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त्रिस्तरीय है सुरक्षा , फिर भी कोर्ट रूम तक पहुंचा बम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 28 Oct 2016 02:09 AM IST
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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हाईकोर्ट की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। हाल के दिनों में हुई घटनाओं और आए दिन खुफिया एजेंसियों के अलर्ट के बाद हाईकोर्ट की सुरक्षा को लेकर खास चौकसी बरती जाती है। सिविल पुलिस और सीआरपीएफ का त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा रहता है। हाईकोर्ट के प्रवेश द्वार पर सीआरपीएफ का घेरा रहता है। बिना पास कोई भी कोर्ट परिसर में दाखिल नहीं हो सकता है। डोर मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरे से भी परिसर में दाखिल करने वाले लोगों पर नजर रखी जाती है।
इसके बाद भी शातिर सुरक्षा घेरा तोड़कर हाईकोर्ट परिसर में ही दाखिल नहीं हुआ बल्कि कोर्ट रूम तक पहुंच गया। पुलिस और प्रशासन के अफसर भले ही इसे अराजक तत्व की करतूत बता रहे हों, जिसने दहशत फैलाने के लिए ऐसा किया है लेकिन यह घटना हाईकोर्ट की सुरक्षा में बड़ी चूक है। मामले की रिपोर्ट कैंट थाने में दर्ज कर बम रखने वाले की तलाश की जा रही है। पुलिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को कुछ सुराग मिल सकता है।
हाईकोर्ट परिसर में 210 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जिससे हाईकोर्ट परिसर के अंदर निगरानी की जाती है। एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बना है। कंट्रोल रूम में तैनात 150 पुलिसकर्मी इन कैमरों से संदिग्धों पर नजर रखते हैं।
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हाईकोर्ट परिसर की सुरक्षा की निगरानी के लिए सात जजों की विशेष पीठ गठित है। पीठ समय-समय पर प्रशासन के अफसरों को सुरक्षा को लेकर निर्देश देती रही है। लेकिन इसके बाद भी अराजक तत्व कैसे विस्फोटक लेकर कोर्ट रूम तक पहुंच गया। यह सुरक्षा में बड़ी चूक है।
हाईकोर्ट की सुरक्षा को देखते हुए परिसर के अंदर की पार्किंग खाली करा लिया गया। हाल के दिनों में हुई आतंकी घटनाओं और दहशतगर्दों की तरफ से हाईकोर्ट को निशाना बनाने की धमक ी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
हाईकोर्ट में प्रवेश के लिए विशेष प्रवेश द्वार बनाया गया है। इस गेट पर अत्याधुनिक उपकरण लगेज स्कैनर, डोर मेटल डिटेक्टर, बायोमैट्रिक स्कैनर की जांच के बाद परिसर में दाखिल हो सकते हैं।
सीआरपीएफ और हाईकोर्ट सुरक्षा में लगे पुलिस अफसरों को गुरूवार रात कोर्ट नंबर 55 में पॉली बैग के अंदर संदिग्ध वस्तु होने की सूचना पर बीडीएस टीम ने पड़ताल की। जांच में प्लास्टिक के टिफिन के खाने में बम मिला। जिसे डिफ्यूज कर दिया गया। यह किसी शरातती तत्व की करतूत है। मामले की जांच की जा रही है।---संजय कुमार डीएम
टिफिन के अंदर देशी बम और पटाखा मिला है। जिसे बनाने में गिट्टी, सुतली और बारूद का इस्तेमाल किया गया है। यह किसी अराजक तत्व की करतूत है। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बारूद को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया है।---शलभ माथुर एसएसपी।
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इसके बाद भी शातिर सुरक्षा घेरा तोड़कर हाईकोर्ट परिसर में ही दाखिल नहीं हुआ बल्कि कोर्ट रूम तक पहुंच गया। पुलिस और प्रशासन के अफसर भले ही इसे अराजक तत्व की करतूत बता रहे हों, जिसने दहशत फैलाने के लिए ऐसा किया है लेकिन यह घटना हाईकोर्ट की सुरक्षा में बड़ी चूक है। मामले की रिपोर्ट कैंट थाने में दर्ज कर बम रखने वाले की तलाश की जा रही है। पुलिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को कुछ सुराग मिल सकता है।
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हाईकोर्ट परिसर में 210 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जिससे हाईकोर्ट परिसर के अंदर निगरानी की जाती है। एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बना है। कंट्रोल रूम में तैनात 150 पुलिसकर्मी इन कैमरों से संदिग्धों पर नजर रखते हैं।
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हाईकोर्ट परिसर की सुरक्षा की निगरानी के लिए सात जजों की विशेष पीठ गठित है। पीठ समय-समय पर प्रशासन के अफसरों को सुरक्षा को लेकर निर्देश देती रही है। लेकिन इसके बाद भी अराजक तत्व कैसे विस्फोटक लेकर कोर्ट रूम तक पहुंच गया। यह सुरक्षा में बड़ी चूक है।
हाईकोर्ट की सुरक्षा को देखते हुए परिसर के अंदर की पार्किंग खाली करा लिया गया। हाल के दिनों में हुई आतंकी घटनाओं और दहशतगर्दों की तरफ से हाईकोर्ट को निशाना बनाने की धमक ी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
हाईकोर्ट में प्रवेश के लिए विशेष प्रवेश द्वार बनाया गया है। इस गेट पर अत्याधुनिक उपकरण लगेज स्कैनर, डोर मेटल डिटेक्टर, बायोमैट्रिक स्कैनर की जांच के बाद परिसर में दाखिल हो सकते हैं।
सीआरपीएफ और हाईकोर्ट सुरक्षा में लगे पुलिस अफसरों को गुरूवार रात कोर्ट नंबर 55 में पॉली बैग के अंदर संदिग्ध वस्तु होने की सूचना पर बीडीएस टीम ने पड़ताल की। जांच में प्लास्टिक के टिफिन के खाने में बम मिला। जिसे डिफ्यूज कर दिया गया। यह किसी शरातती तत्व की करतूत है। मामले की जांच की जा रही है।---संजय कुमार डीएम
टिफिन के अंदर देशी बम और पटाखा मिला है। जिसे बनाने में गिट्टी, सुतली और बारूद का इस्तेमाल किया गया है। यह किसी अराजक तत्व की करतूत है। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बारूद को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया है।---शलभ माथुर एसएसपी।