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मायावती के खिलाफ आपराधिक अवमानना की अर्जी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 03 Feb 2017 01:56 AM IST
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मुख्तार अंसारी व मायावती
- फोटो : amar ujala
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बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा बाहुबली मुख्तार अंसारी को निर्दोष बताने पर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का केस चलाने की अर्जी दी गई है। मऊ निवासी अशोक कुमार सिंह ने महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश के समक्ष अर्जी दाखिल की है। महाधिवक्ता इस अर्जी पर 13 फरवरी को सुनवाई करेंगे।
अर्जी में अशोक सिंह ने कहा है कि उसके भाई अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की 2009 में हत्या कर दी गई थी। 2010 में इस हत्या के गवाह और उसके सरकारी गनर की भी हत्या कर दी गई। इन दोनों मामलों में मुख्तार अंसारी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। मुकदमों का विचारण अदालत कर रही है इसके बावजूद मायावती ने 25 जनवरी को मुख्तार को बीएसपी में यह कहते हुए शामिल कर लिया कि वह अपराधी नहीं है। उनकी छवि खराब की गई है। कहा गया है कि मायावती का यह बयान आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है इसलिए उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना का केस दाखिल करने की अनुमति दी जाए।
बता दें कि आपराधिक अवमानना का केस हाईकोर्ट में दाखिल करने के लिए महाधिवक्ता की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है। इसके लिए याची को सर्वप्रथम महाधिवक्ता के समक्ष अर्जी देकर अनुमति मांगनी होती है। अर्जी पर सुनवाई के बाद यदि महाधिवक्ता इस बात की अनुमति देते हैं तो आपराधिक अवमानना का केस हाईकोर्ट में दाखिल किया जा सकता है।
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अर्जी में अशोक सिंह ने कहा है कि उसके भाई अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की 2009 में हत्या कर दी गई थी। 2010 में इस हत्या के गवाह और उसके सरकारी गनर की भी हत्या कर दी गई। इन दोनों मामलों में मुख्तार अंसारी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। मुकदमों का विचारण अदालत कर रही है इसके बावजूद मायावती ने 25 जनवरी को मुख्तार को बीएसपी में यह कहते हुए शामिल कर लिया कि वह अपराधी नहीं है। उनकी छवि खराब की गई है। कहा गया है कि मायावती का यह बयान आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है इसलिए उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना का केस दाखिल करने की अनुमति दी जाए।
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बता दें कि आपराधिक अवमानना का केस हाईकोर्ट में दाखिल करने के लिए महाधिवक्ता की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है। इसके लिए याची को सर्वप्रथम महाधिवक्ता के समक्ष अर्जी देकर अनुमति मांगनी होती है। अर्जी पर सुनवाई के बाद यदि महाधिवक्ता इस बात की अनुमति देते हैं तो आपराधिक अवमानना का केस हाईकोर्ट में दाखिल किया जा सकता है।
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