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Prayagraj News: समझदारी से चीजें उठाएंगी रोबोट में लगीं डॉ. रोशन की बनाईं अंगुलियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2024 05:53 AM IST
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Dr. Roshan's fingers fitted into robot that will pick up things intelligently
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने रोबोट की ऐसी अंगुलियां बनाई हैं, जो ज्यादा समझदारी से काम करेंगी। इसके पैरेलल जॉ ग्रिपर सामान ऐसे उठाएंगे कि टूट-फूट न हो। चीन और बेल्जियम के शोधकर्ताओं संग बनाई अंगुलियों का दो महीने पहले पेटेंट हो चुका है। बेल्जियम की कंपनी व्यावसायिक उपयोग भी शुरू कर चुकी है।
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यांत्रिकी अभियंत्रण विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोशन कुमार होता ने रोबोटिक अंगुलियां बनाने में पॉलीलैक्टिक एसिड का इस्तेमाल किया है। वह बताते हैं कि रोबोट में एक ऑटोमेटेड सिस्टम है, जो टेढ़े-मेढ़े आकार वाली चीजों को एक से दूसरी जगह रखने के काम आता है। जरूरत के मुताबिक रोबोट और उसकी अंगुलियां बनाई जा सकती हैं।
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डॉ. रोशन के मुताबिक, इंसान अपनी समझ से चीजें देखकर बता सकता है कि उसे कैसे, कहां से पकड़कर उठाना है, लेकिन रोबोट को यह पता नहीं। पकड़ वाली सही जगह (ग्रास्प लोकेशन) पता करने के लिए कंप्यूटर के माध्यम से किसी पुर्जे में करीब 10,000 से अधिक ग्रास्प लोकेशन टेस्ट लिए गए। फिर, अच्छी पकड़ वाली पांच जगहें तय की गईं।
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इससे रोबोट को पता लग गया कि उसे पुर्जे को किस तरह से उठाना है। डॉ. रोशन बताते हैं कि अभी तक जो भी रोबोट बनाए गए हैं, उनका औद्योगिक इकाइयों में प्रयोग हल्की (100-200 ग्राम वजनी) चीजों को उठाने में किया जाता है। इससे वजनी चीजों के लिए रोबोट की जगह इंसानों को लगाना पड़ता है। इससे समय तो ज्यादा लगता ही है, उत्पादन लागत भी बढ़ती है। यह रोबोट 10 से 15 किग्रा वजनी चीजें उठाने में सक्षम है।
खड़गपुर के आईआईटियन हैं डॉ. रोशन
डॉ. रोशन होता ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया और यहीं से एमटेक और पीएचडी भी। इसके बाद वह बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स स्थित व्राई यूनिवर्सिटी में पहुंच गए। यहां बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर पुर्जों की अच्छी पकड़ पर काम शुरू किया। यहीं पर विशिष्ट अंगुलियां बनाने में कामयाबी पाई। चीन और बेल्जियम के शोधकर्ताओं संग हुआ यह शोध स्विट्जरलैंड से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय जर्नल रोबोटिक के मई अंक में प्रकाशित हो चुका है।
कैड मॉडल से निकाली अच्छी पकड़ वाली लोकेशन

डॉ. रोशन बताते हैं कि किसी भी वस्तु का पहले कैड मॉडल (कंप्यूटर की सहायता से डिजाइन) बनाया जाता है। कैड मॉडल से डाटा निकालना बेहद कठिन है। सो, पहले एक प्वाइंट क्लाउड बनाते हैं। इसकी गणना करके नॉर्मल्स निकालते हैं। यही नार्मल्स सॉफ्टवेयर में फीड किए जाते हैं। फिर, अच्छी पकड़ वाली जगहें पता की गईं। अंगुलियों को थ्रीडी प्रिंटिंग से तैयार करके रोबोट के सॉफ्टवेयर में इन्हीं गणनाओं को फीड कर दिया गया। अब समझदार बन चुका रोबोट जान सकता है कि उसे सामान को किस कोण से पकड़ना है ताकि कोई नुकसान न हो।


बॉयो प्लास्टिक और मक्के के स्टार्च से बनाईं अंगुलियां

रोबोट की अंगुलियां पॉलीलैक्टिक एसिड मैटीरियल से बनाई गई हैं। इनमें बॉयो प्लास्टिक है और मक्के के स्टार्च भी। पकड़ मजबूत रहे, इसके लिए एक अंगुली में एक तो दूसरी में दो संपर्क स्थान (कॉन्टैक्ट लोकेशन) स्थान दिए गए हैं।

रोबोटिक्स के क्षेत्र में डॉ. रोशन होता का योगदान काबिलेतारीफ है। उनकी बनाई अंगुलियों से रोबोटिक्स की दुनिया में नए आयाम स्थापित होंगे।
-- प्रो. मुकुल शुक्ला, विभागाध्यक्ष, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, एमएनएनआईटी
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