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सुरक्षा का दूसरा नाम रहा दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस
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Duranto Express
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आज इलाहाबाद से अपने आखिरी सफर पर रवाना होगी दिल्ली दुरंतो
सोनिया गांधी ने सात फरवरी 2010 को किया था ट्रेन का कानपुर से उद्घाटन
प्रयागराज। इलाहाबाद से नई दिल्ली जाने वाली दुरंतो एक्सप्रेस अपने आखिरी सफर पर बृहस्पतिवार को इलाहाबाद जंक्शन से रवाना होगी। सात फरवरी 2010 से शुरू हुई दिल्ली दुरंतो की खास बात यह रही कि इलाहाबाद जंक्शन से छूटने वाली पहली ऐसी ट्रेन रही, जिसने दिल्ली का सफर 7.30 घंटे में पूरा किया। इसे देश की सर्वाधिक रफ्तार वाली ट्रेनों में छठा स्थान मिला। सुरक्षा के लिहाज से भी दिल्ली दुरंतो एनसीआर जोन की अन्य ट्रेनों को काफी आगे रही। बीते नौ वर्ष सात माह के सफर में दुरंतो एक्सप्रेस कभी दुर्घटनाग्रस्त भी नहीं हुई।
जंक्शन से नई दिल्ली के बीच दुरंतो एक्सप्रेस का संचालन सप्ताह में तीन दिन होता है। सात फरवरी 2010 को तब यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में कानपुर से वीडियो लिंक के माध्यम से उसका उद्घाटन किया था। तब सोनिया गांधी ने एक साथ 19 ट्रेनों का उद्घाटन कानपुर से किया था। उन 19 ट्रेनों की लिस्ट इलाहाबाद-नई दिल्ली दुरंतो भी उसमें शामिल थी। तब दिल्ली दुरंतो स्पेशल ट्रेन के रूप में रवाना हुई थी। नौ फरवरी 2010 से ट्रेन का नियमित संचालन शुरू हुआ। बीते नौ वर्ष सात माह के दौरान दिल्ली दुरंतो ने तकरीबन इलाहाबाद से नई दिल्ली के 1500 फेरे लगाए। इस दौरान ट्रेन कभी भी दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई। संभवत: दिल्ली दुरंतो इलाहाबाद मंडल की एकमात्र ऐसी ट्रेन है जो कभी भी दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई। ट्रेन शुरूआत से ही आकर्षण का केंद्र रही। इसके सभी कोच के बाहरी हिस्से पर कलरफुल विनाइल रैपिंग रही। इस वजह से दिल्ली दुरंतो अन्य ट्रेनों से काफी अलग रही।
35 लाख से ज्यादा यात्रियों ने किया दिल्ली दुरंतो में सफर
दुरंतो एक्सप्रेस की एक खास बात यह भी रही कि इसके संचालन के पहले दिन जितनी बर्थ ट्रेन में रही, उतनी ही बर्थ उसके आखिरी सफर में भी रहेगी। नौ स्लीपर, पांच थर्ड एसी, तीन सेकंड एसी एवं एक फर्स्ट एसी वाली दुरंतो एक्सप्रेस में क्रमश: 760, 360, 156 एवं 24 बर्थ है। इस तरह से इसमें दिल्ली के हर एक सफर में 1260 एवं सप्ताह में 3780 बर्थ यात्रियों को उपलब्ध होती रही। एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली दुरंतो में अब तक इलाहाबाद एवं दिल्ली से 35 लाख लोगों ने सफर किया। नौ वर्ष सात माह की अवधि में दिल्ली दुरंतो सात बार कोहरा एवं अन्य रेल हादसों की वजह से निरस्त भी रही।
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‘दिल्ली दुरंतो का अब तक का सफर बेहतरीन रहा। बृहस्पतिवार को ट्रेन अपने आखिरी सफर पर रवाना होगी। 13 सितंबर को यही ट्रेन वापस दिल्ली से आएगी। इसके स्थान पर अब हमसफर एक्सप्रेस का संचालन हर रोज होगा। हमसफर तीन दिन आनंद विहार एवं चार दिन नई दिल्ली जाएगी।’
00 अजीत कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनसीआर।
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सोनिया गांधी ने सात फरवरी 2010 को किया था ट्रेन का कानपुर से उद्घाटन
प्रयागराज। इलाहाबाद से नई दिल्ली जाने वाली दुरंतो एक्सप्रेस अपने आखिरी सफर पर बृहस्पतिवार को इलाहाबाद जंक्शन से रवाना होगी। सात फरवरी 2010 से शुरू हुई दिल्ली दुरंतो की खास बात यह रही कि इलाहाबाद जंक्शन से छूटने वाली पहली ऐसी ट्रेन रही, जिसने दिल्ली का सफर 7.30 घंटे में पूरा किया। इसे देश की सर्वाधिक रफ्तार वाली ट्रेनों में छठा स्थान मिला। सुरक्षा के लिहाज से भी दिल्ली दुरंतो एनसीआर जोन की अन्य ट्रेनों को काफी आगे रही। बीते नौ वर्ष सात माह के सफर में दुरंतो एक्सप्रेस कभी दुर्घटनाग्रस्त भी नहीं हुई।
जंक्शन से नई दिल्ली के बीच दुरंतो एक्सप्रेस का संचालन सप्ताह में तीन दिन होता है। सात फरवरी 2010 को तब यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में कानपुर से वीडियो लिंक के माध्यम से उसका उद्घाटन किया था। तब सोनिया गांधी ने एक साथ 19 ट्रेनों का उद्घाटन कानपुर से किया था। उन 19 ट्रेनों की लिस्ट इलाहाबाद-नई दिल्ली दुरंतो भी उसमें शामिल थी। तब दिल्ली दुरंतो स्पेशल ट्रेन के रूप में रवाना हुई थी। नौ फरवरी 2010 से ट्रेन का नियमित संचालन शुरू हुआ। बीते नौ वर्ष सात माह के दौरान दिल्ली दुरंतो ने तकरीबन इलाहाबाद से नई दिल्ली के 1500 फेरे लगाए। इस दौरान ट्रेन कभी भी दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई। संभवत: दिल्ली दुरंतो इलाहाबाद मंडल की एकमात्र ऐसी ट्रेन है जो कभी भी दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुई। ट्रेन शुरूआत से ही आकर्षण का केंद्र रही। इसके सभी कोच के बाहरी हिस्से पर कलरफुल विनाइल रैपिंग रही। इस वजह से दिल्ली दुरंतो अन्य ट्रेनों से काफी अलग रही।
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35 लाख से ज्यादा यात्रियों ने किया दिल्ली दुरंतो में सफर
दुरंतो एक्सप्रेस की एक खास बात यह भी रही कि इसके संचालन के पहले दिन जितनी बर्थ ट्रेन में रही, उतनी ही बर्थ उसके आखिरी सफर में भी रहेगी। नौ स्लीपर, पांच थर्ड एसी, तीन सेकंड एसी एवं एक फर्स्ट एसी वाली दुरंतो एक्सप्रेस में क्रमश: 760, 360, 156 एवं 24 बर्थ है। इस तरह से इसमें दिल्ली के हर एक सफर में 1260 एवं सप्ताह में 3780 बर्थ यात्रियों को उपलब्ध होती रही। एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली दुरंतो में अब तक इलाहाबाद एवं दिल्ली से 35 लाख लोगों ने सफर किया। नौ वर्ष सात माह की अवधि में दिल्ली दुरंतो सात बार कोहरा एवं अन्य रेल हादसों की वजह से निरस्त भी रही।
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‘दिल्ली दुरंतो का अब तक का सफर बेहतरीन रहा। बृहस्पतिवार को ट्रेन अपने आखिरी सफर पर रवाना होगी। 13 सितंबर को यही ट्रेन वापस दिल्ली से आएगी। इसके स्थान पर अब हमसफर एक्सप्रेस का संचालन हर रोज होगा। हमसफर तीन दिन आनंद विहार एवं चार दिन नई दिल्ली जाएगी।’
00 अजीत कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनसीआर।