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दिलीप कुमार भी चख चुके हैं ‘इलाहाबादी सेवईं’
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 09 Jun 2017 02:13 AM IST
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दीलीप कुमार को मिल चुका है पद्म सम्मान
- फोटो : Getty
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माहे मुकद्दस के रोजों के बाद ईद खुशियों की सौगात और सेवइयों की मिठास लेकर आएगी। पहले अशरे के बाद से ही सेवइयों का बाजार सजने और धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा है। वैसे तो इसका कारोबार बारहों महीने चलता है लेकिन शबेबरात की दस्तक के साथ काम में तेजी आती है जो ईद के साथ ही थमती है। इस दौरान कारीगर पूरी मुस्तैदी से सेवइयां बनाते हैं ताकि ईद पर सभी को मिठास मिले।
वैसे तो इलाहाबाद में बनारस, कानपुर से लेकर मुंबई तक की सेवइयां आती हैं लेकिन बाजार में इलाहाबादी सेवइयों की धूम है। खास तो यह कि मशहूर फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार भी इलाहाबादी सेवइयां चख चुके हैं। इतना ही नहीं बाजार में बिक रही ‘दिलीप सेवईं’ के दिलीप कोई और नहीं बल्कि दिलीप कुमार ही हैं। दरअसल इसकी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। तकरीबन चार दशक पहले अटाला के हाजी मुहम्मद हनीफ ने देसी तरीके से हाथ से सेवइयां बनाने का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे काम बेहतर हुआ तो उनकी सेवईं को शोहरत मिलने लगी।
उनके पोते और दिलीप सेवईं के मालिक शाहनवाज कहते हैं, दादा, दिलीप कुमार के बहुत बड़े फैन थे। वह अपनी सेवइयां लेकर दिलीप कुमार के पास मुंबई गए थे। वहां उन्होंने दिलीप साहब से उनके नाम पर सेवईं के लिए रजामंदी मांगी थी, जिसे उन्होंने कुबूल कर लिया था। बस, तभी से ये सेवइयां ‘दिलीप सेवईं’ के नाम से मशहूर हो गईं। वैसे तो तमाम लोग भले ही चांद रात या उससे पहले सेवइयां खरीदते हैं लेकिन रमजान की शुरुआत से ही इलाहाबाद की बड़ी सेवईं मंडी से ग्रामीण क्षेत्रों सहित कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, जौनपुर सहित दूसरे तमाम जिलों के सेवईं की खरीद का सिलसिला शुरू है। ऐन वक्त पर भीड़ से बचने के लिए भी तमाम लोग सेवइयां खरीदने लगे हैं।
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नूरुल्लाह रोड के इमरान भाई, शमशाद, शहनवाज हों, नखासकोहना के खालिद, सरफराज, शम्सुल, नूरुद्दीन, कटरा के करीमुल हक या प्रीतमनगर के इनामुल, शहर के तकरीबन हर बाजार में सेवइयों की दुकानें सजी हैं। कारोबारियों के मुताबिक ईद तक कुल मिलाकर तकरीबन पंद्रह टन सेवइयों की खपत हो सकती है। हिंद सेवईं के मुहम्मद हसीन कहते हैं, रमजान में स्थानीय स्तर पर रोजाना तकरीबन एक हजार किलो तक सेवइयां तैयार होती हैं।
सेवइयां तो बस मैदे, पानी के मेल से तैयार होती हैं लेकिन इन्हें फिल्टर करने और बनाने का तरीका ही इन्हें खास बनाता है। बाजार में फिलहाल मोटी, महीन, वर्मीसेल्ली, छत्ता, सादी, भुनी, किमामी, इलाहाबादी सेवईं सहित तकरीबन दर्जन भर किस्में कमाल के स्वाद के साथ प्यालियों में परोसी जाएंगी लेकिन इनके बीच किमामी का कमाल और अंदाज अलग होगा। अबकी बाजार में सेवइयां तीस से लेकर सौ रुपये प्रति किलो तक हैं।
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वैसे तो इलाहाबाद में बनारस, कानपुर से लेकर मुंबई तक की सेवइयां आती हैं लेकिन बाजार में इलाहाबादी सेवइयों की धूम है। खास तो यह कि मशहूर फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार भी इलाहाबादी सेवइयां चख चुके हैं। इतना ही नहीं बाजार में बिक रही ‘दिलीप सेवईं’ के दिलीप कोई और नहीं बल्कि दिलीप कुमार ही हैं। दरअसल इसकी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। तकरीबन चार दशक पहले अटाला के हाजी मुहम्मद हनीफ ने देसी तरीके से हाथ से सेवइयां बनाने का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे काम बेहतर हुआ तो उनकी सेवईं को शोहरत मिलने लगी।
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उनके पोते और दिलीप सेवईं के मालिक शाहनवाज कहते हैं, दादा, दिलीप कुमार के बहुत बड़े फैन थे। वह अपनी सेवइयां लेकर दिलीप कुमार के पास मुंबई गए थे। वहां उन्होंने दिलीप साहब से उनके नाम पर सेवईं के लिए रजामंदी मांगी थी, जिसे उन्होंने कुबूल कर लिया था। बस, तभी से ये सेवइयां ‘दिलीप सेवईं’ के नाम से मशहूर हो गईं। वैसे तो तमाम लोग भले ही चांद रात या उससे पहले सेवइयां खरीदते हैं लेकिन रमजान की शुरुआत से ही इलाहाबाद की बड़ी सेवईं मंडी से ग्रामीण क्षेत्रों सहित कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, जौनपुर सहित दूसरे तमाम जिलों के सेवईं की खरीद का सिलसिला शुरू है। ऐन वक्त पर भीड़ से बचने के लिए भी तमाम लोग सेवइयां खरीदने लगे हैं।
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नूरुल्लाह रोड के इमरान भाई, शमशाद, शहनवाज हों, नखासकोहना के खालिद, सरफराज, शम्सुल, नूरुद्दीन, कटरा के करीमुल हक या प्रीतमनगर के इनामुल, शहर के तकरीबन हर बाजार में सेवइयों की दुकानें सजी हैं। कारोबारियों के मुताबिक ईद तक कुल मिलाकर तकरीबन पंद्रह टन सेवइयों की खपत हो सकती है। हिंद सेवईं के मुहम्मद हसीन कहते हैं, रमजान में स्थानीय स्तर पर रोजाना तकरीबन एक हजार किलो तक सेवइयां तैयार होती हैं।
सेवइयां तो बस मैदे, पानी के मेल से तैयार होती हैं लेकिन इन्हें फिल्टर करने और बनाने का तरीका ही इन्हें खास बनाता है। बाजार में फिलहाल मोटी, महीन, वर्मीसेल्ली, छत्ता, सादी, भुनी, किमामी, इलाहाबादी सेवईं सहित तकरीबन दर्जन भर किस्में कमाल के स्वाद के साथ प्यालियों में परोसी जाएंगी लेकिन इनके बीच किमामी का कमाल और अंदाज अलग होगा। अबकी बाजार में सेवइयां तीस से लेकर सौ रुपये प्रति किलो तक हैं।