{"_id":"5dd846cc8ebc3e54c851f35a","slug":"drama-ek-tha-gadha-news-allahabad-news-ald2609223150","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवाब की सनक में गधे के फेर में मारा गया अलादाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवाब की सनक में गधे के फेर में मारा गया अलादाद
विज्ञापन
Drama Ek tha Gadha news
- फोटो : CITY DESK
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मयूर रंगमंच की ओर से नाटक ‘एक था गधा उर्फ अलादाद खां’ का मंचन
प्रयागराज। सांस्कृतिक केन्द्र की मासिक नाट्य योजना के तहत मयूर रंगमंच की ओर से शुक्रवार को नाटक ‘एक था गधा उर्फ अलादाद खां’ की भावपूर्ण प्रस्तुति की गई। शरद जोशी लिखित और शशिकान्त शर्मा निर्देशित नाटक ने समय के सच पर ‘स्पॉट लाइट’ डालने का काम किया। धारदार व्यंग्य से प्रस्तुति सत्ता, संस्कृति-अपसंस्कृति, सांस्कृतिक आंदोलन, आम आदमी, राजनीति और भीड़ के अन्त:संबंधों को उजागर करती है। नाटक में अलादाद खां के अतिरिक्त नवाब, कोतवाल, सूत्रधार, चिन्तक बुद्धिजीवी और कुछ फुटपाथिया व्यवसायी प्रतिनिधि पात्र के रूप में कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
कथासार के मुताबिक जुग्गन धोबी के गधे का नाम ‘अलादाद खां’ है, जिसकी आकस्मिक मृत्यु हो जाती है। गधे के अलावा अलादाद खां नामक एक ईमानदार व्यक्ति भी है। कोतवाल नवाब को अलादाद खां की मृत्यु की खबर देता है और नवाब बिना यह जाने कि किस अलादाद की मृत्यु हुई है, राजकीय शोक घोषित करते हुए उसके जनाजे को कांधा देने का हुक्म देता है। लेकिन जब उसे सही बात पता चलती है, तो वह नाराज होता है। कोतवाल फिर बाजार जाकर व्यक्ति अलादाद को पकड़कर लाता है और उसे मारने का हुक्म दे देता है। इस तरह नवाब की जिद पूरी होती है और अलादाद खां का जनाजा निकलता है।
नाटक में संगीत परिकल्पना शशिकान्त शर्मा, प्रकाश संचालन विनय श्रीवास्तव तथा रूप सज्जा की जिम्मेदारी संजय चौधरी ने संभाली। प्रस्तुति में विशाल, शशिकान्त शर्मा, शंकर पासवान, अश्विनी श्रीवास्तव, आकृत श्रीवास्तव, जतिन ललित सिंह, देवी लाल, विपिन गौड़, आलोक श्रीवास्तव, रामकली, प्रियंका ने अपनी-अपनी भूमिकाओं से न्याय किया। रिभु श्रीवास्तव ने उद्घोषणा और रामगोपाल गुप्ता ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रयागराज। सांस्कृतिक केन्द्र की मासिक नाट्य योजना के तहत मयूर रंगमंच की ओर से शुक्रवार को नाटक ‘एक था गधा उर्फ अलादाद खां’ की भावपूर्ण प्रस्तुति की गई। शरद जोशी लिखित और शशिकान्त शर्मा निर्देशित नाटक ने समय के सच पर ‘स्पॉट लाइट’ डालने का काम किया। धारदार व्यंग्य से प्रस्तुति सत्ता, संस्कृति-अपसंस्कृति, सांस्कृतिक आंदोलन, आम आदमी, राजनीति और भीड़ के अन्त:संबंधों को उजागर करती है। नाटक में अलादाद खां के अतिरिक्त नवाब, कोतवाल, सूत्रधार, चिन्तक बुद्धिजीवी और कुछ फुटपाथिया व्यवसायी प्रतिनिधि पात्र के रूप में कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
कथासार के मुताबिक जुग्गन धोबी के गधे का नाम ‘अलादाद खां’ है, जिसकी आकस्मिक मृत्यु हो जाती है। गधे के अलावा अलादाद खां नामक एक ईमानदार व्यक्ति भी है। कोतवाल नवाब को अलादाद खां की मृत्यु की खबर देता है और नवाब बिना यह जाने कि किस अलादाद की मृत्यु हुई है, राजकीय शोक घोषित करते हुए उसके जनाजे को कांधा देने का हुक्म देता है। लेकिन जब उसे सही बात पता चलती है, तो वह नाराज होता है। कोतवाल फिर बाजार जाकर व्यक्ति अलादाद को पकड़कर लाता है और उसे मारने का हुक्म दे देता है। इस तरह नवाब की जिद पूरी होती है और अलादाद खां का जनाजा निकलता है।
विज्ञापन
नाटक में संगीत परिकल्पना शशिकान्त शर्मा, प्रकाश संचालन विनय श्रीवास्तव तथा रूप सज्जा की जिम्मेदारी संजय चौधरी ने संभाली। प्रस्तुति में विशाल, शशिकान्त शर्मा, शंकर पासवान, अश्विनी श्रीवास्तव, आकृत श्रीवास्तव, जतिन ललित सिंह, देवी लाल, विपिन गौड़, आलोक श्रीवास्तव, रामकली, प्रियंका ने अपनी-अपनी भूमिकाओं से न्याय किया। रिभु श्रीवास्तव ने उद्घोषणा और रामगोपाल गुप्ता ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
विज्ञापन