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माघ मेले का आधे से अधिक हिस्सा खाली
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 12 Dec 2016 01:55 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : allahabad
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माघ मेला शुरू होने में एक माह बाकी रह गया है और तैयारियां ध्वस्त पड़ी हैं। दंडी बाड़ा को जमीन का आवंटन हो चुका है और सोमवार को आचार्य बाड़ा को जमीन आवंटित कर दी जाएगी लेकिन रोड, पुल आदि तैयार न होने के कारण साधु-संत वहां अपना शिविर नहीं लगा पा रहे। कटान के कारण इस बार मेला का 80 फीसदी हिस्सा झूंसी की ओर बसेगा और काम की हालत इतनी बदतर है कि झूंसी की ओर से वीरानगी छाई है। न रोड है और न ही बिजली के खंभे और तार लगे हैं।
सभी विभागों की नजर पीडब्ल्यूडी पर है। जब तक पीडब्लयूडी पांटून पुल नहीं बनाता, तब तक निर्माण सामग्री को झूंसी की तरफ ले जाना मुश्किल होगा। अगर विभाग शास्त्री ब्रिज से होते ही झूंसी की ओर जाते हैं तो चकर्ड प्लेटें न होने के कारण वाहनों के पहिये धंस सकते हैं। ऐसे में झूंसी की ओर काम पूरी तरह से ठप पड़ा है और मेला का 80 फीसदी हिस्सा खाली पड़ा है।
पिछली बार माघ मेला 1550 बीघा जमीन पर बसा था लेकिन इस बार कटान के कारण 150 बीघा जमीन कम पड़ गई है। कटान के कारण गंगा का पाट भी चौड़ा हो गया है और पीडब्ल्यूडी को पुल बनाने के लिए अधिक पांटूनों की जरूरत पड़ गई है। पुल निर्माण में देरी की एक वजह यह भी मानी जा रही है। फिलहाल वजह कुछ भी हो, अगर पीडब्ल्यूडी समय रहते काम शुरू कर देता तो अब तक महावीर पांटून पुल बन चुका होता तो अन्य विभागों के काम भी प्रभावित न होते। अगर यही हालत रही तो मेला शुरू होने तक झूंसी की ओर तैयारियां अधूरी रह जाएंगी। इससे साधु-संतों के साथ कल्पवासियों को भी दिक्कत झेलनी पड़ेगी।
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अर्धकुंभ-2019 के लिए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं और अलग-अलग संस्थाओं से सुझाव भी मांगे जाने लगे हैं। इसी क्रम में 26 दिसंबर को प्रशासन और अखाड़ा परिषद की बैठक होगी। अखाड़ा परिषद की कई मांगें अर्से से लंबित हैं। परिषद के पदाधिकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि अखाड़ों के साधु-संतों के लिए सरकार स्थायी निर्माण कराए और उनके लिए आवास की व्यवस्था करे। जिन अखाड़ों के पास जमीन और आश्रम नहीं है, सरकार उन्हें यह सुविधा मुहैया कराए। बैठक के दौरान ऐसी तमाम मांगों पर भी चर्चा होगी। साथ ही परिषद के पदाधिकारी अर्धकुंभ के बेहतर आयोजन के लिए अपने सुझाव भी देंगे।
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सभी विभागों की नजर पीडब्ल्यूडी पर है। जब तक पीडब्लयूडी पांटून पुल नहीं बनाता, तब तक निर्माण सामग्री को झूंसी की तरफ ले जाना मुश्किल होगा। अगर विभाग शास्त्री ब्रिज से होते ही झूंसी की ओर जाते हैं तो चकर्ड प्लेटें न होने के कारण वाहनों के पहिये धंस सकते हैं। ऐसे में झूंसी की ओर काम पूरी तरह से ठप पड़ा है और मेला का 80 फीसदी हिस्सा खाली पड़ा है।
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पिछली बार माघ मेला 1550 बीघा जमीन पर बसा था लेकिन इस बार कटान के कारण 150 बीघा जमीन कम पड़ गई है। कटान के कारण गंगा का पाट भी चौड़ा हो गया है और पीडब्ल्यूडी को पुल बनाने के लिए अधिक पांटूनों की जरूरत पड़ गई है। पुल निर्माण में देरी की एक वजह यह भी मानी जा रही है। फिलहाल वजह कुछ भी हो, अगर पीडब्ल्यूडी समय रहते काम शुरू कर देता तो अब तक महावीर पांटून पुल बन चुका होता तो अन्य विभागों के काम भी प्रभावित न होते। अगर यही हालत रही तो मेला शुरू होने तक झूंसी की ओर तैयारियां अधूरी रह जाएंगी। इससे साधु-संतों के साथ कल्पवासियों को भी दिक्कत झेलनी पड़ेगी।
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अर्धकुंभ-2019 के लिए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं और अलग-अलग संस्थाओं से सुझाव भी मांगे जाने लगे हैं। इसी क्रम में 26 दिसंबर को प्रशासन और अखाड़ा परिषद की बैठक होगी। अखाड़ा परिषद की कई मांगें अर्से से लंबित हैं। परिषद के पदाधिकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि अखाड़ों के साधु-संतों के लिए सरकार स्थायी निर्माण कराए और उनके लिए आवास की व्यवस्था करे। जिन अखाड़ों के पास जमीन और आश्रम नहीं है, सरकार उन्हें यह सुविधा मुहैया कराए। बैठक के दौरान ऐसी तमाम मांगों पर भी चर्चा होगी। साथ ही परिषद के पदाधिकारी अर्धकुंभ के बेहतर आयोजन के लिए अपने सुझाव भी देंगे।