दिवाली : कानफाेड़ू की जगह बाजार में इको फ्रेंडली पटाखों की धूम, बाजार में इस बार कम आए हैं तेज आवाज वाले पटाखे
संगम नगरी के अभी एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में ही पटाखों के थोक विक्रेताओं की दुकानें सजी हैं। यहीं से फुटकर पटाखा विक्रेता अपनी दुकानों के लिए पटाखे खरीद रहे हैं। थोक बाजार की दुकानों में इको फ्रेंडली फुलझडियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
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दिवाली के मौके पर कानफोड़ू पटाखों के बजाय इस बार भी ईको फ्रेंडली पटाखे धूम मचाने को तैयार हैं। शहर का पटाखा बाजार तरह-तरह की आतिशबाजी के साथ तैयार हो गया है। खास बात यह है कि इन पटाखों की पैकिंग में संबंधित कंपनियों द्वारा क्यूआर कोड भी दिया गया है, ताकि ग्राहक खुद भी इस बात की तसदीक कर सकें कि पटाखा इको फ्रेंडली है। बाजार में आसमानी फैंसी आइटम की भरमार है।
ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे भी बाजार में इस बार कम मात्रा में ही आए हैं।संगम नगरी के अभी एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में ही पटाखों के थोक विक्रेताओं की दुकानें सजी हैं। यहीं से फुटकर पटाखा विक्रेता अपनी दुकानों के लिए पटाखे खरीद रहे हैं। थोक बाजार की दुकानों में इको फ्रेंडली फुलझडियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
इन पटाखों की खासियत यह है कि इसमें बैरियम नाइट्रेट की मात्रा कम होने की वजह से 70 से 80 फीसदी तक प्रदूषण कम होगा। पटाखा बाजार में दक्षिण भारत के शिवकाशी से आए पटाखे शहर में धूम मचाने के लिए तैयार हैं। इस बार पटाखा निर्माता कंपनियों की ओर से वैरायटी भी काफी दी गई है।
फैंसी पटाखों की डिमांड ज्यादा
शहर के पटाखा बाजार में फैंसी पटाखों की बहार है। इसमें भी आसमान में रंग बिरंगी रोशनी बिखेरने वाले पटाखों की मांग सबसे ज्यादा है। इन पटाखों में एनिमल शावर, गूगूल, हनी बी, ड्रोन, किसिंग फ्लावर, शार्क, फिश, डॉल्फिन आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। खास बात यह है कि यह सभी इको फ्रेंडली पटाखे हैं। इसके अलावा बिग शॉट, ब्रेक आउट, स्पिनर, कलर चेजिंग अनार, थ्री स्टार आदि भी पसंद किए जा रहे हैं।
हनी बी पटाखे के बारे में बताया जा रहा है कि आसमान में जाने के बाद यह रंग बिरंगी बारिश जैसा दिखेगा। ड्रोन पटाखे भी लोग पसंद कर रहे हैं। आसमान में जाने के बाद उसमें से ऐसी रोशनी निकलेगी जैसे कैमरे की फ्लैश लाइट चमक रही हो। थोक कारोबारी मोहम्मद कादिर ने बताया कि पटाखों की इस बार तमाम नई वैरायटी आई हैं। फैंसी पटाखे अब ज्यादा पसंद किए जाते हैं। बच्चों के लिए ट्राई कलर, जिराफ आदि रोशनी बिखेरने वाले पटाखे बेहतर पैकिंग में कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं।
पटाखों पर फूटा महंगाई का बम
दिवाली आने में अब बस चंद दिन शेष हैं। रोशनी का यह ऐसा पर्व है, जिसके लिए बच्चे से लेकर बड़े तक उत्साहित रहते हैं। हालांकि, इस बार पटाखों और आतिशबाजी के दाम आम लोगों के होश उड़ाने वाले हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पटाखे बहुत ज्यादा महंगे बिक रहे हैं। न सिर्फ खुदरा में, बल्कि होलसेल में भी पटाखे 20 से 25 फीसदी महंगे हो गए हैं। पिछले वर्ष 120-150 रुपये पैकेट में मिलने वाली फुलझड़ी की कीमत 150-200 रुपये हो गई है। रंगीन रोशनी वाली फुलझड़ी की कीमत 200-300 रुपये प्रति पैकेट से ज्यादा है। इसके अलावा अनार, चकरी, रॉकेट और अन्य पटाखों के दाम भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ गए हैं।