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तीन करीबी निगाह में, हो रही निगरानी

Fri, 20 Jan 2017 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 20 Jan 2017 01:47 AM IST
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Three close watch, getting vigil
रास्ते के विवाद में गई महिला की जान - फोटो : demo pic
डॉ.एके बंसल की हत्या में एक अदद सुराग की तलाश में भटक रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने तमाम अपराधियों के अलावा डॉक्टर के तीन खास करीबियों को भी निगरानी में रखा है। ये तीनों डॉक्टर के अस्पताल से लेकर प्रापर्टी समेत बाकी काम भी देखते थे। उन्हें हर मसले और खतरे की जानकारी थी। किससे खुन्नस और क्या धमकी मिली है, इस बाबत भी डॉक्टर इन तीनों से चर्चा करते थे, मगर उनके कत्ल में ये तीनों ही कुछ भी ठोस जानकारी नहीं दे सके हैं।
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डॉ.बंसल हत्याकांड के तीसरे रोज से एसटीएफ को करीबियों की भूमिका पर संदेह होने लगा था। चैंबर में मौजूद रहे कर्मचारी भी पुलिस को कुछ भी खास नहीं बता सके थे और कहते रहे कि दहशत में वे शूटरों पर ध्यान नहीं दे सके। मगर तीन खास करीबियों पर शक गहराने की वजह कुछ और है। एसटीएफ के एक अधिकारी का कहना है कि इनमें से दो शख्स डॉक्टर के पुलिस और कोर्ट कचहरी का काम देखते थे। मुकदमों की जांच कर रहे दरोगा या इंस्पेक्टर तथा दूसरे पुलिस अधिकारियों से मिलना-जुलना भी यही करते थे। पुलिस अफसरों और थानेदारों को खुश रखने के लिए वे डॉक्टर से मोटी रकम भी लेते थे।
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सीतापुर में महर्षि विश्वविद्यालय समेत दूसरे प्रापर्टी विवाद में भी वे गहराई तक जुड़े थे। घटना से एक रोज पहले भी डॉक्टर महर्षि विश्वविद्यालय के विवाद के कागजात देने लखनऊ में मड़ियांव थाने गए थे, तब भी इनमें एक करीबी कर्मचारी उनके साथ था। बाकी दो लोग भी डॉक्टर के तमाम राज जानते थे। हर गोपनीय मीटिंग के बारे में भी उन्हें मालूम रहता था। लेकिन इन तीनों से पूछताछ में ऐसा कुछ भी नहीं निकला, जिससे कत्ल की वजह पर रोशनी पड़ती और संभावित कातिल के बारे में पता चल सकता। ऐसे में एसटीएफ को यह संदेह है कि इन तीनों में कोई एक शख्स ऐसा है जिसे कुछ तो जरूर मालूम है, लेकिन वह बताने से कतरा रहा है या फिर जानबूझकर छिपा रहा है। घटना वाले वक्त उन तीनों के मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल डीटेल हासिल करने के साथ ही उनके सभी कॉल और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
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डॉ.बंसल हत्याकांड में संदिग्ध माने गए अपराधी नीरज वाल्मीकि को चार रोज से खोज रही एसटीएफ को अब तक उसकी कोई लोकेशन तक नहीं मिल सकी है। एसटीएफ ने इलाहाबाद समेत कई जिलों में उसकी खोजबीन की, लेकिन कुछ भी सुराग नहीं मिल सका। उसे पूर्वांचल में भी खोजा जा रहा है। यह भी शक है कि  छोटा राजन गिरोह का यह शूटर मुंबई भाग गया हो। नीरज पहले से भी वांछित है और अब डॉक्टर के कत्ल में उसकी भूमिका की जांच हो रही है।

नीरज वाल्मीकि पर शक गहराने के पीछे दो वजह है। पहली तो यह कि अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के लिए मुंबई में शूटआउट के बाद से पुलिस की निगाह में आए नीरज ने इलाहाबाद में तीन साल के दौरान दो ठेकेदारों को मुंहमांगी रंगदारी से इनकार पर मौत की नींद सुला दिया। जनवरी 2013 में ठेकेदार पिंकी सिंह की कार के भीतर हत्या की घटना में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, लेकिन पिछले साल झूंसी स्टेशन के पास कार के ही भीतर प्रताप सिंह के कत्ल के बाद से वह फरार है। उसके अपराध का तरीका जाहिर है कि ठेकेदारों तथा व्यापारियों से रंगदारी मांगना और इनकार पर मार देना।

जांच के तमाम पहलू में एक यह भी है कि कहीं डॉक्टर बंसल को रंगदारी से मना करने पर तो नहीं मारा गया। इस एंगल में नीरज फिट बैठता है। दूसरी वजह यह कि पुलिस अस्पताल में भर्ती गोलियों से घायल राजा पांडेय को संदिग्ध मान रही है, क्योंकि उसने इलाज के दौरान पैसों के विवाद में डॉक्टर को धमकी दी थी। नीरज वाल्मीकि और राजा के बीच कनेक्शन है। जेल में दोनों की मुलाकात हुई थी। नीरज शहर के कैंट इलाके का रहने वाला है, लेकिन यमुनापार के शूटरों से उसका संपर्क है जिसमें राजा पांडेय भी शमिल है। ऐसे में यह आशंका है कि राजा पांडेय ने अपमान का बदला लेने की नीयत से डॉक्टर के कत्ल में नीरज से मदद मांगी तो उसने खुद या अपने शूटरों से काम करा दिया। इस वजह से पुलिस नीरज की तलाश के साथ ही उसके गिरोह से जुडे़ कई शूटरों को टटोल रही है लेकिन वे नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से एसटीएफ में बौखलाहट है।


डॉ.बंसल हत्याकांड में एसटीएफ राजा पांडेय के करीबी कल्लू तिवारी की भी तलाश में जुटी है। वजह ये कि कल्लू भी बेहद दुस्साहसी है। तीन साल पहले बारा के थानाध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी की हत्या में भी उसे आरोपी बनाया गया था। उससे पहले उसने शहर में चेतन सांवला की हत्या की थी। इन दो घटनाओं के बाद शहर और यमुनापार में उसका नाम चलने लगा। वह अपने गुर्गों को भेजकर कारोबारियों से धन उगाही कराने लगा। जेल में रहते भी उसने कई कारोबारियों को धमकी देकर रंगदारी उगाही कराई थी। जांच में जुटे अफसरों का कहना है कि अगर डॉ.बंसल का कत्ल रंगदारी की वजह से हुआ और इसमें राजा का हाथ है तो कल्लू भी घटना में शामिल हो सकता है। कल्लू या उसके करीबी पकड़ में आएं तो कुछ सुराग मिल सकता है इसलिए यमुनापार में कई जगह दबिश दी जा रही है।
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