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फौजी को चूना लगाने वाले का साथी बंदी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 10 Jul 2016 01:35 AM IST
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Absconding Ahmedabad serial blasts (2008) accused Nasir Rangrej arrested
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सिविल लाइंस में पीएनबी बैंक से फौजी महेश चौहान की रकम उड़ाने वाले शातिर तक आखिरकार पुलिस पहुंच गई। शातिरों को सलाखों तक पहुंचाने के लिए फौजी की जिद ने पुलिस को घटना के खुलासे के लिए मजबूर कर दिया। डीआईजी की सर्विलांस टीम ने आखिरकार घटना में शामिल गैंग सरगना के एक साथी बदमाश को दबोच लिया। गिरफ्त में आए रायबरेली निवासी बदमाश से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गैंग का सरगना बस्ती जेल में एक साथी के साथ बंद है।
फौजी महेश चौहान की तैनाती शहर में है। वह तीन फरवरी को सिविल लाइंस में संगम प्लेस स्थित पीएनबी शाखा में एक लाख रुपये जमा करने पहुंचे थे। वहां उन्हें एक शातिर मिल गया। जिसकी बातचीत से महेश को लगा कि वह बैंक का कर्मचारी है। उसने महेश को बातों में फंसाकर रकम से भरा बैग ले लिया और उसे कागज की फोटोकॉपी कराने भेज दिया। फौजी लौटा तो शातिर गायब था। बैंक से मिली फुटेज के आधार शातिर का चेहरा सामने आ गया लेकिन पुलिस उसे दबोच नहीं पा रही थी।
फौजी ने पुलिस अफसरों से गुहार लगाई। तब तत्कालीन डीआईजी ने सर्विलांस सेल में तैनात दरोगा विनोद कुमार सिंह और सिपाही पंकज दुबे को घटना के खुलासे में लगाया। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध नंबर मिला। वह बस्ती में चल रहा था लेकिन इधर कुछ ही दिन में मोबाइल बंद हो गया। तब सीडीआर से पुलिस ने उसके एक साथी का नंबर ट्रेस कर लिया। वह फौजी के साथ तीन फरवरी को हुई घटना में पीएनबी शाखा के पास मौजूद था। फिर उसकी लोकेशन बस्ती में भी मिली। उसकी लोकेशन ट्रेस कर एसआई विनोद कुमार सिंह ने घेरेबंदी कर दबोच लिया। तब उसने बताया कि उसका नाम संकेत श्रीवास्तव है और वह रायबरेली का रहने वाला है।
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पुलिस ने उसे फौजी की रकम उड़ाने वाले शातिर की फोटो दिखाई तो उसने शिनाख्त कर दी। उसने बताया कि फोटो रायबरेली के दीपक गुप्ता की है। दीपक वर्तमान में अपने एक साथी शैलेंद्र के साथ बस्ती जेल में बंद है। उसे बस्ती पुलिस ने 11 मार्च को बैंक से रकम उड़ाने के दौरान पकड़ लिया था। तब से वह जेल में बंद है। संकेत ने बताया कि दीपक गैंग का सरगना है। शैलेंद्र इनोवा का ड्राइवर है। वे तीनों इनोवा से जाते हैं और बैंक के अंदर शिकार खोज कर रकम उड़ा देते हैं। वे दोबारा बस्ती की बैंक पहुंचे थे। तभी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। वे शहर में छह जनवरी को एक पीवीआर कर्मी का 50 हजार रुपये यूनियन बैंक से उड़ा चुके हैं। उस मामले की रिपोर्ट नहीं लिखी गई। वह भुक्तभोगी अपनी सैलरी से हर महीने तीन हजार रुपये कटवा रहा है। पकड़े गए आरोपी को सिविल लाइंस पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। गिरोह के सदस्य अब तक दर्जनों वारदात रायबरेली, बाराबंकी, बस्ती, सुल्तानपुर और इलाहाबाद में कर चुके हैं।
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फौजी महेश चौहान की तैनाती शहर में है। वह तीन फरवरी को सिविल लाइंस में संगम प्लेस स्थित पीएनबी शाखा में एक लाख रुपये जमा करने पहुंचे थे। वहां उन्हें एक शातिर मिल गया। जिसकी बातचीत से महेश को लगा कि वह बैंक का कर्मचारी है। उसने महेश को बातों में फंसाकर रकम से भरा बैग ले लिया और उसे कागज की फोटोकॉपी कराने भेज दिया। फौजी लौटा तो शातिर गायब था। बैंक से मिली फुटेज के आधार शातिर का चेहरा सामने आ गया लेकिन पुलिस उसे दबोच नहीं पा रही थी।
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फौजी ने पुलिस अफसरों से गुहार लगाई। तब तत्कालीन डीआईजी ने सर्विलांस सेल में तैनात दरोगा विनोद कुमार सिंह और सिपाही पंकज दुबे को घटना के खुलासे में लगाया। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध नंबर मिला। वह बस्ती में चल रहा था लेकिन इधर कुछ ही दिन में मोबाइल बंद हो गया। तब सीडीआर से पुलिस ने उसके एक साथी का नंबर ट्रेस कर लिया। वह फौजी के साथ तीन फरवरी को हुई घटना में पीएनबी शाखा के पास मौजूद था। फिर उसकी लोकेशन बस्ती में भी मिली। उसकी लोकेशन ट्रेस कर एसआई विनोद कुमार सिंह ने घेरेबंदी कर दबोच लिया। तब उसने बताया कि उसका नाम संकेत श्रीवास्तव है और वह रायबरेली का रहने वाला है।
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पुलिस ने उसे फौजी की रकम उड़ाने वाले शातिर की फोटो दिखाई तो उसने शिनाख्त कर दी। उसने बताया कि फोटो रायबरेली के दीपक गुप्ता की है। दीपक वर्तमान में अपने एक साथी शैलेंद्र के साथ बस्ती जेल में बंद है। उसे बस्ती पुलिस ने 11 मार्च को बैंक से रकम उड़ाने के दौरान पकड़ लिया था। तब से वह जेल में बंद है। संकेत ने बताया कि दीपक गैंग का सरगना है। शैलेंद्र इनोवा का ड्राइवर है। वे तीनों इनोवा से जाते हैं और बैंक के अंदर शिकार खोज कर रकम उड़ा देते हैं। वे दोबारा बस्ती की बैंक पहुंचे थे। तभी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। वे शहर में छह जनवरी को एक पीवीआर कर्मी का 50 हजार रुपये यूनियन बैंक से उड़ा चुके हैं। उस मामले की रिपोर्ट नहीं लिखी गई। वह भुक्तभोगी अपनी सैलरी से हर महीने तीन हजार रुपये कटवा रहा है। पकड़े गए आरोपी को सिविल लाइंस पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। गिरोह के सदस्य अब तक दर्जनों वारदात रायबरेली, बाराबंकी, बस्ती, सुल्तानपुर और इलाहाबाद में कर चुके हैं।