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जज्बा : आठ साल की काजल ने भी पूरी की 42 किलोमीटर की इंदिरा मैराथन
Fri, 19 Nov 2021 07:37 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 19 Nov 2021 07:37 PM IST
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Prayagraj News : इंदिरा मैराथन में दौड़ लगाती आठ वर्ष की काजल।
- फोटो : प्रयागराज
तकनीकी कारणों से आठ वर्ष की बच्ची काजल इंदिरा मैराथन दौड़ का आधिकारिक हिस्सा तो नहीं बन सकी, लेकिन उसने सभी का दिल जीत लिया। इस छोटी से उम्र में उसने 42.195 किमी की दौड़ पूरी की। मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में जैसे ही उसने फिनिश लाइन पार की वहां मौजूद सभी लोग बच्ची की तरफ दौड़ पड़े। आयोजन में शामिल लोगों ने उसे कंधे पर उठा लिया। हालांकि, परिजनों की ओर से विरोध दर्ज कराने के बावजूद उसे सर्टिफिकेट नहीं मिला। मंच से भी बच्ची का नाम नहीं बोला गया। इससे उनमें नाराजगी के साथ निराशा रही।
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मांडा के ललितपुर की काजल पुरी से भुवनेश्वर तक की दूरी दौड़कर पूरी करने वाली सात वर्ष की बुधिया से प्रेरित है। इसके बाद उसने दौड़ना शुरू किया। इंदिरा मैराथन में भाग लेने से पहले काजल प्रयागराज से सुभाष चौराहे से दिल्ली के इंडिया गेट तक की दूरी दौड़कर पूरी कर चुकी हैं। इंदिरा मैराथन में होने के लिए काजल पिता नीरज कुमार बिंद और कोच रजनीकांत के साथ बृहस्पतिवार को ही आ गई थी लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया।
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Prayagraj News : इंदिरा मैराथन में हिस्सा लेती काजल बिंद।
- फोटो : प्रयागराज
इसके बावजूद काजल ने न सिर्फ मैराथन में हिस्सा लिया, बल्कि दौड़ भी पूरी की। काजल का कहना है कि वह देश के लिए मेडल जीतना और गरीबों की सेवा करना चाहती है। पिता और कोच ने बताया कि नियमित तौर पर 50 किमी से अधिक दौड़ लगाती है लेकिन दौड़ पूरी करने का सर्टिफिकेट नहीं मिलने से उनमें निराशा रही। उन्होंने खेल राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी से भी मिलने की कोशिश की लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने काजल को अपने पास बैठाए रखा और उसे मंत्री से नहीं मिलने दिया।
वहीं अफसरों का कहना है कि पिता को बृहस्पतिवार को ही बता दिया गया था कि काजल मैराथन में हिस्सा नहीं ले सकती है। उनका कहना था कि डीएम के पास भी प्रकरण पहुंचा था, लेकिन उन्होंने भी रजिस्ट्रेशन से मना कर दिया। उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव पीके श्रीवास्तव का कहना है कि आठ वर्ष की बच्ची को मैराथन में दौड़ाना उचित नहीं है। यह अपराध है। इसलिए उसका रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। उसे सर्टिफिकेट भी नहीं दिया जा सकता।
वहीं अफसरों का कहना है कि पिता को बृहस्पतिवार को ही बता दिया गया था कि काजल मैराथन में हिस्सा नहीं ले सकती है। उनका कहना था कि डीएम के पास भी प्रकरण पहुंचा था, लेकिन उन्होंने भी रजिस्ट्रेशन से मना कर दिया। उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव पीके श्रीवास्तव का कहना है कि आठ वर्ष की बच्ची को मैराथन में दौड़ाना उचित नहीं है। यह अपराध है। इसलिए उसका रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। उसे सर्टिफिकेट भी नहीं दिया जा सकता।