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Prayagraj News: डीएलएड अभ्यर्थियों को परीक्षा का अतिरिक्त अवसर न देने पर निदेशक तलब
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश के बावजूद डीएलएड अभ्यर्थियों को परीक्षा का अतिरिक्त अवसर न देने पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की निदेशक सरिता तिवारी व अन्य अधिकारियों को अवमानना का दोषी मानते हुए 16 फरवरी को तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि किसी आदेश के खिलाफ अपील लंबित होना, उसके अनुपालन में छूट का आधार नहीं बन जाता, जब तक उस पर कोई स्थगन आदेश न हो।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने याची शीतल की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है। मामला उन डीएलएड अभ्यर्थियों से जुड़ा है जो पहले परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए थे। 6 जुलाई 2023 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याची साक्षी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए परीक्षा से वंचित अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर देने का आदेश दिया था।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि इसके लिए पोर्टल खोला जाएगा और आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी पोर्टल नहीं खोला गया। इसके खिलाफ याचियों ने अवमानना याचिका दाखिल की। अधिकारियों की ओर से तर्क दिया गया कि आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई है।
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हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला मानते हुए अधिकारियों को तलब किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अगर अगली सुनवाई से पहले आदेश का अनुपालन कर दिया जाता है तो अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होना पड़ेगा। उन्हें केवल अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने याची शीतल की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है। मामला उन डीएलएड अभ्यर्थियों से जुड़ा है जो पहले परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए थे। 6 जुलाई 2023 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याची साक्षी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए परीक्षा से वंचित अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर देने का आदेश दिया था।
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अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि इसके लिए पोर्टल खोला जाएगा और आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी पोर्टल नहीं खोला गया। इसके खिलाफ याचियों ने अवमानना याचिका दाखिल की। अधिकारियों की ओर से तर्क दिया गया कि आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई है।
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हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला मानते हुए अधिकारियों को तलब किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अगर अगली सुनवाई से पहले आदेश का अनुपालन कर दिया जाता है तो अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होना पड़ेगा। उन्हें केवल अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा।