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Dala Chhath : कल नहाय खाय से आरंभ होगा सूर्योपासना का पर्व छठ, संगम समेत गंगा-यमुना घाटों पर तैयारी शुरू

Thu, 16 Nov 2023 11:21 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Nov 2023 11:21 AM IST
सार

पूर्वांचल विकास एवं छठ पूजा समिति की ओर से छठ महापर्व महोत्सव के लिए संगम तट पर विधिवत तैयारियां शुरू हुईं। संयोजक अजय राय की देखरेख में समिति के कार्यकर्ताओं ने संगम के आसपास बल्लियां लगवाईं। साथ ही शिविर कार्यालय को तैयार करने में भी सभी जुटे रहे।

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Dala Chhath the festival of sun worship will start from Nahay Khay tomorrow
डाला छठ को लेकर संगम तट पर चल रही तैयारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सूर्योपासना के महापर्व छठ की शुरुआत 17 नवंबर को नहाय-खाय से होगी। पर्व को लेकर संगम समेत गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर रात तक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता रहा। नहाय खाय के बाद 18 नवंबर को खरना के बाद 19 को निर्जल उपवास के साथ अस्ताचलगामी जबकि 20 को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महापर्व का समापन होगा।

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पूर्वांचल विकास एवं छठ पूजा समिति की ओर से छठ महापर्व महोत्सव के लिए संगम तट पर विधिवत तैयारियां शुरू हुईं। संयोजक अजय राय की देखरेख में समिति के कार्यकर्ताओं ने संगम के आसपास बल्लियां लगवाईं। साथ ही शिविर कार्यालय को तैयार करने में भी सभी जुटे रहे।

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संयोजक अजय राय बोले, संगम तट की सफाई एवं पूजा में सहयोग भी पुण्यदायी है। सभी के सम्मिलित प्रयास से ही संगम पर महाछठ पर्व भव्यता से मनाया जाएगा। तैयारियों में बृजेश सिंह, भानू प्रताप सिंह, कृष्णा नंद तिवारी, बच्चा सिंह, अभिषेक आर्य, अमन सिंह यादव, अरुण कुमार मालवीय, कन्हैया भाई, जगदेव नंद दुबे आदि जुटे रहे।

Dala Chhath the festival of sun worship will start from Nahay Khay tomorrow
दीपावली के बाद संगम तट पर फूल और पूजन सामग्री का लगा अंबार। - फोटो : अमर उजाला।

अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य शाम 5.22 बजे
 

ज्योतिर्विदों के अनुसार छठ पर्व के तीसरे दिन शाम 5.22 बजे अस्ताचलगामी सूर्य जबकि चौथे दिन 20 नवंबर को सुबह 6.39 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। अर्घ्य देने के बाद सूपों में रखा सामान भगवान सूर्य और माता षष्ठी देवी को अर्पित किया जाता है।

डॉ.अमिताभ गौड़ के अनुसार पहले दिन ही पांच शुभ योग (धृतियोग, प्रवर्धमान नामक औदायिक योग, जय योग, रवियोग और द्विपुष्कर) और तीसरे दिन धनिष्ठा नक्षत्र वृद्धि और ध्रुव नामक दो शुभ योग की स्थिति बन रही है। वहीं छठ महापर्व का समापन (धनिष्ठा नक्षत्र, ध्रुव योग तथा औदायिक) भी शुभ योग में हो रहा है।

ज्योतिर्विद गोपाल जी मालवीय ने बताया, छठ पूजा पर्व में व्रत, उपवास, उपासना पूजा, अर्घ्य, उपयोग की जाने वाली वस्तुओं की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ व्रत रोगों से मुक्ति, संतान के सुख और समृद्धि में वृद्धि के लिए रखा जाता है। नहाय खाय से शुुरुआत के दूसरे दिन खरना को व्रती महिलाएं उपवास करेंगी। शाम को पूजा करने के बाद व्रत का पारण करेंगी। तीसरे दिन महिलाएं निर्जल उपवास रखेंगी। पर्व के चौथे दिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर पारण करेंगी।

संगम तट पर लगा पूजन सामग्री का अंबार

दीपावली बीतने के बाद संगम तट पर फूल माला और अगरबत्ती के रैपर और पॉलीथिन का ढेर लग गया है। पूजन के बाद लोग भगवान की पुरानी मूर्तियों के साथ ही मूर्तियों पर चढ़ाए गए फूल माला, चुनरी, अगरबत्ती के रैपर आदि को संगम तट पर फेंक दिया है। गंगा में फूल माला फेंकने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। बावजूद इसके शास्त्री पुल, नए यमुना पुल, कर्जन ब्रिज, फाफामऊ ब्रिज से लोग फूल माला और पूजन सामग्री गंगा और यमुना में फेंक रहे हैं। संगम सहित अन्य घाटों पर भी पूजन सामग्री के कचरे का अंबार लगा है। 

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