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सरकारी आदेशों में न उलझाएं, मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण में तेजी लाएं : हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज में बनने वाले मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण में देरी पर नाराजगी जताई है। साथ ही प्रमुख सचिव (नियोजन विकास) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि प्रयागराज व आसपास के जिलों के लोगों की चिकित्सा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इसे सरकारी आदेशों के प्रशासनिक जाल में न उलझाया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने जनहित याचिका पर दिया।
सुनवाई के दौरान डीएम, पुलिस आयुक्त और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने कोर्ट को बताया कि सरकारी आवासों पर काबिज 17 में से 11 आवंटियों ने परिसर खाली कर दिए हैं। बाकी एक सप्ताह में इसे खाली कर देंगे। हालांकि, शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की ओर से आवास खाली न करने और कोई प्रतिक्रिया न देने पर कोर्ट ने चेतावनी दी। कहा कि अगली तारीख तक परिसर खाली नहीं कराए गए तो डीएम के माध्यम से सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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बाल चिकित्सा विंग के निर्माण में देरी पर भी यूपी सिडको को लगाई फटकार
कोर्ट ने बाल चिकित्सा विंग के निर्माण में देरी पर भी कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को फटकार लगाई। सात साल से चल रहे इस निर्माण कार्य और कोर्ट में दिए गए आश्वासनों के बावजूद लिफ्ट न लगाने पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई। संस्था के प्रबंध निदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट को बताया गया कि ट्रामा सेंटर एमजी मार्ग पर आवंटित जमीन के कोने पर बन रहा है। ट्रॉमा सेंटर के निर्माण को लेकर कोर्ट ने आदेश दिया कि इसे मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाए, ताकि मुख्य मार्ग पर बनने वाले अस्पताल के काम में कोई बाधा न आए। मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।
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कोर्ट ने कहा है कि प्रयागराज व आसपास के जिलों के लोगों की चिकित्सा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इसे सरकारी आदेशों के प्रशासनिक जाल में न उलझाया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने जनहित याचिका पर दिया।
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सुनवाई के दौरान डीएम, पुलिस आयुक्त और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने कोर्ट को बताया कि सरकारी आवासों पर काबिज 17 में से 11 आवंटियों ने परिसर खाली कर दिए हैं। बाकी एक सप्ताह में इसे खाली कर देंगे। हालांकि, शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की ओर से आवास खाली न करने और कोई प्रतिक्रिया न देने पर कोर्ट ने चेतावनी दी। कहा कि अगली तारीख तक परिसर खाली नहीं कराए गए तो डीएम के माध्यम से सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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बाल चिकित्सा विंग के निर्माण में देरी पर भी यूपी सिडको को लगाई फटकार
कोर्ट ने बाल चिकित्सा विंग के निर्माण में देरी पर भी कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को फटकार लगाई। सात साल से चल रहे इस निर्माण कार्य और कोर्ट में दिए गए आश्वासनों के बावजूद लिफ्ट न लगाने पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई। संस्था के प्रबंध निदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट को बताया गया कि ट्रामा सेंटर एमजी मार्ग पर आवंटित जमीन के कोने पर बन रहा है। ट्रॉमा सेंटर के निर्माण को लेकर कोर्ट ने आदेश दिया कि इसे मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाए, ताकि मुख्य मार्ग पर बनने वाले अस्पताल के काम में कोई बाधा न आए। मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।