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मरीजों को डेंगू और बीमार पड़े अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 27 Sep 2016 02:06 AM IST
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Medical Lab
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इलाहाबाद। कोरांव से अपने भतीजे को लेकर इलाज कराने एसआरएन अस्पताल पहुंचे चंद्र प्रकाश सोमवार को दिनभर वहां भटकते रहे। उनके भतीजे को डेंगू हैं, लेकिन कोई डॉक्टर देखने को तैयार नहीं था। कहा गया कि बेड खाली नहीं है। हताश होकर चंद्र प्रकाश भतीजे को लेकर निजी अस्पताल चले गए। कॉल्विन में बने डेंगू वार्ड में कई बेड खाली हैं लेकिन वहां इलाज कराने पहुंचे छोटू (14) को गंभीर बताकर एसआरएन रेफर कर दिया गया। बेली से भी मरीजों को रेफर कर डॉक्टर पल्ला झाड़ रहे हैं। डेंगू पीड़ित मरीजों को सरकारी अस्पतालों के इस रवैये ने और बीमार कर दिया है। इसमें निजी अस्पतालों की चांदी हो गई है। जांच और इलाज के नाम पर मरीजों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है।
एसआरएन के मुकाबले बेली के डेंगू वार्ड में मरीजों की संख्या कम है। वहां नए इमरजेंसी भवन में 12 बेड का नया वार्ड बनाया गया है। कॉल्विन में भी अलग से वार्ड बनाया गया है लेकिन ये वार्ड किसी काम के नहीं। एसआरएन में अतिरिक्त वार्ड की जरूरत है लेकिन मरीजों को बेंच में लिटाकर इलाज किया जा रहा है। इलाज में लापरवाही और मरीजों के साथ इस रवैये की शिकायत पर कमिश्नर ने अपर निदेशक स्वास्य को कॉल्विन अस्पताल में जांच के निर्देश भी दिए थे लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। डेंगू के लिए एसआरएन अस्पताल में अलग से 30 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी बनाया गया है।
इस वार्ड में भर्ती एक मरीज ने बताया कि दवाएं तो मिल जा रही हैं लेकिन वहां आने वाले नए मरीजों को वापस किया जा रहा है। रोजाना दर्जन भर मरीज लौटाए जा रहे हैं जबकि आइसोलेशन वार्ड में भर्ती जिन मरीजों को राहत मिल रही है, उन्हें तत्काल सामान्य वार्ड में रेफर कर दिया जा रहा है। एसआरएन में डेंगू से निपटने की कितनी तैयारी की गई है, इसका अंदाज वेटिंग रूम में तीमारदारों के बैठने के लिए लगी बेंच में पड़े मरीजों को देखकर लगाया जा सकता है। मरीजों को बेंच पर ही लिटाकर प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है और इसके बाद बेड खाली न होने बात कहकर मरीजों को वहां से चलता कर दिया जा रहा है।
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‘डेंगू समेत संक्रामक बीमारियों के मरीजों को सभी दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। मरीज बाहर से दवा खरीदकर नहीं लाएंगे। अगर उनसे दवा मंगाई जाए तो एसआईसी से संपर्क करें, उन्हें दवाएं मुहैया कराईं जाएंगी।’ डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज
‘संक्रामक मरीजों को जरूरत की सभी दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। उन्हें किसी तरह की दिक्कत हो तो एसआईसी कार्यालय में आकर अपनी परेशानी बता सकते हैं।’ डॉ. केके द्विवेदी, एसआईसी, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय
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एसआरएन के मुकाबले बेली के डेंगू वार्ड में मरीजों की संख्या कम है। वहां नए इमरजेंसी भवन में 12 बेड का नया वार्ड बनाया गया है। कॉल्विन में भी अलग से वार्ड बनाया गया है लेकिन ये वार्ड किसी काम के नहीं। एसआरएन में अतिरिक्त वार्ड की जरूरत है लेकिन मरीजों को बेंच में लिटाकर इलाज किया जा रहा है। इलाज में लापरवाही और मरीजों के साथ इस रवैये की शिकायत पर कमिश्नर ने अपर निदेशक स्वास्य को कॉल्विन अस्पताल में जांच के निर्देश भी दिए थे लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। डेंगू के लिए एसआरएन अस्पताल में अलग से 30 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी बनाया गया है।
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इस वार्ड में भर्ती एक मरीज ने बताया कि दवाएं तो मिल जा रही हैं लेकिन वहां आने वाले नए मरीजों को वापस किया जा रहा है। रोजाना दर्जन भर मरीज लौटाए जा रहे हैं जबकि आइसोलेशन वार्ड में भर्ती जिन मरीजों को राहत मिल रही है, उन्हें तत्काल सामान्य वार्ड में रेफर कर दिया जा रहा है। एसआरएन में डेंगू से निपटने की कितनी तैयारी की गई है, इसका अंदाज वेटिंग रूम में तीमारदारों के बैठने के लिए लगी बेंच में पड़े मरीजों को देखकर लगाया जा सकता है। मरीजों को बेंच पर ही लिटाकर प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है और इसके बाद बेड खाली न होने बात कहकर मरीजों को वहां से चलता कर दिया जा रहा है।
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‘डेंगू समेत संक्रामक बीमारियों के मरीजों को सभी दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। मरीज बाहर से दवा खरीदकर नहीं लाएंगे। अगर उनसे दवा मंगाई जाए तो एसआईसी से संपर्क करें, उन्हें दवाएं मुहैया कराईं जाएंगी।’ डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज
‘संक्रामक मरीजों को जरूरत की सभी दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। उन्हें किसी तरह की दिक्कत हो तो एसआईसी कार्यालय में आकर अपनी परेशानी बता सकते हैं।’ डॉ. केके द्विवेदी, एसआईसी, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय