही। सुबह ही फूलों, रंगोलियों और तरह-तरह के हल्दी-चंदन के स्वास्तिक और ऊं के प्रतीकों से सजी वेदियों पर कलश स्थापना आरंभ हुई। गंगा की रेत से तैयार वेदियों पर मंगल कामना के जौ उगाए गए।

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