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High Court : ईएसआई और पीएमएचएस डॉक्टरों के कार्य अलग, समान लाभ का दावा खारिज
Wed, 29 Apr 2026 03:29 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 29 Apr 2026 03:29 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि श्रम चिकित्सा सेवा (ईएसआई) के डॉक्टरों की तुलना प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) के डॉक्टरों से नहीं की जा सकती।
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- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि श्रम चिकित्सा सेवा (ईएसआई) के डॉक्टरों की तुलना प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) के डॉक्टरों से नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों सेवाओं के डॉक्टरों के कार्यों की प्रकृति, दायित्व और कार्यभार पूरी तरह भिन्न हैं। इसके साथ ही खंडपीठ ने एकल पीठ के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें ईएसआई डॉक्टरों को पीएमएचएस के समान पदोन्नति व अन्य लाभ देने की बात कही गई थी।
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राज्य सरकार की विशेष अपील पर अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता व अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि पीएमएचएस संवर्ग के डॉक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक पूरी जनता के उपचार के लिए जिम्मेदार होते हैं। उनके कार्यों में जटिल सर्जरी, आपातकालीन सेवाएं और पोस्टमार्टम जैसे गंभीर उत्तरदायित्व शामिल हैं। उनके कार्य सीधे तौर पर जनमानस के स्वास्थ्य से जुड़े हैं। इसके विपरीत, श्रम चिकित्सा सेवा के डॉक्टरों का कार्यक्षेत्र केवल ईएसआई योजना के तहत बीमित व्यक्तियों तक ही सीमित है।
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खंडपीठ ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केवल एक ही चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) से जुड़े होने के आधार पर वेतन और भत्तों में समानता का दावा नहीं किया जा सकता। किसी भी सेवा के लाभ तय करने के लिए कार्य की गंभीरता और जिम्मेदारी का स्तर देखा जाना अनिवार्य है। इस प्रकार, दोनों संवर्गों की संरचना और सेवा शर्तें अलग होने के कारण उन्हें एक समान श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
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