फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Dry Ganges at the confluence, no water left for bathing

संगम पर सूखी गंगा, आचमन-स्नान के लायक नहीं बचा जल

Fri, 02 Apr 2021 02:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 02 Apr 2021 02:22 AM IST
विज्ञापन
Dry Ganges at the confluence, no water left for bathing
prayagraj news : जल की कमी से संगम पर गंगा में टीले बन गए हैं। - फोटो : prayagraj

गर्मी शुरू होते ही संगमनगरी में गंगा की धारा कई जगह सिमट गई है। माघ मेला के महज महीने भर बाद जलधारा सूखने से फाफामऊ से अरैल के बीच रेत के टीले उभर आए हैं। संगम पर डुबकी लगाने और आचमन करने लायक भी जल नहीं रह गया है। इससे श्रद्धालुओं,तीर्थपुरोहितों, संतों की चिंता बढ़ गई है। तटवर्ती इलाकों में रेत पर उगाई जाने वाली जायद की फसलों की सिंचाई का भी संकट पैदा हो गया है। साथ ही भूजल स्तर खिसकने की आशंका बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि अगर समय रहते न्यूनतम प्रवाह को लेकर सरकारों ने नहीं चेता तो आने वाले समय में तीर्थनगरी में संकट बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता।

विज्ञापन

Dry Ganges at the confluence, no water left for bathing
prayagraj news : जल की कमी से संगम पर गंगा में टीले बन गए हैं। - फोटो : prayagraj

गंगोत्री से गंगासागर तक करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार बनी जीवन दायिनी गंगा प्रयागराज में अब खुद प्यासी तड़प रही है। प्रवाह न होने से यह संकट पैदा हुआ है। साथ ही नालों से गंदा पानी बहाए जाने से मुक्तिदायिनी की धारा प्रदूषित भी हो रही है। बीती जनवरी से मार्च के बीच कोरोना काल के माघ मेले के दौरान जहां गंगा में तेज प्रवाह की वजह से साधु-संतों के शिविरों के पास कटान हो गई थी, और प्रवाह करीब तीन सौ मीटर के दायरे तक फैला नजर आ रहा था, वहीं अब गंगा सिमट कर कहीं 50 तो कहीं 30 मीटर से भी कम रह गई हैं। संगम पर जल स्तर इतना सिमट गया है कि लोग स्नान भी नहीं कर पा रहे हैं। गंगा की इस दशा को लेकर साधु-संत और तीर्थ पुरोहितों की चिंता बढ़ गई है। संगम नगरी में जहां महीने भर पहले ही माघ मेले में लाखों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा था, वहीं अब संगम पर ही डुबकी लगाने भर के लिए जल नहीं रह गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

Dry Ganges at the confluence, no water left for bathing
prayagraj news : जल की कमी से संगम पर गंगा में टीले बन गए हैं। - फोटो : prayagraj
इसका एक बड़ा कारण यह भी है की माघ मेले के बाद गंगा में नरोरा और कानपुर बैराज से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। गंगा पर लंबे समय से काम कर रहे टीकरमाफी मठ के महंत स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी गंगा में जल न छोड़े जाने से नाराज हैं। उनका कहना है कि पर्र्वों पर ही पानी छोड़ा जा रहा है। जबकि, झूंसी, नैनी और फाफामऊ के सारे नाले खुलेआम गंगा में बहाए जा रहे हैं। इसे किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसी तरह प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष डॉ प्रकाश चंद्र मिश्र ने गंगा की इस दुर्दशा पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बांधों से शीघ्र जल नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। उधर, शिवकुटी, बदरा-सोनौटी से लेकर अरैल के बीच जायद की फसलें भी सिंचाई के अभाव में मुरझाने लगी हैं। पप्पू लाल निषाद और संदीप निषाद बताते हैं कि जलधारा सिमट कर दो से तीन सौ मीटर तक आगे निकल गई है। इस वजह से रेत पर उगाई गई सब्जियों की सिंचाई को लेकर संकट पैदा हो गया है।

यूपी-उत्तराखंड के सीएम से मिलेंगे अखाड़ा परिषद अध्यक्ष
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने संगम पर गंगा की जलधारा सूखने के लिए उत्तराखंड और यूपी के अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने बताया कि वह गंगा की मौजूदा स्थिति पर सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत से मुलाकात करेंगे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि कोर्ट ने भी न्यूनतम प्रवाह बनाए रखने का आदेश दिया है। उसका पालन तो हर हाल में किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed