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अवमूल्यन वाली संपत्ति जमानत योग्य नहीं:कोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 06 Aug 2015 02:11 AM IST
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इलाहाबाद। जिस संपत्ति के मूल्य में अवमूल्यन संभव है वह संपत्ति जमानत के तौर पर स्वीकार्य नहीं की जा सकती है। क्योंकि ऐसा संभव है कि जमानत पर रखी गई संपत्ति का मूल्य निर्धारित जमानत राशि से भी कम हो जाए। इस स्थिति में अवमूल्यन वाली संपत्ति को जमानत के तौर पर स्वीकार करना उचित नहीं होगा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके गुप्ता ने इसी अवधारणा पर दहेज हत्या के आरोपी राजीव मिश्रा की जमानत के तौर पर प्रस्तुत बंधपत्र जिसमें दो कारें रखी गई थी को अस्वीकार कर दिया।
अभियुक्त की जमानत हाईकोर्ट द्वारा मंजूर की गई थी। उसने निचली अदालत में बंधपत्र प्रस्तुत किया था। कोर्ट के आदेश के अनुसार उसे एक-एक लाख रुपये के दो बंधपत्र देने थे। इसके एवज में उसके परिचितों ने अपनी कार के प्रपत्र कोर्ट में जमानत के तौर पर पेश किए। कोर्ट ने इसकी रिपोर्ट आरटीओ कार्यालय से मांगी तो पता चला कि एक कार का मौजूदा मूल्य दो लाख 75 हजार और दूसरी का एक लाख 35 हजार था। जबकि खरीद केसमय इनकी कीमत वास्तविक थी। कोर्ट ने कहा कि जब दो वर्ष में कार की कीमत पांच लाख से घटकर दो लाख 75 हजार हो गई तो तीस प्रतिशत सलाना की दर से अगले चार वर्षों में कीतम एक लाख रुपये से भी कम हो जाएगी इसलिए ऐसे बंधपत्र को उचित बंधपत्र नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने आवेदक को दूसरा बंधपत्र दाखिल करने की अनुमति देते हुए दोनों बंधपत्र खारिज कर दिए।
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अभियुक्त की जमानत हाईकोर्ट द्वारा मंजूर की गई थी। उसने निचली अदालत में बंधपत्र प्रस्तुत किया था। कोर्ट के आदेश के अनुसार उसे एक-एक लाख रुपये के दो बंधपत्र देने थे। इसके एवज में उसके परिचितों ने अपनी कार के प्रपत्र कोर्ट में जमानत के तौर पर पेश किए। कोर्ट ने इसकी रिपोर्ट आरटीओ कार्यालय से मांगी तो पता चला कि एक कार का मौजूदा मूल्य दो लाख 75 हजार और दूसरी का एक लाख 35 हजार था। जबकि खरीद केसमय इनकी कीमत वास्तविक थी। कोर्ट ने कहा कि जब दो वर्ष में कार की कीमत पांच लाख से घटकर दो लाख 75 हजार हो गई तो तीस प्रतिशत सलाना की दर से अगले चार वर्षों में कीतम एक लाख रुपये से भी कम हो जाएगी इसलिए ऐसे बंधपत्र को उचित बंधपत्र नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने आवेदक को दूसरा बंधपत्र दाखिल करने की अनुमति देते हुए दोनों बंधपत्र खारिज कर दिए।
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