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महिलाओं के खिलाफ 63 फीसदी बढ़ा अपराध
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 24 Aug 2016 02:11 AM IST
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इलाहाबाद। एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान में अरबों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं में तेजी से इजाफा हो रहा है। देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हैं। यूपी में पांच साल के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध में 63 फीसदी का इजाफा हुआ है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह कि बलात्कार पीड़ितों में 59 फीसदी नाबालिग लड़कियां हैं। यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
सीएजी की दस सदस्यीय टीम ने महिला सशक्तिकरण पर वर्ष 2010 से 2015 तक की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। प्रधान महालेखाकार पीके कटारिया ने बताया कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 में बलात्कार के मामले में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। दस वर्ष से कम आयु वर्ग में 44 फीसदी, 11 से 18 वर्ष आयु वर्ग में 57 फीसदी और 18 से अधिक आयु वर्ग में 27 फीसदी का इजाफा हुआ है। दहेज के लिए हत्या या इसके प्रयास से संबंधित मामलों में पांच वर्षों के दौरान 11 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2010-11 में मानसिक एवं शारीरिक प्रताणना के 7302 मामले थे, जो 2014-15 में बढ़कर 9476 हो गए। 2010-11 में शील भंग के आशय से महिलाओं पर हुए हमले के 2989 मामले थे, जो 2014-15 में बढ़कर 7972 हो गए।
इस अपराध से पीड़ितों में सर्वाधिक 55 फीसदी संख्या नाबालिग लड़कियों की है। प्रदेश के ऐसे जनपद जहां शीलभंग करने के आशय से सर्वाधिक मामले दर्ज हुए, उनमें लखनऊ (1205), मेरठ (1125), अलीगढ़ (1067), आगरा (979) और इलाहाबाद (767) शामिल हैं। इसके अलावा अपहरण के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। इस अपराध का शिकार 71 फीसदी नाबालिग लड़कियां हुई। जिन पांच शहरों में ऐसे सर्वाधिक मामले सामने आए, उनमें अलीगढ़ (1524), कानपुर नगर (1511), आगरा (1502), लखनऊ (1274) और मेरठ (1109) शामिल हैं।
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एक लाख की आबादी में 81 पुलिस कर्मी
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की आबादी 19.98 करोड़ है और इनकी रक्षा के लिए तैनात पुलिस कर्मियों की संख्या एक लाख 62 हजार 783 है। इस प्रकार वर्ष 2014-15 तक प्रदेश में कानून व्यवस्था को लागू करने और सभी प्रकार के अपराधों से निपटने के लिए (जिसमें महिलाओं के खिलाफ भी अपराध शामिल है) एक लाख की आबादी पर महज 81 पुलिस कर्मी तैनात थे।
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पुलिस बल में महज साढ़े चार फीसदी महिलाएं
- प्रदेश में महिलाओं की आबादी 9.38 करोड़ है। जहां महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक मामले हैं, वहां 2014-15 तक महिला पुलिस कर्मियों की संख्या महज 7404 थी, जो कुल उपलब्ध पुलिस बल का महज 4.55 फीसदी थी। गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से राज्यों को संस्तुति की गई थी कि पुलिस में 33 फीसदी तक महिलाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। सीएजी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में गृह मंत्रालय की संस्तुतियों को कार्यान्वित करने पर विचार करने के लिए सिफारिश की है।
वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक महिलाओं के खिलाफ अपराध का विवरण
वर्ष-बलात्कार-दहेज हत्या अथवा प्रयास-मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना-शील भंग के आशय से हमला-अपहरण
2010-11 - 1582 - 2817 - 7302 - 2989 - 5145
2011-12 - 1962 - 2865 - 6540 - 3430 - 6678
2012-13 - 2058 - 2869 - 7155 - 4106 - 7075
2013-14 - 2940 - 3116 - 8902 - 7092 - 8510
2014-15 - 2945 - 3119 - 9476 - 7972 - 8964
योग 11487 - 14786 - 39375 - 25589 - 36354
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सीएजी की दस सदस्यीय टीम ने महिला सशक्तिकरण पर वर्ष 2010 से 2015 तक की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। प्रधान महालेखाकार पीके कटारिया ने बताया कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 में बलात्कार के मामले में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। दस वर्ष से कम आयु वर्ग में 44 फीसदी, 11 से 18 वर्ष आयु वर्ग में 57 फीसदी और 18 से अधिक आयु वर्ग में 27 फीसदी का इजाफा हुआ है। दहेज के लिए हत्या या इसके प्रयास से संबंधित मामलों में पांच वर्षों के दौरान 11 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2010-11 में मानसिक एवं शारीरिक प्रताणना के 7302 मामले थे, जो 2014-15 में बढ़कर 9476 हो गए। 2010-11 में शील भंग के आशय से महिलाओं पर हुए हमले के 2989 मामले थे, जो 2014-15 में बढ़कर 7972 हो गए।
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इस अपराध से पीड़ितों में सर्वाधिक 55 फीसदी संख्या नाबालिग लड़कियों की है। प्रदेश के ऐसे जनपद जहां शीलभंग करने के आशय से सर्वाधिक मामले दर्ज हुए, उनमें लखनऊ (1205), मेरठ (1125), अलीगढ़ (1067), आगरा (979) और इलाहाबाद (767) शामिल हैं। इसके अलावा अपहरण के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। इस अपराध का शिकार 71 फीसदी नाबालिग लड़कियां हुई। जिन पांच शहरों में ऐसे सर्वाधिक मामले सामने आए, उनमें अलीगढ़ (1524), कानपुर नगर (1511), आगरा (1502), लखनऊ (1274) और मेरठ (1109) शामिल हैं।
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एक लाख की आबादी में 81 पुलिस कर्मी
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश की आबादी 19.98 करोड़ है और इनकी रक्षा के लिए तैनात पुलिस कर्मियों की संख्या एक लाख 62 हजार 783 है। इस प्रकार वर्ष 2014-15 तक प्रदेश में कानून व्यवस्था को लागू करने और सभी प्रकार के अपराधों से निपटने के लिए (जिसमें महिलाओं के खिलाफ भी अपराध शामिल है) एक लाख की आबादी पर महज 81 पुलिस कर्मी तैनात थे।
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पुलिस बल में महज साढ़े चार फीसदी महिलाएं
- प्रदेश में महिलाओं की आबादी 9.38 करोड़ है। जहां महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक मामले हैं, वहां 2014-15 तक महिला पुलिस कर्मियों की संख्या महज 7404 थी, जो कुल उपलब्ध पुलिस बल का महज 4.55 फीसदी थी। गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से राज्यों को संस्तुति की गई थी कि पुलिस में 33 फीसदी तक महिलाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। सीएजी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में गृह मंत्रालय की संस्तुतियों को कार्यान्वित करने पर विचार करने के लिए सिफारिश की है।
वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक महिलाओं के खिलाफ अपराध का विवरण
वर्ष-बलात्कार-दहेज हत्या अथवा प्रयास-मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना-शील भंग के आशय से हमला-अपहरण
2010-11 - 1582 - 2817 - 7302 - 2989 - 5145
2011-12 - 1962 - 2865 - 6540 - 3430 - 6678
2012-13 - 2058 - 2869 - 7155 - 4106 - 7075
2013-14 - 2940 - 3116 - 8902 - 7092 - 8510
2014-15 - 2945 - 3119 - 9476 - 7972 - 8964
योग 11487 - 14786 - 39375 - 25589 - 36354