डेंगू : हाईकोर्ट में पेश हुए डीएम, नगर आयुक्त और सीएमओ, कोर्ट ने वार्डवार कमेटी बनाकर दिया रोकथाम का निर्देश
यह कमेटी डेंगू के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय प्रशासन को अवगत कराएगी ताकि एंटी लार्वा एवं फॉगिंग कर इस पर नियंत्रण पाया जा सके। यह आदेश चीफ जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने स्वयं संज्ञान लेकर कायम जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज शहर में फैले डेंगू के प्रकोप के नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों को नाकाफी बताते हुए कोर्ट में हाजिर हुए जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और सीएमओ को निर्देश दिया कि वह डेंगू के बढ़ते प्रभाव पर निगरानी के लिए सभी वार्डों में कमेटी का गठन करें। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि वे वार्ड में रह रहे डॉक्टर, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, सभासद सहित संभ्रांत नागरिकों को कमेटी में शामिल करें।
यह कमेटी डेंगू के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय प्रशासन को अवगत कराएगी ताकि एंटी लार्वा एवं फॉगिंग कर इस पर नियंत्रण पाया जा सके। यह आदेश चीफ जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने स्वयं संज्ञान लेकर कायम जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने कहा जमीनी हकीकत बताए गए कदमों से बिल्कुल विपरीत है। कहीं कुछ प्रतिरोधक उपाय होता नहीं दिखाई दे रहा।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके ओझा ने कोर्ट को बताया कि शहर में डेंगू पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। बीमार लोगों के लिए सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने की जगह नहीं है। वहीं प्राइवेट नर्सिंग होम लोगों का शोषण कर रहे हैं। कोर्ट में उपस्थित अन्य वकीलों ने भी कहा, प्राइवेट नर्सिंग होम डेंगू के इलाज के नाम पर एक से डेढ़ लाख रुपए चार्ज कर रहे हैं, जो एक गरीब के लिए नामुमकिन है।
कोर्ट में उपस्थित डीएम प्रयागराज ने कहा, हमारी पूरी कोशिश है कि हम अधिक से अधिक फॉगिंग कराएं और लोगों को जोड़ें ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके। नगर आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि एक-दो दिन में एंटी लार्वा मशीन भी उपलब्ध हो जाएगी, जिससे तत्काल लाभ लिया जा सकेगा। कोर्ट इस जनहित याचिका पर अब नौ नवंबर को सुनवाई करेगी।
बता दें, चकबंदी अधिकारी को डेंगू नियंत्रण के लिए बने कंट्रोल रूम का इंचार्ज बनाने पर कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था, अब चकबंदी अधिकारी डॉक्टरों का भी काम करेंगे। कोर्ट ने कहा, कि नगर को साफ सुथरा रखना निगम की ड्यूटी है। टेस्टिंग नहीं प्रिवेंटिव उपाय चाहिए। डेंगू से कई वकीलों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों वकील और उनके परिवार के लोग बीमार हैं।