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महिलाओं को हक दिलाने आगे आए युवा

Wed, 04 Feb 2015 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 04 Feb 2015 11:59 PM IST
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Ensuring the right of young women came forward
सत्यार्थी और मलाला जैसे संघर्षों की लंबी सूची तो नहीं हैं लेकिन उनमें महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के प्रति संवेदना कम नहीं है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के युवाओं की एक टोली महिलाओं और बच्चों के हक के लिए जोखिम उठाने के लिए तैयार है। युवाओं का एक बड़ा वर्ग, जहां ‘मैं और मेरा’ के आवरण से बाहर की दुनिया को जानता तक नहीं, वहीं बीए एलएलबी पांच वर्षीय पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों की टोली महिलाओं और बच्चों को जागरूक करने के साथ उनकी कानूनी लड़ाई में भी साथ है। जरूरत पड़ने पर वह धरना-प्रदर्शन और थाना घेरने से भी पीछे नहीं हटते। इसे उन्होंने ‘अधिकार मंच’ का नाम दिया है। इसकी शुरुआत तीन विद्यार्थियों ने की थी लेकिन आज इनके साथ कई प्रोफेसर, अधिवक्ता तथा अन्य लोग भी खड़े हैं।
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इसकी शुरुआत विश्वविद्यालय के महिला सलाहकार बोर्ड की अध्यक्ष प्रोफेसर रंजना कक्कड़ की पहल पर हुई। बीए एलएलबी के विद्यार्थियों, सव्यसाची राय, पीयूष मिश्रा, कुनाल श्रीवास्तव ने उद्देश्य की पूर्ति के लिए ‘अधिकार मंच’ नामक संस्थान का गठन किया। बाद में विधि की ही छात्रा प्रीति उत्तम भी मंच से जुड़ गईं। साथ में विभाग के 30 विद्यार्थी भी अलग-अलग तरीके से लड़ाई में साथ हैं। विद्यार्थियों के ईमानदार प्रयास के बाद कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर बीपी सिंह, कोहना के प्रधान सत्येंद्र त्रिपाठी समेत कई अन्य लोग भी इनके साथ हैं। अधिवक्ताओं का एक वर्ग भी विद्यार्थिओं को हर तरह से मदद करता है। संगठन का मकसद महिलाओं और बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और कानूनी लड़ाई में उनकी मदद करना है।
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शुरू में शहर के स्कूलों में कैंप लगाकर अन्य विद्यार्थियों को भी जागरूक किया गया। फिर फाफामऊ, झूंसी, सोरांव, सहसों में भी अभियान चला। कैंप में महिलाओं को हक पाने तथा उत्पीड़न के खिलाफ गुहार करने की सीख दी गई। पीड़िता को मंच के सदस्यों के मोबाइल नंबर दिए जाते हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर एफआईआर लिखाने, मुकदमा लड़ने, धरना-प्रदर्शन आदि स्तरों पर लड़ाई लड़ी जाती है। इतना ही नहीं निबंध, वाद-विवाद, चित्रकला आदि प्रतियोगिताएं भी कराई गई हैं। सव्य कहते हैं, यह लड़ाई शहर छोड़ने के बाद भी जारी रहे, इसके लिए जूनियर्स को भी शामिल किया गया है।
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देश की महिलाओं पर तकरीबन दो दशको से अध्ययन कर रहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की डॉ.एलएन क्लार्क भी मंच के जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुईं। इलाहाबाद में अध्ययन के दौरान उन्होंने महिलाआें से कई बार संवाद भी किया।
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