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Digital Arrest : 98 लाख की ठगी में तीन खातों का किया इस्तेमाल, दो साॅफ्टवेयर इंजीनियर को को बनाया है निशाना

Mon, 29 Jul 2024 05:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 29 Jul 2024 05:29 PM IST
सार

पहली बार इंडसइंड बैंक के खाते में 68 लाख रुपये जमा कराए गए। इसके बाद दूसरी बार में एसबीआई के खाते में 13.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। फिर तीसरी बार में एसबीआई के ही एक अन्य खाते में 16.50 लाख रुपये जमा कराए गए। तीनों ही बार उन्हें अलग-अलग बहाने से रकम जमा करने के लिए झांसे में लिया गया।

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Digital Arrest: Three accounts were used in fraud of Rs 98 lakh
Cyber Crime - फोटो : istock

विस्तार

कालिंदीपुरम निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष गुप्ता को डिजिटल अरेस्ट कर 98 लाख की ठगी में तीन खातों का इस्तेमाल हुआ। इनमें से दो एसबीआई, जबकि एक इंडसइंड बैंक का खाता है। इन तीनों खातों में आरटीजीएस माध्यम से रकम जमा कराई गई। साइबर थाना पुलिस इन खातों के बारे में भी जानकारी जुटाने में लग गई है।

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सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच-पड़ताल में यह बात सामने आई है कि साइबर ठगों ने इस घटना में उड़ाई गई पूरी रकम एक खाते में नहीं मंगाई, बल्कि अलग-अलग खातों का इस्तेमाल किया। पहली बार इंडसइंड बैंक के खाते में 68 लाख रुपये जमा कराए गए। इसके बाद दूसरी बार में एसबीआई के खाते में 13.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। फिर तीसरी बार में एसबीआई के ही एक अन्य खाते में 16.50 लाख रुपये जमा कराए गए। तीनों ही बार उन्हें अलग-अलग बहाने से रकम जमा करने के लिए झांसे में लिया गया। पहली बार खाते का ऑडिट करने, जबकि दूसरी व तीसरी बार सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के नाम पर रुपये जमा कराए गए।

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ठगी में इस्तेमाल किए चालू खाते

जिन तीन खातों का इस्तेमाल इस घटना में किया गया, वह चालू हैं। यह किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि फर्म के नाम पर खोले गए थे। इनमें से पहला खाता, जो इंडसइंड बैंक में खुलवाया गया, उसे फ्लाई बाई एजेंसी के नाम से खुलवाया गया था। इसके अलावा दूसरा खाता एसबीआई में महिमा रोड लाइंस के नाम से खोला गया। इसी तरह तीसरा खाता, जो एसबीआई का था, ग्रामीण दिव्यांगजन कल्याण संस्थान के नाम से खुलवाया गया था। चालू खाते के इस्तेमाल के बाबत यह आशंका जताई जा रही है कि इसमें बचत खाते की अपेक्षा ज्यादा रकम का लेनदेन आसानी से किया जा सकता है।

गिरोह के दो राज्यों से जुड़े तार

पुख्ता सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह बात तो तय हो गई है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले गिरोह के तार कम से कम दो राज्यों से तो जुड़े ही हैं। इनमें से एक महाराष्ट्र, जबकि दूसरा उड़ीसा है। दरअसल, ठगी में जिन खातों का इस्तेमाल हुआ, वह इन्हीं राज्यों में स्थित बैंकों में खुलवाए गए। जैसे एसबीआई के जिस खाते में 13.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए, वह उड़ीसा के जनपद जजपुर स्थित बिंझारपुर शाखा का है।

इसी तरह एसबीआई के ही एक अन्य खाते, जिसमें पीड़ित से 16.50 लाख रुपये जमा कराए गए, वह महाराष्ट्र के लातूर जनपद स्थित चाकूर गांव का है। इसी तरह 68 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के जिस खाते में डलवाए गए, वह महाराष्ट्र के ही नासिक शाखा से संबंधित है।

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