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प्रयागराज के डीआईओएस निलंबित : बस 13 दिन की कुर्सी पर रहे पीएन सिंह, गलत मान्यता देने के मामले में नपे

Thu, 14 Jul 2022 09:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 14 Jul 2022 09:50 PM IST
सार

राजधानी लखनऊ के सेंटीनियल हायर सेकेंडरी स्कूल के परिसर में मेथोडिस्ट चर्च स्कूल को गलत ढंग से मान्यता देने के मामले में शासन ने बीएसए विजय प्रताप सिंह व पूर्व एडी बेसिक पीएन सिंह को निलंबित कर दिया है। पीएन सिंह वर्तमान में प्रयागराज में डीआईओएस के पद पर तैनात हैं।

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DIOS of Prayagraj suspended PN Singh was in the chair for just 13 days
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar ujala

विस्तार

जिले के डीआईओएस पीएन सिंह को बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिया गया। एक जुलाई को ही उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक प्रयागराज के पद पर ज्वाइन किया था और 13 जुलाई को कार्यालय में मौजूद रहे। लेकिन बृहस्पतिवार को कार्यालय नहीं आए। शायद उन्हें अपने खिलाफ कार्रवाई का एहसास हो गया था। कुछ ही देर बाद उनके निलंबन का आदेश जारी हो गया। उनके निलंबन का आदेश जारी होते ही कार्यालय में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। डीआईओएस पद का कार्यभार संभालने के बाद उनसे मिलने और स्वागत का दौर ही अभी चल रहा था कि निलंबित हो गए। महज 13 दिन के लिए जिले के डीआईओएस रहे। 

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गलत मान्यता देने के मामले में हुई थी कार्रवाई

राजधानी लखनऊ के सेंटीनियल हायर सेकेंडरी स्कूल के परिसर में मेथोडिस्ट चर्च स्कूल को गलत ढंग से मान्यता देने के मामले में शासन ने बीएसए विजय प्रताप सिंह व पूर्व एडी बेसिक पीएन सिंह को निलंबित कर दिया है। पीएन सिंह वर्तमान में प्रयागराज में डीआईओएस के पद पर तैनात हैं। शासन स्तर पर प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा ने इन दोनों अधिकारियों पर यह कार्रवाई जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा द्वारा की गई संस्तुति के बाद की है। प्रकरण में दोनों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ मंडल को सौंपी गई है। साथ ही दोनों अधिकारियों को बेसिक शिक्षा निदेशक शिविर कार्यालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है। 
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मालूम हो कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जब एक जुलाई को नया सत्र प्रारंभ हुआ तो 139 वर्ष पुराने सेंटीनियल हायर सेकेंडरी स्कूल के मूल भवन में मेथोडिस्ट चर्च स्कूल संचालित होता पाया गया। वहीं, सेंटीनियल को इस भवन के सामने स्थित क्रीड़ा मैदान में शिफ्ट कर दिया गया था, जिसमें ताला ताला लगा हुआ था। सेंटीनियल के शिक्षकों और छात्रों को मूल भवन में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था।

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इससे परेशान होकर गत आठ जुलाई को सेंटीनियल के शिक्षकों ने मूल भवन के सामने सड़क पर दरी बिछाकर अपने छात्रों की कक्षाएं शुरू कर दीं। इससे मामले ने तूल पकड़ा और नौ जुलाई को घंटों चली डीएम, सीडीओ, नगर मजिस्ट्रेट समेत शिक्षा व पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बाद सेंटीनियल स्कूल से कब्जा हटाया गया। इसके छात्रों को मूल भवन में प्रवेश मिला और मेथोडिस्ट चर्च स्कूल को बंद कर उसके 121 छात्रों को दूसरे स्कूलों में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। मामले में कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने 12 लोगों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देते हुए विभागीय जांच के आदेश भी दिए थे। 


प्रमुख सचिव दीपक कुमार की ओर से जारी पत्र के अनुसार जांच में पाया गया है कि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल की जमीन पर मेथोडिस्ट चर्च स्कूल को मान्यता देने के प्रकरण में दोनों अधिकारियों बीएसए और तत्कालीन एडी बेसिक ने गहनता से जांच नहीं की। सहायता प्राप्त स्कूल की जमीन विभाग में बंधक होती है, जिस पर निजी स्कूल को मान्यता नहीं दी जा सकती। मान्यता देने में दोनों अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती है।

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