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Prayagraj News: बढ़ी भीड़ तो बंद करनी पड़ी शटल बस सेवा, दोपहर में दो रूटों पर संचालन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2025 01:40 AM IST
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Due to increased crowd, shuttle bus service had to be stopped, operating on two routes in the afternoon
महाकुंभ के सबसे बड़े अमृत स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर भीड़ बढ़ने की वजह से शटल बस सेवा बंद करनी पड़ी। रोडवेज ने अस्थायी बस स्टेशन से श्रद्धालुओं को हिंदू हॉस्टल व भारत स्काउट गाइड इंटर कॉलेज के पास छोड़ने की योजना बनाई थी। लेकिन, श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी। ताकि उन्हें अलग-अलग रास्तों से संगम भेजा जा सके। इस वजह से शटल बसों का संचालन नहीं हो सका। दोपहर में सिर्फ दो रूट पर ही शटल बसें चलीं।
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रोडवेज और नगरीय परिवहन विभाग की ओर से मौनी अमावस्या पर्व पर 500 से ज्यादा शटल बसों का संचालन शहर के तमाम मार्गों में किया जाना था। लेकिन, मेले में हादसे की वजह से पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई। इसी वजह से शटल बसों का संचालन नहीं सका।
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शटल बसें बंद होने के बाद भी श्रद्धालुओं के कदम न रुके। उन्होंने पैदल ही त्रिवेणी संगम पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। इसी दौरान नेहरू पार्क अस्थायी बस स्टेशन से लोकसेवा आयोग, हिंदू हॉस्टल, फायर ब्रिगेड चौराह आदि स्थानों से बाइक सवारों ने प्रति सवारी 100 से 300 रुपये श्रद्धालुओं से वसूले। दोपहर में शटल सेवा शुरू हुई तो सैकड़ों लोगों को राहत मिली। शटल सेवा लोक सेवा आयोग चौराहे तक ही चली।
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बसें ठसाठस, जिले की सीमाओं पर ही रोका
महाकुंभ नगर में हादसे के बाद जिले की सीमाओं पर ही काफी देर तक रोडवेज बसों को रोक दिया गया। ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। रोडवेज अफसरों ने पुलिस अफसरों से बात की तब बसों का आवागमन शुरू हुआ। इसके बाद स्थिति थोड़ी सामान्य हुई।
नेहरू पार्क बस स्टेशन, बेला कछार, झूंसी आदि अस्थायी बस स्टेशनों पर भोर से ही भीड़ पहुंचने लगी। अनजाने में लखनऊ, अयोध्या रूट के बहुत से यात्री नेहरू पार्क पहुंच गए। वहां बताया गया कि लखनऊ, अयोध्या रूट की बसें बेला और बेली कछार से मिलेंगी। स्नान के बाद थके श्रद्धालुओं ने वहीं से कानपुर के लिए बस पकड़ ली।

बहराइच से आए ओंकार शुक्ला ने बताया कि कानपुर से लखनऊ और फिर बहराइच जाऊंगा। वहीं, आजमगढ़ के राम आसरे विश्वकर्मा भी सात लोगाें के साथ बेेला कछार पहुंच गए तो उन्हें पता कि बस अंदावा से मिलेगी। इसके बाद थरवई के रास्ते ऑटो से वह अंदावा निकल गए। बताया जा रहा कि देर शाम तक पांच हजार से ज्यादा बसों का संचालन हो चुका था।
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