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सुसाइड नोट लिखकर छात्र ने लगाई फांसी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 30 Sep 2015 01:31 AM IST
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इलाहाबाद। शहर के चांदपुर सलोरी मुहल्ले में सोमवार रात किराए के कमरे में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रमोद वर्मा (23) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह एक दोस्त के काफी देर तक खटखटाने के बावजूद दरवाजा नहीं खुलने पर मकान मालिक ने कमरे में झांककर देखा तो वह फंदे से लटका दिखा। खबर पाकर पहुंची पुलिस को छात्र का लिखा सुसाइड नोट और नगदी मिली। अम्बेडकर नगर से परिवार के लोग भी आ गए। परिजनों का कहना है कि वह अपने भविष्य के लिए बेहद चिंतित था। यही आत्महत्या की प्रमुख वजह हो सकती है।
अम्बेडकर नगर में अकबरपुर के गौसपुर गांव निवासी सुखीराम वर्मा के दो बेटों में बड़ा प्रमोद वर्मा बीए के बाद सरकारी सेवा में भर्तियों की तैयारी के लिए इलाहाबाद आ गया था। तीन महीने से वह चांदपुर सलोरी में छेदीलाल के मकान के एक कमरे में किराए पर ठहरा था। तीन रोज पहले ही वह घर से आया था। पता चला है कि सोमवार रात भी उसने फोन पर मां और बहन से बात की। उसकी पांच बहनें हैं।
मंगलवार सुबह एक दोस्त मिलने आया तो उसके कमरे का दरवाजा बंद था। काफी देर तक दस्तक देने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो सशंकित होकर मकान मालिक छेदीलाल ने खिड़की में लगे पोस्टर को हटाकर भीतर झांका। कमरे में प्रमोद छत के हुक में बंधी रस्से से फांसी पर लटका दिखा। खबर फैली तो वहां भीड़ लग गई। फिर कर्नलगंज थाने की पुलिस पहुंची। धक्का देकर दरवाजा खोला गया।
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पुलिस ने प्रमोद को फंदे से उतारा। उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस को उसकी जेब में सुसाइड नोट मिला जिसमें उसने लिखा था कि वह और जीना नहीं चाहता था। उसके पास आठ हजार रुपये मौजूद हैं जिसे उसके पिता को दे दिए जाएं। अपनी मौत के लिए वह खुद जिम्मेदार है। सूचना पाकर अम्बेडकर नगर से प्रमोद के पिता सुखीराम भी परिजनों के साथ आ गए। लगातार रोने से उनकी हालत खराब हो गई थी। वह यही कह सके कि प्रमोद प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को लेकर बेहद चिंतित रहता था।
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अम्बेडकर नगर में अकबरपुर के गौसपुर गांव निवासी सुखीराम वर्मा के दो बेटों में बड़ा प्रमोद वर्मा बीए के बाद सरकारी सेवा में भर्तियों की तैयारी के लिए इलाहाबाद आ गया था। तीन महीने से वह चांदपुर सलोरी में छेदीलाल के मकान के एक कमरे में किराए पर ठहरा था। तीन रोज पहले ही वह घर से आया था। पता चला है कि सोमवार रात भी उसने फोन पर मां और बहन से बात की। उसकी पांच बहनें हैं।
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मंगलवार सुबह एक दोस्त मिलने आया तो उसके कमरे का दरवाजा बंद था। काफी देर तक दस्तक देने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो सशंकित होकर मकान मालिक छेदीलाल ने खिड़की में लगे पोस्टर को हटाकर भीतर झांका। कमरे में प्रमोद छत के हुक में बंधी रस्से से फांसी पर लटका दिखा। खबर फैली तो वहां भीड़ लग गई। फिर कर्नलगंज थाने की पुलिस पहुंची। धक्का देकर दरवाजा खोला गया।
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पुलिस ने प्रमोद को फंदे से उतारा। उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस को उसकी जेब में सुसाइड नोट मिला जिसमें उसने लिखा था कि वह और जीना नहीं चाहता था। उसके पास आठ हजार रुपये मौजूद हैं जिसे उसके पिता को दे दिए जाएं। अपनी मौत के लिए वह खुद जिम्मेदार है। सूचना पाकर अम्बेडकर नगर से प्रमोद के पिता सुखीराम भी परिजनों के साथ आ गए। लगातार रोने से उनकी हालत खराब हो गई थी। वह यही कह सके कि प्रमोद प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को लेकर बेहद चिंतित रहता था।