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हाईकोर्ट : वित्तीय अनियमितता के आरोप में बर्खास्त शिक्षक को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Thu, 01 Feb 2024 01:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Feb 2024 01:19 PM IST
सार

अध्यापिका को म्योरपुर ब्लॉक में उच्च प्राथमिक विद्यालय कनौड़िया नवीन विद्यालय भवन के निर्माण का प्रभारी बनाया गया था। इसके लिए उसे तीन लाख तिरासी हजार रुपये की धनराशि भेजी गई। समस्त धनराशि आहरित होने के उपरांत स्थलीय सत्यापन में पाया गया कि भवन निर्माण में एक कमरे का प्लॉस्टर, फर्श, बरामदे का फर्श, विद्यालय की बाहरी दीवारों का प्लॉस्टर बाकी है।

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Dismissed teacher did not get relief on charges of financial irregularities, High Court rejected the petition
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : Amar ujala

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितता के मामले में बर्खास्त शिक्षक को राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि वसूली का आदेश, सिद्ध आरोप की गंभीरता के सापेक्ष समानुपातिक होने के कारण न्यायसंगत है। इस वजह से उसमें कोई हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमेसरी ने सीमा भारती की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

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याची सोनभद्र, दुद्वी डूमर डीहा स्थित विद्यालय में बतौर सहायक अध्यापिका तैनात थी। अध्यापिका को म्योरपुर ब्लॉक में उच्च प्राथमिक विद्यालय कनौड़िया नवीन विद्यालय भवन के निर्माण का प्रभारी बनाया गया था। इसके लिए उसे तीन लाख तिरासी हजार रुपये की धनराशि भेजी गई। समस्त धनराशि आहरित होने के उपरांत स्थलीय सत्यापन में पाया गया कि भवन निर्माण में एक कमरे का प्लॉस्टर, फर्श, बरामदे का फर्श, विद्यालय की बाहरी दीवारों का प्लॉस्टर बाकी है।

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इसके अलावा चहारदीवारी के लिए भेजी गई पचास हजार रुपये की धनराशि आहरित होने के बावजूद निर्माण नहीं कराया गया। अन्य कार्य भी नहीं हुए। इस तरह से एक लाख, 42 हजार रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता की गई। मामले में सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा लेकिन जवाब सही नहीं मिलने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

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याची ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने व साक्ष्यों के अवलोकन के बाद कोर्ट ने कहा कि वित्तीय अनियमितता एक गंभीर अपराध है, जो याची की विश्वसनीयता पर संदेह प्रकट करता है। ऐसे कर्मचारी को शिक्षक के पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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