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दिवाली 2021 : खुशियों के उत्सव में संभलकर जलाएं पटाखे, तनिक भी लापरवाही पड़ सकती है भारी

Thu, 04 Nov 2021 04:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 04 Nov 2021 04:55 PM IST
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Diwali 2021: Light firecrackers carefully in the celebration of happiness, even a little carelessness can be heavy
Prayagraj News : बुधवार को फुलझड़ी जलाकर छोटी दिवाली मनाता परिवार। - फोटो : प्रयागराज
दीपावली पर जरा सी लापरवाही से त्योहार का मजा किरकिरा हो सकता है। त्योहार पर पटाखे संभलकर जलाएं। आंख, हाथ, कान ही नहीं शरीर भी बचाएं। पटाखों से खिलवाड़ करने से बचें। घर में बच्चे हों तो उनकी निगरानी करें। आतिशबाजी के दौरान उनके साथ रहें। अभिभावकों की जागरूकता से पर्यावरण ही नहीं, बल्कि परिवारीजन भी सुरक्षित रहेंगे।
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एमएलएन मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर, बर्न यूनिट प्रभारी डॉ. मोहित जैन के मुताबिक पटाखों को हाथ में लेकर नहीं, दूर से जलाकर देखना ठीक होता है। पटाखों की चपेट में आने से जले हुए स्थान पर दाग पड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि कपड़ों में लगी आग बुझाने के लिए अक्सर लोग कंबल या बोरा डाल देते हैं।
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कई लोग जले अंग पर टूथपेस्ट लगा देते हैं पर ऐसा नहीं करना चाहिए। जले स्थान को खुला रखें और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। घरेलू उपाय में हादसे के समय घर में बर्फ या ठंडा पानी हो तो तत्काल जले हुए स्थान पर डालें। पानी से जले स्थान को दस से 15 मिनट तक धोएं। इससे राहत मिलने के साथ छाले नहीं पड़ेंगे।
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एसआरएन के बर्न वार्ड में 11 बेड रिजर्व
दीपावली पर्व पर अनहोनी की स्थिति से निपटने के लिए एसआरएन अस्पताल के बर्न वार्ड में 11 बेड रिजर्व किए गए हैं। प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक एसआरएन के अतिरिक्त एमडीआई में नेत्र चिकित्सकों की टीम 24 घंटे तैनात रहेगी। आकस्मिक सेवाएं जारी रहेंगी।

रॉकेट छुड़ाते समय रहें सावधान
रॉकेट जैसे उड़ने वाले पटाखे छुड़ाते समय देख लें कि उसका मुंह किसी खिड़की, दरवाजे और किसी खुले भवन की तरफ न हो। पटाखे छुड़ाने के लिए अकेले नहीं. सबके साथ रहें, जिससे कि आपात स्थिति में लोग आपकी मदद कर सकें। किसी भी बड़ी आग की शुरुआत एक चिंगारी से होती है, ऐसे में आग की आशंका वाली जगह पर पानी का छिड़काव करें।


पटाखों से निकलने वाले रसायन भी खतरनाक
एक पटाखा जलाने पर आठ प्रकार के रसायन व गैस निकलती है। छाती फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष गुप्ता के मुताबिक पटाखों का धुआं और रसायन सेहत के लिए हानिकारक हैं। आतिशबाजी विशेषकर बुजुर्गों और दमा के मरीजों, बच्चों के लिए नुकसानदेह है। यही नहीं, तेज धमाकों के कारण सुनने की क्षमता स्थायी व अस्थायी तौर पर समाप्त हो सकती है। अभी बाजार में ग्रीन पटाखेे बिक रहे हैं। रोशनी वाले पटाखे छुड़ाएं, पर्यावरण भी बचाएं।

बरतें ये सावधानियां-
  • पटाखे जलाते समय कम से कम एक बाल्टी पानी पास रख लें
  • हमेशा लाइसेंसधारी और विश्वसनीय दुकानों से ही पटाखे खरीदें
  • खुली जगह में पटाखे जलाएं
  • पटाखों के ऊपर लिखे हुए दिशा-निर्देशों का पालन करें
  • पटाखे जलाते वक्त पैरों में जूते-चप्पल जरूर पहनें
  • लंबी हैंडिल वाली फुलझड़ी जलाएं
  • पटाखे जलाते वक्त अपना चेहरा पीछे रखें
  • बच्चों को कभी अकेले पटाखे न जलाने दें
  • पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनना बेहतर होता है
  • ऐसे किसी जगह पर पटाखे न फोड़ें, जहां ज्वलनशील वस्तुएं रखीं हों
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