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डॉ. अर्चना केस : केंद्र सरकार से आश्वासन मिलने के बाद डाक्टरों ने वापस ली हड़ताल

Sat, 02 Apr 2022 08:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 02 Apr 2022 08:08 PM IST
सार

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि आईएमए की हड़ताल वापस हो गई है। आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराने और डाक्टरों के खिलाफ होने वाली हिंसा के खिलाफ कड़ा कानून बनाने का आश्वासन दिया है।

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Dr. Archana Case: After getting assurance from the central government, the doctors called off the strike
Prayagraj News : डा. अर्चना सुसाइड मामले में कैंडल मार्च निकालते चिकित्सक। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

पुलिस उत्पीड़न के विरोध में राजस्थान के दौसा में महिला चिकित्सक डा. अर्चना शर्मा के आत्मदाह के मामले में हड़ताल का एलान करने वाल जिले के निजी डाक्टरों ने शनिवार को सुबह ही हड़ताल वापस ले लिया। प्राइवेट डाक्टरों ने शुक्रवार को ही हड़ताल का एलान करते हुए शनिवार को सात घंटे तक चिकित्सकीय सेवाओं से विरत रहने का फैसला किया था।

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इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि आईएमए की हड़ताल वापस हो गई है। आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराने और डाक्टरों के खिलाफ होने वाली हिंसा के खिलाफ कड़ा कानून बनाने का आश्वासन दिया है। इसके बाद ही आईएमए की ओर से हड़ताल और विरोध प्रदर्शन को वापस लिया गया है।

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पुलिस प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. सुजीत सिंह ने कहा कि राजस्थान में महिला चिकित्सक के साथ जो घटना घटी उसके लिए पुलिस प्रशासन भी उतना ही दोषी है जितना की मुख्य आरोपी है। चिकित्सकों से कुछ असमाजिक तत्व पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर ब्लैकमेलिंग की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, जिसमें कई बार तो ऐसे तत्व सफल हो जाते हैं लेकिन कभी-कभी दौसा जैसे दु:खद हादसे भी हो जाते हैं।



उन्होंने कहा कि  डाक्टर अपनी ओर से हमेशा हर कोशिश करता है, कोई भी डाक्टर अपने मरीज़ के साथ लापरवाही नहीं करता है लेकिन हमेशा डाक्टरों को ही दोष दे दिया जाता है। अर्चना शर्मा  भी अपने मरीज के साथ तीन से चार घंटे तक मरीज़ की जान बचाने में जुटी थी लेकिन पोस्ट पार्टम हेमरेज से उनके मरीज़ की जान चली गई।


ऐसा बहुत से केसों में होता है और इसमें डाक्टरों की किसी भी प्रकार की कोई गलती नहीं होती है। लेकिन दौसा की स्थानीय पुलिस ने अर्चना शर्मा पर नियमों के विरुद्ध धारा 302 केतहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया, जोकि सरासर गलत है।

हर दिन हो रहा डॉक्टरों का शोषण

इसी से आहत होकर अर्चना शर्मा ने खुदकुशी कर ली। आगे उन्होंने कहा कि ये केस तो एक उदाहरण है, डाक्टरों का शोषण हर दिन होता है। इसलिए केंद्र सरकार से डाक्टरों की सुरक्षा के लिए सीआरपीसी में कानून बनाने की मांग रखी गई थी जिसे केंद्र सरकार ने पूरा करने का आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के बाद आईएमए की ओर से हड़ताल को वापस लेने का निर्णय किया गया है।


इस अवसर पर डा. ललिता शुक्ला और डा. रितु सिंहा ने भी डा. अर्चना प्रकरण पर विरोध जताया और कहा कि इसी कारण डाक्टरों के अंदर एक डर सा बैठ गया है। अब कोई भी डाक्टर सीरियस मरीज एडमिट करने से डरने लगा है।



पहले जहां नाजुक से नाजुक मरीज को एडमिट कर उनका इलाज किया जाता था वहीं अब हर सीरियस मरीज को एसआरएन रेफर कर दिया जाता है। इससे एसआरएन पर तो दबाव बढ़ ही जाता है साथ ही कई बार मरीज को इलाज मिलने में भी देर हो जाती है जिससे मरीज नहीं बच पाता है। समाज केलोगों को दलालों से बचना चाहिए और डाक्टरों पर पूरा भरोसा रखकर इलाज कराना चाहिए। वहीं दूसरी ओर डाक्टरों की हड़ताल वापस होने से ओपीडी चलती रही और डाक्टरों ने मरीजों का इलाज किया।

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