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23 साल बाद आया फैसला, अपराध था चाकू रखना

Tue, 16 Apr 2013 04:51 PM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
इलाहाबाद/ब्यूरो Updated Tue, 16 Apr 2013 04:51 PM IST
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decision came after 23 years in charge of keeping the knife

न्याय मिलने में लगने वाले लंबे समय को लेकर देश में विवाद होता रहा है। बढ़े मामले ही नहीं यहां तक की एक चाकू रखने के जुर्म में भी फैसला आने में 23 साल लग गए।

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चाकू रखने के आरोप में जेल में बंद करेली के रहने वाले अच्छे नामक युवक की जिंदगी के 23 साल अदालतों का चक्कर काटने में बीत गए।

पुलिस की सक्रियता का आलम यह रहा कि इन 23 वर्षों में वह एक भी गवाह अदालत तक नहीं पहुंचा सकी। सभी गवाह खुद पुलिसकर्मी ही थे।

बार-बार साक्ष्य का अवसर दिए जाने के बावजूद जब कोई गवाही नहीं कराई गई तो अदालत ने साक्ष्य का अवसर समाप्त करते हुए अभियुक्त अच्छे को दोषमुक्त कर दिया।

अच्छे को 12 दिसंबर 1988 को तत्कालीन करेली थाने के एसआई विमल श्रीवास्तव ने असगरी मार्केट नाले के पास चाकू के साथ गिरफ्तार दिखाया था। उसके खिलाफ दफा 25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।
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इसके बाद पुलिस इस मुकदमे को भूल गई। बार-बार समन और नोटिस जाने के बावजूद एक भी गवाह अदालत में बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा। कोर्ट ने 23 मई 1990 को आरोप तय कर दिए थे।
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