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Allahabad High Court : गैंगस्टर विकास दुबे के भाई दीपक दुबे को हाईकोर्ट से मिली जमानत, धोखाधड़ी का था आरोप

Mon, 29 Aug 2022 11:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 29 Aug 2022 11:24 PM IST
सार

दीपक दुबे के वकील ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। क्योंकि  वह अपराधी स्वर्गीय विकास दुबे के भाई हैं और उनके भाई को जुलाई 2021 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें पुलिस द्वारा चार मामलों में झूठा फंसाया गया था। जबकि वह 16 साल का है।

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Deepak Dubey, brother of gangster Vikas Dubey, got bail from the Allahabad High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के भाई दीपक दुबे को धोखाधड़ी के मामले में जमानत दे दी है । दुबे पर आरोप है कि वह अपराध करने की नीयत से किसी और के नाम से पंजीकृत सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हुए पाया गया। हालांकि, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की पीठ ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याची दीपक उर्फ दीप प्रकाश उर्फ दीपू को जमानत पर छोड़ने की मंजूरी दे दी।

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दीपक दुबे के वकील ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। क्योंकि , वह अपराधी स्वर्गीय विकास दुबे के भाई हैं और उनके भाई को जुलाई 2021 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें पुलिस द्वारा चार मामलों में झूठा फंसाया गया था। जबकि वह 16 साल का है।
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यह तर्क दिया गया था कि उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है कि उन्होंने किसी भी अपराध के लिए अपने मोबाइल फोन नंबर का इस्तेमाल किया और न ही मोबाइल फोन के असली मालिक दया शंकर अग्निहोत्री द्वारा उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराई गई।

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अंत में, यह तर्क दिया गया कि अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है, याची जनवरी 2021 से जेल में है। मुकदमे के शीघ्र समापन की कोई संभावना नहीं है। दूसरी ओर, राज्य की ओर से उपस्थित सरकारी अधिवक्ता ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि विचाराधीन मोबाइल नंबर स्वर्गीय विकास दुबे के नौकर का है और विकास दुबे को भागने में सहायता करने के लिए आवेदक द्वारा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

यह भी तर्क दिया गया कि दया शंकर अग्निहोत्री के बयान के आधार पर विशेष जांच दल द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी और चूंकि दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के नियम ग्राहक के परिवर्तन की अनुमति नहीं देते हैं। इसलिए , आवेदक जमानत पर छोड़ें जाने का हकदार नहीं है।

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