प्रयागराज : धर्म सार्वभौमिक मूल्य, यह पूरे समाज को जोड़ता है, रक्षाबंधन उत्सव में बोले कृष्ण गोपाल
इतिहास के बड़े-बड़े सामाजिक आंदोलनों के दौरान लोग गंगा तट पर एक-दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर एकता और समर्पण का संकल्प लेते रहे हैं।
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इतिहास के बड़े-बड़े सामाजिक आंदोलनों के दौरान लोग गंगा तट पर एक-दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर एकता और समर्पण का संकल्प लेते रहे हैं। धर्म किसी एक व्यक्ति द्वारा आरंभ किया गया तत्व नहीं है, बल्कि यह सार्वभौमिक मूल्य है जो पूरे समाज को जोड़ता है। शुक्रवार को यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डाॅ. कृष्ण गोपाल ने व्यक्त किए।
वह ट्रिपलआईटी प्रयागराज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के रक्षाबंधन उत्सव कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। डाॅ. गोपाल ने भगवा ध्वज को धर्म का प्रतीक बताते हुए कहा कि हम ध्वज को रक्षा सूत्र बांधकर धर्म की रक्षा का संकल्प लेते हैं, क्योंकि ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’।
भारत एक बहुभाषी, बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक देश है। इसमें विविधता को आपस में पिरोकर रखने वाला एकमात्र तत्व धर्म ही है। विदेशी आक्रमणों और देश के विभाजन के कारण सामाजिक ताने-बाने में बिखराव आया लेकिन संघ का निरंतर प्रयास इन दूरियों को पाटकर समाज में एकता और बंधुता स्थापित करना रहा है।
वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज भौतिक समृद्धि तो बढ़ रही है लेकिन इसके साथ मन की गरीबी और अकेलापन भी गहराता जा रहा है। अपार्टमेंट संस्कृति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने आह्वान किया कि समाज की पवित्रता बनाए रखने के लिए हमें आत्मीयता और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा देना होगा।
संस्थान के निदेशक मुकुल शरद सुतावणे ने कहा कि रक्षाबंधन अब अबल और सबल के बीच सुरक्षा और संरक्षण का पर्व बन गया है। अंत में उपस्थित 1500 से अधिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने एक-दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर आपसी स्नेह, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का संकल्प लिया। मंच पर विभाग संघ चालक डॉ. कृष्ण पाल, नगर संघ चालक रामेश्वर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन दक्षिण भाग के सह-भाग कार्यवाह वीरेंद्र ने किया। इस दौरान सुबंधु, आशीष मोहन, अंकित, वसु, कृष्णामनोहर, विकास, राजदेव और राजेश समेत कई प्रमुख पदाधिकारी व प्रचारक मौजूद रहे।