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विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने पर डीआईओएस शाहजहांपुर तलब
Wed, 21 Jul 2021 08:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 21 Jul 2021 08:12 PM IST
सार
- हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण, जानबूझकर अदालत के आदेश की अनदेखी पर जताई नाराजगी
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अदालत
- फोटो : file
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने व इस संबंध में अदालत द्वारा दिए गए तमाम आदेशों की अनदेखी करने पर जिला विद्यालय निरीक्षक शाहजहांपुर को तलब कर लिया है। कोर्ट ने उनको उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाए।
शाहजहांपुर की माधुरी मिश्रा की याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने यह आदेश दिया। याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची के पिता बिनोवा भावे इंटर कॉलेज काठ शाहजहांपुर में सहायक अध्यापक थे। सेवाकाल में 25 मई 19 को उनकी मृत्यु हो गई। याची उनकी विवाहित पुत्री है। उसने अनुकंपा आधार पर नियुक्ति देने के लिए आवेदन किया था। जिसे जिला विद्यालय निरीक्षक ने निरस्त कर दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रकरण वापस डीआईओएस शाहजहांपुर को भेज दिया।
डीआईओएस ने 16 जून 2020 को पुन: याची का प्रत्यावेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि ऐसा कोई शासनादेश नहीं है जिसके आधार पर विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। अधिवक्ता का कहना था कि जिला विद्यालय निरीक्षक ने हाईकोर्ट द्वारा पारित उन तमाम आदेशों की अनदेखी की है, जिनमें विवाहित पुत्री को भी परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस का आदेश देखने से स्पष्ट है कि उन्हें अदालत के आदेशों की जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर उन आदेशों की अनदेखी की। कोर्ट ने डीआईओएस को अगली तारीख पर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है।
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शाहजहांपुर की माधुरी मिश्रा की याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने यह आदेश दिया। याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची के पिता बिनोवा भावे इंटर कॉलेज काठ शाहजहांपुर में सहायक अध्यापक थे। सेवाकाल में 25 मई 19 को उनकी मृत्यु हो गई। याची उनकी विवाहित पुत्री है। उसने अनुकंपा आधार पर नियुक्ति देने के लिए आवेदन किया था। जिसे जिला विद्यालय निरीक्षक ने निरस्त कर दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रकरण वापस डीआईओएस शाहजहांपुर को भेज दिया।
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डीआईओएस ने 16 जून 2020 को पुन: याची का प्रत्यावेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि ऐसा कोई शासनादेश नहीं है जिसके आधार पर विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। अधिवक्ता का कहना था कि जिला विद्यालय निरीक्षक ने हाईकोर्ट द्वारा पारित उन तमाम आदेशों की अनदेखी की है, जिनमें विवाहित पुत्री को भी परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस का आदेश देखने से स्पष्ट है कि उन्हें अदालत के आदेशों की जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर उन आदेशों की अनदेखी की। कोर्ट ने डीआईओएस को अगली तारीख पर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है।
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