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Research : बैक्टीरिया मुक्त जीवन की चाह में कैंसर को दे रहे आमंत्रण, शोध में हैरान करने वाले तथ्य आए सामने

Mon, 01 Jul 2024 12:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 01 Jul 2024 12:48 PM IST
सार

प्रख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ.अजय सोनकर बताते हैं कि कॉपर आयन बैक्टीरिया को मार देते हैं। तांबे के बर्तन का इस्तेमाल अक्सर घरों में होता है और यह साेचकर कि उसमें रखा पानी स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, लोग नियमित रूप से इसका सेवन करने लग जाते हैं।

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Desire for a bacteria-free life is inviting cancer, surprising facts revealed in research
अजय कुमार सोनकर, वैज्ञानिक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अगर आप खुद को स्वस्थ रखने के लिए लंबे समय तक नियमित रूप से तांबे के बर्तन में रखा पानी पी रहे हैं या रोज दो से तीन बार माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाइए। वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पता लगाया है कि स्वस्थ रहने के लिए बैक्टीरिया मुक्त जीवन की चाह में लोग कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को आमंत्रण दे रहे हैं।

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प्रख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ.अजय सोनकर बताते हैं कि कॉपर आयन बैक्टीरिया को मार देते हैं। तांबे के बर्तन का इस्तेमाल अक्सर घरों में होता है और यह साेचकर कि उसमें रखा पानी स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, लोग नियमित रूप से इसका सेवन करने लग जाते हैं। लेकिन, अधिक दिनों तक लगातार इस्तेमाल करने के कारण इससे मुंह और गले के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों के लिए भी यह घातक साबित हो सकता है।
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इसी तरह अधिक दिनों तक लगातार माउथवॉश का इस्तेमाल करने से भी कैंसर खतरा 95 फीसदी तक बढ़ जाता है। डॉ.सोनकर बताते हैं कि हाल ही में एक लैटिन अमेरिकी और दो यूरोपीय मल्टीसेंटर केस-कंट्रोल अध्ययनों ने प्रतिदिन दो बार से अधिक माउथवाॅश के उपयोग से जुड़े सिर और गर्दन के कैंसर के बढ़ते जोखिम का संकेत दिया है।

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डॉ.अजय ने बताया कि मनुष्य के शरीर में 39 ट्रिलियन (39 खरब) बैक्टीरिया मौजूद हैं। मनुष्य की आंत में बैक्टीरिया की पांच सौ से एक हजार प्रजातियां रहती हैं। इन बैक्टीरिया में स्वास्थ्य के रखरखाव और एंटी एजिंग प्रभाव होते हैं। जैसे कि पाचन और अवशोषण में सहायता करना और प्रतिरक्षा को उत्तेजित करना। ऐसे बैक्टीरिया रक्षा प्रणाली की तरह हमारे शरीर में मौजूद प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले खराब बैक्टीरिया से लड़ कर तमाम रोगों एवं बाह्य हमले से हमारी रक्षा करते हैं।

हम जब ऐसे किसी पदार्थ का उपयोग करते हैं, जिनमें बैक्टीरिया को मारने की क्षमता होती है तो वो हमारे अच्छे बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देते हैं। इससे हमारे शरीर का रक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है और खतरनाक बीमारियों को जन्म देने वाले बैक्टीरिया हावी होने लगते हैं। जर्नल ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार जिन परीक्षण विषयों ने तीन महीने तक रोजाना माउथवॉश का इस्तेमाल किया, उनमें दो बैक्टीरिया ‘फ्यूसोबैक्टीरियम न्यूक्लियेटम’ और ‘स्ट्रेप्टोकोकस एंजिनोसस’ की अधिक सांद्रता देखी गई और दोनों बैक्टीरिया को कैंसरकारी हैं।

चिकित्सक भी सीमित समय के लिए देते हैं एंटीबायोटिक

डॉ.अजय सोनकर बताते हैं कि किसी भी बीमारी के लिए चिकित्सक भी सीमित समय के लिए एंटीबायोटिक देते हैं। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ऐसे बैक्टीरिया को मारने के लिए किया जाता है, जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। अगर अधिक दिनों तक इनका इस्तेमाल किया जाए तो शरीर में तमाम व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं और नई बीमारियों का कारण बनती हैं।
ऐसे नुकसान पहुंचाता है तांबे के बर्तन में रखा पानी

डॉ.अजय ने प्रयागराज स्थित अपनी प्रयोगशाला में शोध के दौरान तांबे के एक बर्तन में पानी रख दिया। बाद में इसकी जांच की तो पता चला कि उसमें आयन उत्पन्न हो गए थे, जो एंटी बैक्टीरियल होते हैं। आयन में विषम संख्या में इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं और चार्ज होते हैं। जब यह टूटकर बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं तो उसे भी तोड़ देते हैं। ऐसे में बैक्टीरिया मरने लग जाते हैं। फ्रेंड बैक्टीरिया के मरने पर कैंसरकारी बैक्टीरिया या शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य बैक्टीरिया, जो शरीर में पहले से मौजूद रहते हैं, वे अनियंत्रित होकर गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं।

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