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पत्नी से फोन पर कहा, घुट रहा है मेरा दम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 20 Jun 2015 01:41 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रतापगढ़ के होटल में आग लगने के बाद मनोज शर्मा
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भी अपने कमरे में फंस गए थे। पत्नी ममता को फोनकर उन्होंने बताया कि होटल
में आग लगी है। मेरा दम घुट रहा है। सुबह के समय यह खबर सुनकर पत्नी अवाक
रह गईं। पत्नी ने तत्काल मनोज के सहकर्मी को फोनकर घटना की जानकारी दी।
जब तक मनोज के साथी पहुंच कर उन्हें बाहर निकालते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मनोज के मौत की खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया गया। पत्नी ममता बिलख पड़ीं। वह यकीन नहीं कर पा रही थीं कि उनके पति अब दुनिया में नहीं रहे।सभी केंद्र( प्रतापगढ़ के होटल में आग)
इसी तरह प्रतापगढ़ के होटल में अग्निकांड में घायल छह लोगों को यहां एसआरएन अस्पताल भेजा गया जिनमें तीन लोग इलाज के बाद अपने घर चले गए। गंभीर घायल दो लोगों का अब भी उपचार हो रहा है। बाल-बाल बचे ये दोनों लोग परिजनों और पत्रकारों को घटना के बारे में बताते वक्त कांप जा रहे थे। गले में उनकी आवाज फंस रही थी और आंखों में आंसू टपक रहे थे। जान बचाने के लिए इन दोनों ने होटल की दूसरी मंजिल की खिड़की से छलांग लगा दी थी। घायल हुए मगर जान तो बच गई।
अग्निकांड में घायल हुए लालगंज प्रतापगढ़ के अंकित जायसवाल (24), वाराणसी में लहरतारा इलाके के रवि कुमार (30), फाफामऊ में शांतिपुरम कॉलोनी के विकास सिंह (35), गोरखपुर के संजय सिंह (38) और उनकी पत्नी व्रिस्टी (35) तथा वाराणसी के ओम अग्रवाल को इलाज के लिए प्रतापगढ़ से एसआरएन अस्पताल लाया गया। उपचार के बाद तीन लोग अस्पताल ले चले गए, मगर अंकित और रवि समेत तीन घायलों का इलाज जारी है। रवि कुमार कार ड्राइवर है। वह घटना में जख्मी हुए एक कंपनी के आडिटर ओम अग्रवाल को लेकर प्रतापगढ़ गया था। आग लगने पर जान बचाने के लिए वह होटल की दूसरी मंजिल की खिड़की का कांच तोड़कर बाहर कूद गया था।
उसके दोनों पैर टूट गए। अंकित ने भी इसी तरह से कूदकर जान बचाई थी। रवि दोपहर बाद उन दोनों के परिजन भी अस्पताल आ गए। अंकित की मां माधुरी उसे देख रोने लगी तो लोगों ने किसी तरह संभाला। आग के मंजर के बारे में बताते वक्त रवि की आंखों में दहशत साफ झलक रही थी। उसने बताया कि भोर में जब सांस लेने में दिक्कत होने पर नींद खुली तो घना धुआं और अंधेरा था। होटल के नीचे आग भड़की थी जो धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रही थी। बाहर निकलने का कोई और रास्ता नहीं मिला। सामने मौत नजर आ रही थी। ऐसे में जान बचाने के लिए उसने होटल की खिड़की का कांच तोड़ा और बाहर कूद गया। अंकित भी यूं ही जान बचा सका। उसके घरवाले खुश हैं कि भले ही चोट पहुंची मगर जिंदगी तो बच गई।
जब तक मनोज के साथी पहुंच कर उन्हें बाहर निकालते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मनोज के मौत की खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया गया। पत्नी ममता बिलख पड़ीं। वह यकीन नहीं कर पा रही थीं कि उनके पति अब दुनिया में नहीं रहे।सभी केंद्र( प्रतापगढ़ के होटल में आग)
इसी तरह प्रतापगढ़ के होटल में अग्निकांड में घायल छह लोगों को यहां एसआरएन अस्पताल भेजा गया जिनमें तीन लोग इलाज के बाद अपने घर चले गए। गंभीर घायल दो लोगों का अब भी उपचार हो रहा है। बाल-बाल बचे ये दोनों लोग परिजनों और पत्रकारों को घटना के बारे में बताते वक्त कांप जा रहे थे। गले में उनकी आवाज फंस रही थी और आंखों में आंसू टपक रहे थे। जान बचाने के लिए इन दोनों ने होटल की दूसरी मंजिल की खिड़की से छलांग लगा दी थी। घायल हुए मगर जान तो बच गई।
अग्निकांड में घायल हुए लालगंज प्रतापगढ़ के अंकित जायसवाल (24), वाराणसी में लहरतारा इलाके के रवि कुमार (30), फाफामऊ में शांतिपुरम कॉलोनी के विकास सिंह (35), गोरखपुर के संजय सिंह (38) और उनकी पत्नी व्रिस्टी (35) तथा वाराणसी के ओम अग्रवाल को इलाज के लिए प्रतापगढ़ से एसआरएन अस्पताल लाया गया। उपचार के बाद तीन लोग अस्पताल ले चले गए, मगर अंकित और रवि समेत तीन घायलों का इलाज जारी है। रवि कुमार कार ड्राइवर है। वह घटना में जख्मी हुए एक कंपनी के आडिटर ओम अग्रवाल को लेकर प्रतापगढ़ गया था। आग लगने पर जान बचाने के लिए वह होटल की दूसरी मंजिल की खिड़की का कांच तोड़कर बाहर कूद गया था।
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उसके दोनों पैर टूट गए। अंकित ने भी इसी तरह से कूदकर जान बचाई थी। रवि दोपहर बाद उन दोनों के परिजन भी अस्पताल आ गए। अंकित की मां माधुरी उसे देख रोने लगी तो लोगों ने किसी तरह संभाला। आग के मंजर के बारे में बताते वक्त रवि की आंखों में दहशत साफ झलक रही थी। उसने बताया कि भोर में जब सांस लेने में दिक्कत होने पर नींद खुली तो घना धुआं और अंधेरा था। होटल के नीचे आग भड़की थी जो धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रही थी। बाहर निकलने का कोई और रास्ता नहीं मिला। सामने मौत नजर आ रही थी। ऐसे में जान बचाने के लिए उसने होटल की खिड़की का कांच तोड़ा और बाहर कूद गया। अंकित भी यूं ही जान बचा सका। उसके घरवाले खुश हैं कि भले ही चोट पहुंची मगर जिंदगी तो बच गई।
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