नई व्यवस्था : दो माह बाद ऑटोमैटिक ट्रैक पर होगा ड्राइविंग टेस्ट, तैयारियां शुरु
अभी तक की व्यवस्था में मैनुअल तरीके से ड्राइविंग टेस्ट होता है, जहां बहुत से ऐसे आवेदक होते हैं, जिन्हें गाड़ी चलाने भी नहीं आता है। फिर भी उन्हें डीएल मिल जाता है। इस व्यवस्था पर रोक लगाने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए मारुति को यह जिम्मेदारी दी गई है।
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ड्राइविंग टेस्ट के नाम पर दलाली और मनमानी जल्द ही समाप्त होने जा रही है। जिसके लिए नैनी स्थित आईटीआई कार्यालय परिसर में ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक पर सेंसर लाइट व सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। महज दो महीने के बाद यहां पर कुशल चालकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त हो सकेगा। कार निर्माता संस्था मारूती को ड्राइविंग टेस्ट लेने की जिम्मेदारी मिली है।
ऐसे में ड्राइविंग टेस्ट देेते समय काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जरा सी चूक होने पर आवेदक टेस्ट में फेल हो जायेगा।अभी तक की व्यवस्था में मैनुअल तरीके से ड्राइविंग टेस्ट होता है, जहां बहुत से ऐसे आवेदक होते हैं, जिन्हें गाड़ी चलाने भी नहीं आता है। फिर भी उन्हें डीएल मिल जाता है।
इस व्यवस्था पर रोक लगाने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए मारुति को यह जिम्मेदारी दी गई है। नैनी आईटीआई परिसर में करीब दो साल पहले ही ट्रैक बनकर तैयार हो चुका है। इसके अलावा एक कंट्रोल रूम भी बन चुका है।
अब यहां पर सीसीटीवी कैमरे और सेंसर लाइट लगाने के काम जल्द शुरू होने वाला है। कुछ कैमरे और सेंसर लाइट नैनी स्थित आरटीओ कार्यालय में पहुंच भी चुकी हैं। इन सभी कार्याें में लगभग दो महीने का समय लगेगा। बता दें कि ड्राइविंग टेस्ट के लिए लर्निग लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को पहली ही फेसलेस किया जा चुका है। जिसके चलते आवेदक घर बैठे ऑनलाइन अपना ड्राइविंग लर्निंग टेस्ट दे सकता है। वहीं ड्राइविंग टेस्ट सेंटर पर आवेदकों को महज 10 मिनट के अंदर परिणाम मिल जायेगा।
क्या है ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक
ट्रैक के दो हिस्सों में डिवाइड है, जहां एक छोटा सा हिस्सा दोपहिया आवेदकों के लिए है, वहीं दूसरा बड़ा हिस्सा चार पहिया वाहन के लिए। टेस्टिंग के दौरान ट्रैफिक सिग्नल, रिवर्ड मोड आदि ट्रैक पड़ता है, जहां आवेदकों को अपनी ड्राइविंग कौशल का प्रदर्शन करने का मौका मिलता है। ड्राइविंग लाइसेंस उम्मीदवारों का बिना मानव हस्तक्षेप के वीडियो एनालिटिक्स टेक्नोलॉजी के माध्यम से उनके ड्राइविंग कौशल का परीक्षण लिया जाता है और यह सारी प्रक्रिया केवल 10 मिनट के अंदर पूरी हो जाती है।
इस ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर कई एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जायेगा। जिसमें एक्सेस कंट्रोल एंट्री एग्जिट, फुल्ली आटोमेटिक टेस्ट ट्रैक, वीडियो एनालिटिक्स टेक्नोलॉजी, एग्जिट कॉरिडोर ईच टेस्ट ट्रैक आदि शामिल है।
कार निर्माता कंपनी मारूती को ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट लेने की जिम्मेदारी मिली है। जिसके लिए लगभग सभी तैयारियां शुरू हो गई है। दो माह के अंदर ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक पर चालकों का टेस्ट होगा। - राजीव चतुर्वेदी, एआरटीओ (प्रशासन), प्रयागराज।