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पिछड़ सकता है ईडीएफसी का काम, नई कंपनी को मिलेगा टेंडर
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रेलवे की ओर से चीन की कंपनी द्वारा किए जा रहे ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) के सिग्नलिंग का ठेका निरस्त कर देने के बाद कानपुर से पंडित दीन दयाल उपाध्याय ( मुगलसराय) के बीच चल रहा काम पिछड़ सकता है। पहले से ही यह कार्य विलंब से चल रहा है।
हालांकि चीन की कंपनी का ठेका निरस्त करने के बाद रेलवे ने अब इस 417 किलोमीटर के सिग्नलिंग के काम के लिए दूसरी कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। इस बारे में विश्व बैंक की सहमति का इंतजार किया जा रहा है।
चीन की बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट ऑफ सिगनलिंग एंड कम्युनिकेशन ग्रुप कंपनी रेलवे के ईडीएफसी प्रोजेक्ट में कानपुर से मुगलसराय के बीच 417 किमी की दूरी में सिगनल लगाने का काम कर रही है। लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद पैदा हुए हालात में भारतीय रेलवे चीन की इस कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया। उसे 417 करोड़ का यह ठेका जून 2016 में दिया गया था।
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लेकिन महज चार वर्ष में कंपनी ने सिर्फ 20 फीसदी ही काम किया। 20 फरवरी 2020 को विश्व बैंक की टीम के साथ डीएफसीसीआईएल के एमडी अनुराग सचान प्रयागराज आए थे। इस दौरान उन्होंने यमुना में बन रहे पुल का जायजा लिया था। तब उन्होंने बताया था कि मार्च 2021 तक प्रयागराज से दीनदयाल उपाध्याय तक डीएफसी का काम पूरा होना है, लेकिन लॉकडाउन में काम प्रभावित होने की वजह से इसकी डेडलाइन जून 2021 कर दी गई। उस दौरान भी उन्होंने चीनी कंपनी के कार्य पर असंतोष जताया था। अब रेलवे द्वारा यह ठेका निरस्त कर देने के बाद चीन की इस कंपनी का प्रयागराज स्थित दफ्तर किसी भी दिन बंद हो सकता है। हालांकि अब सिग्नलिंग के लिए दूसरी कंपनी को टेंडर दिए जाने की प्रक्रिया से डीएफसी के इस कार्य की डेडलाइन एक बार फिर से बढ़ सकती है।
भारतीय कंपनी को ठेका मिलने की उम्मीद
वर्तमान समय रेलवे में सिग्नलिंग का कार्य देश के कुछ स्थानों पर भारतीय कंपनियां भी कर रही है। इसमें मेधा, डीएलडब्ल्यू आदि के नाम प्रमुख रूप से शामिल है। उम्मीद जताई जा रही है कि किसी भारतीय कंपनी को यह ठेका मिल सकता है। इसके अलावा फ्रांस की कंपनी एल्ट्राम, इटली की अंसाल्डो आदि को भी इस क्षेत्र में महारत हासिल है।
चीन की कंपनी का टेंडर निरस्त होने के बाद यह ठेका किसी नई कंपनी को दिया जाएगा। विश्व बैंक को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। दोबारा टेेंडर प्रक्रिया कराने की तैयारी हो रही है।
वेद प्रकाश, सीपीआरओ, डीएफसी।
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हालांकि चीन की कंपनी का ठेका निरस्त करने के बाद रेलवे ने अब इस 417 किलोमीटर के सिग्नलिंग के काम के लिए दूसरी कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। इस बारे में विश्व बैंक की सहमति का इंतजार किया जा रहा है।
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चीन की बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट ऑफ सिगनलिंग एंड कम्युनिकेशन ग्रुप कंपनी रेलवे के ईडीएफसी प्रोजेक्ट में कानपुर से मुगलसराय के बीच 417 किमी की दूरी में सिगनल लगाने का काम कर रही है। लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद पैदा हुए हालात में भारतीय रेलवे चीन की इस कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया। उसे 417 करोड़ का यह ठेका जून 2016 में दिया गया था।
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लेकिन महज चार वर्ष में कंपनी ने सिर्फ 20 फीसदी ही काम किया। 20 फरवरी 2020 को विश्व बैंक की टीम के साथ डीएफसीसीआईएल के एमडी अनुराग सचान प्रयागराज आए थे। इस दौरान उन्होंने यमुना में बन रहे पुल का जायजा लिया था। तब उन्होंने बताया था कि मार्च 2021 तक प्रयागराज से दीनदयाल उपाध्याय तक डीएफसी का काम पूरा होना है, लेकिन लॉकडाउन में काम प्रभावित होने की वजह से इसकी डेडलाइन जून 2021 कर दी गई। उस दौरान भी उन्होंने चीनी कंपनी के कार्य पर असंतोष जताया था। अब रेलवे द्वारा यह ठेका निरस्त कर देने के बाद चीन की इस कंपनी का प्रयागराज स्थित दफ्तर किसी भी दिन बंद हो सकता है। हालांकि अब सिग्नलिंग के लिए दूसरी कंपनी को टेंडर दिए जाने की प्रक्रिया से डीएफसी के इस कार्य की डेडलाइन एक बार फिर से बढ़ सकती है।
भारतीय कंपनी को ठेका मिलने की उम्मीद
वर्तमान समय रेलवे में सिग्नलिंग का कार्य देश के कुछ स्थानों पर भारतीय कंपनियां भी कर रही है। इसमें मेधा, डीएलडब्ल्यू आदि के नाम प्रमुख रूप से शामिल है। उम्मीद जताई जा रही है कि किसी भारतीय कंपनी को यह ठेका मिल सकता है। इसके अलावा फ्रांस की कंपनी एल्ट्राम, इटली की अंसाल्डो आदि को भी इस क्षेत्र में महारत हासिल है।
चीन की कंपनी का टेंडर निरस्त होने के बाद यह ठेका किसी नई कंपनी को दिया जाएगा। विश्व बैंक को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। दोबारा टेेंडर प्रक्रिया कराने की तैयारी हो रही है।
वेद प्रकाश, सीपीआरओ, डीएफसी।