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यूपी : हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर की गंभीर टिप्पणी, जानें क्या है पूरा मामला

Sat, 26 Aug 2023 06:16 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Aug 2023 06:16 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि देरी की वजह से संविधान की धारा 21 के तहत त्वरित सुनवाई के आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और पुलिस विभाग की इन विफलताओं के परिणाम स्वरूप जमानत के अधिकार का निष्पक्ष रूप से विचार नहीं हो पर रहा है। 

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Elder brother of two students came to settle the dispute, one shot the other
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर विचार करते हुए अभियोजन की कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि समय पर समन तामील होने में देरी, दंडात्मक कार्यवाही करने में पुलिस की असमर्थता से मुकदमे की सुनवाई देरी से शुरू हो रही है। इस वजह से अभियुक्तों को समय पर जमानत नहीं मिल पा रही है, जो उनके मौलिक और जमानत प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन है।

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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट ने याची भंवर सिंह के साथ तीन अन्य की जमानत अर्जियों पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने याचियों को निजी मुचलके और दो प्रतिभूतियों पर रिहा करने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने कहा कि देरी की वजह सेसंविधान की धारा 21 के तहत त्वरित सुनवाई के आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और पुलिस विभाग की इन विफलताओं के परिणामस्वरूप जमानत के अधिकार का निष्पक्ष रूप से विचार नहीं हो पर रहा है। 
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस का दायित्व है कि समन की तामीली और दंडात्मक प्रक्रियाओं के निष्पादन को वह समयबद्ध तरीके से करे लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। इससे दंड व्यवस्था में प्रणालीगत दोष नजर आता है, जो न्याय वितरण प्रणाली की विश्वसनीता को खतरे में डालती है।

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गवाहों की अनिवार्य उपस्थिति के लिए बनाए जाएं नोडल अधिकारी

कोर्ट ने गवाहों की अनिवार्य उपस्थिति के लिए पुलिस अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाए जाने का भी सुझाव दिया है। कहा कि पुलिस विभाग में जवाबदेही की प्रभावी प्रणाली विकसित करने पर यूपी सरकार को विचार करने की जरूरत है। कोर्ट ने अपने आदेश की कॉपी यूपी सरकार केसाथ, पुलिस महानिदेशक को भी भेजने का निर्देश दिया है, जिससे कि इस संबंध में उपयुक्त कदम उठाए जा सकें। मामले में याचियों के खिलाफ मैनपुरी के ओंछा थाने में आईपीसी की धारा 302, 147, 148 और 149 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

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