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Civil Services : इलाहाबाद विवि के हॉस्टलों को ‘आईएएस की नर्सरी’ बनाने की तैयारी, शुरू होगी व्याख्यान की परंपरा

Thu, 01 Jun 2023 12:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Jun 2023 12:27 PM IST
सार

पूर्व रक्षा सचिव एवं राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण, पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष कश्यप, प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व सचिव पुलक चटर्जी, पूर्व गवर्नर गोविंद नारायण, रॉ के पूर्व प्रमुख संजीव त्रिपाठी, नेशनल पुलिस एकेडमी के पूर्व निदेशक विकास नारायण राय सहित कई दिग्गज इसी ‘फैक्ट्री’ की देन हैं। वर्ष 1990 तक सिविल सेवा परीक्षा में इविवि के हॉस्टलों ने दमदारी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन इसके बाद सफलता का ग्राफ गिरने लगा।

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Due to hostels, Allahabad University was called 'IAS factory', now selections are done by counting
यूपीएससी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को कभी ‘आईएएस की फैक्ट्री’ कहा जाता था। हर साल इविवि के हॉस्टलों से 40 से अधिक मेधावियों का चयन होता था और अब दो-तीन चयन भी बमुश्किल होते हैं। इविवि के इस गौरव को वापस लाने की पहल पीसीबी हॉस्टल ने की है। हॉस्टल प्रशासन की ओर से आईएएस एवं पीसीएस में चयनित पुरा छात्रों से संपर्क किया गया है, ताकि वे अंत:वासियों को भविष्य की राह दिखा सकें।

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पूर्व रक्षा सचिव एवं राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण, पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष कश्यप, प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व सचिव पुलक चटर्जी, पूर्व गवर्नर गोविंद नारायण, रॉ के पूर्व प्रमुख संजीव त्रिपाठी, नेशनल पुलिस एकेडमी के पूर्व निदेशक विकास नारायण राय सहित कई दिग्गज इसी ‘फैक्ट्री’ की देन हैं। वर्ष 1990 तक सिविल सेवा परीक्षा में इविवि के हॉस्टलों ने दमदारी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन इसके बाद सफलता का ग्राफ गिरने लगा।

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शीघ्र की शुरू की जाएगी व्याख्यान की परंपरा

छात्र राजनीति में शिक्षकों का दखल बढ़ा, हॉस्टलों के कमरों पर माफिया का कब्जा होने लगा और हॉस्टलों में एक नया गुट बन गया, जिसे पढ़ाई से ज्यादा ठेकेदारी का शौक था। इविवि अब इससे उबरने की कोशिश में लगा हुआ है और पीसीबी हॉस्टल ने इसके लिए पहल की गई है। छात्रावास के अधीक्षक डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने हॉस्टल के 30 से अधिक पूर्व छात्रों से संपर्क किया है, जो आईएएस और पीसीएस की परीक्षा में चयनित हुए थे।

इनमें बंगलुरु में तैनात आईएएस अफसर नरेंद्र, दिल्ली में तैनात आईआरएस अफसर पराग सिंह आदि शामिल हैं। सभी पूर्व छात्रों की लिस्ट तैयार की जा रही है। अधीक्षक ने बताया कि जल्द ही हॉस्टल में व्याख्यान की एक शृंखला शुरू की जाएगी। लिस्ट में शामिल पूर्व छात्रों को आमंत्रित किया जाएगा, जो हॉस्टल के छात्रों को मोटिवेट करेंगे और सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने की राह दिखाएंगे।

परंपरा से छेड़छाड़ ने भी डुबोई साख

इविवि की परंपरा रही है कि एक ही हॉस्टल में स्नातक, परास्नातक और शोध छात्र साथ रहा करते थे। सीनियर छात्र हमेशा अपने जूनियरों का मार्गदर्शन करते थे। यह परंपरा अब टूट गई है। इविवि में डीन साइंस रहे चुके प्रो. एके श्रीवास्तव बताते हैं कि वर्ष 2015-16 में जब प्रो.रतन लाल हांगलू कुलपति बने तो उन्होंने हॉस्टलों की परंपरा से छेड़छाड़ की। स्नातक और परास्नातक के छात्रों को अलग-अलग हॉस्टल आवंटित किए जाने लगे। जिस एएन झा हॉस्टल ने सर्वाधिक आईएएस अफसर दिए, वहां सिर्फ शोधार्थियों को कमरे आवंटित किए जाने लगे। जूनियर और सीनियर को अलग-अलग करने का असर भी दिखा। हॉस्टलों में जूनियर छात्रों का मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं रह गया।

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छात्रों को भी बदलनी होगी सोच

पीसीबी हॉस्टल के अधीक्षक डॉ. सुजीत कुमार सिंह का मानना है कि छात्रों को भी अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। एक वक्त था, जब हॉस्टल के छात्र केवल आईएएस अफसर बनने के बारे में सोचते थे। बहुत कम छात्र पीसीएस परीक्षा में शामिल होते थे, लेकिन आज के दौर में प्राथमिकता सरकारी नौकरी हो गई है। आईएएस और पीसीएस बनने से पहले लक्ष्य होता है कि किसी तरह शिक्षक, दरोगा, आरओ/एआरओ जैसी भर्ती परीक्षाओं में चयन हो जाए। छात्र इन्हीं भर्तियों में फंसे रह जाते हैं और इसका असर आईएएस एवं पीसीएस परीक्षा की तैयारी पर पड़ता है।

नए शिक्षकों की नियुक्ति से भी बनेंगे रास्ते

राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. पंकज कुमार का कहना है कि इविवि में लंबे अर्से तक शिक्षकों की कमी बनी रही। नई नियुक्तियां न होने से छात्रों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिला पा रहा था। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव की पहल पर विश्वविद्यालय को अब नए शिक्षक मिले हैं। आने वाले तीन-चार वर्षों में इसका असर देखने को मिलेगा।

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