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बाढ़ से घिरीं दर्जन भर कछारी बस्तियां,मचा हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:15 AM IST
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गंगा-यमुना के कछारी इलाके रविवार की रात जलमग्न हो गए। सैकड़ों घरों में पानी भर गया। नागवासुकि से दशाश्वमेध होते हुए कछार में बने घरों में गंगा प्रवेश कर गई। देर शाम श्मशान घाट डूबने से अफरातफरी मच गई। लकड़ी के टाल हटा दिए गए। अंतिम संस्कार के लिए चिताएं सड़क पर लगाई जाने लगीं। उधर, बेली कछार से संगम के बीच दर्जन भर से अधिक तटीय बस्तियों में पानी प्रवेश करने से हड़कंप मच गया।
गंगा-यमुना में उफान के बाद रविवार की रात बाढ़ प्रभावित बस्तियों में लोगों की नींद उड़ गई। संगम क्षेत्र से पचासों परिवारों को ठिकाना बदलना पड़ा। तीर्थपुरोहितों, घाटियों के अलावा पूजा-प्रसाद, फूलमाला और चाय-पकौड़े की दूकानें लगाने वाले सौ से अधिक लोगों ने अपनी चौकियां बांध पर पहुंचाईं। नागवासुकि, दशाश्वमेध के पास की झुग्गियों में रहने वाले पचास से अधिक परिवार भी परेड ग्राउंड में पहुंच गए। गंगा का जल स्तर तेजी से बढ़ने से कछार में बसने वालों की सांसत बढ़ गई है। खासतौर से रात आठ बजे के बाद नैपुरवा, मेहदौरी, रसूलाबाद, जोंदवल, शंकरघाट, चिल्ला, शिवकुटी, चांदपुर, सलोरी के अलावा बेली कछार, राजापुर, गंगापुर के कछार में बने सैकड़ों घर बाढ़ के पानी से घिर गए। लोगों ने या तो छतों पर या फिर परिचितों, रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी शुरू कर दी है।
कछारी बस्तियों में बाढ़ का पानी घुसने के साथ ही जिला प्रशासन ने एलर्ट जारी कर दिया। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने रविवार की शाम राहत-बचाव कार्य से जुड़े अफसरों को हिदायत दी कि वह प्रभावित इलाकों में भ्रमण करें। कहीं भी बाढ़ से घिरे या फंसे हुए परिवारों के बारे में जानकारी मिलने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। बाढ़ राहत शिविरों में खाद्यान्न, पेयजल, चिकित्सा के अलावा पशुओं के चारे की उपलब्धता की भी उन्होंने जानकारी ली। डीएम ने कहा कि प्रभावित इलाके में जहां भी जरूरत हो वहां तत्काल राहत शिविर खोल दिए जाएं ताकि प्रभावित लोग लोग शरण ले सकें। अफसरों से उन्होंने कहा कि नावों की भी व्यवस्था व्यवस्था करा ली जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर समय से पहुंचाया जा सके।
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गंगा-यमुना में उफान के बाद रविवार की रात बाढ़ प्रभावित बस्तियों में लोगों की नींद उड़ गई। संगम क्षेत्र से पचासों परिवारों को ठिकाना बदलना पड़ा। तीर्थपुरोहितों, घाटियों के अलावा पूजा-प्रसाद, फूलमाला और चाय-पकौड़े की दूकानें लगाने वाले सौ से अधिक लोगों ने अपनी चौकियां बांध पर पहुंचाईं। नागवासुकि, दशाश्वमेध के पास की झुग्गियों में रहने वाले पचास से अधिक परिवार भी परेड ग्राउंड में पहुंच गए। गंगा का जल स्तर तेजी से बढ़ने से कछार में बसने वालों की सांसत बढ़ गई है। खासतौर से रात आठ बजे के बाद नैपुरवा, मेहदौरी, रसूलाबाद, जोंदवल, शंकरघाट, चिल्ला, शिवकुटी, चांदपुर, सलोरी के अलावा बेली कछार, राजापुर, गंगापुर के कछार में बने सैकड़ों घर बाढ़ के पानी से घिर गए। लोगों ने या तो छतों पर या फिर परिचितों, रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी शुरू कर दी है।
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कछारी बस्तियों में बाढ़ का पानी घुसने के साथ ही जिला प्रशासन ने एलर्ट जारी कर दिया। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने रविवार की शाम राहत-बचाव कार्य से जुड़े अफसरों को हिदायत दी कि वह प्रभावित इलाकों में भ्रमण करें। कहीं भी बाढ़ से घिरे या फंसे हुए परिवारों के बारे में जानकारी मिलने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। बाढ़ राहत शिविरों में खाद्यान्न, पेयजल, चिकित्सा के अलावा पशुओं के चारे की उपलब्धता की भी उन्होंने जानकारी ली। डीएम ने कहा कि प्रभावित इलाके में जहां भी जरूरत हो वहां तत्काल राहत शिविर खोल दिए जाएं ताकि प्रभावित लोग लोग शरण ले सकें। अफसरों से उन्होंने कहा कि नावों की भी व्यवस्था व्यवस्था करा ली जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर समय से पहुंचाया जा सके।
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