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मरीज के चढ़ाने लायक नहीं था खून

Tue, 26 Sep 2017 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 26 Sep 2017 01:32 AM IST
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The patient was not worth the donation
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एसआरएन अस्पताल के ब्लड बैंक के नाम पर बेचा गया नकली खून प्राथमिक जांच में मरीज के चढ़ाने लायक भी नहीं था। इसमें हीमोग्लोविन आठ प्रतिशत से कम था, जबकि 12 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज की पैथलॉजी में खून के इन दोनों पैकेटों की विस्तृत जांच कराई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं खून में अशुद्धता, एचआईवी, हैपीटाइटिस तथा अन्य खतरनाक बीमारी वाले तत्व तो नहीं थे। सहायक आयुक्त औषधि केजी गप्ता ने बताया कि यह खून पूरी तरह नकली है। तीन दिन के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट मिल जाएगी।
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वहीं एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि तीसरे आरोपी नितिन को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। वही खून के काले कारोबार तक पहुंचाएगा। इसमें कोतवाली के साथ-साथ क्राइम ब्रांच की भी मदद ली जा रही है। एसपी सिटी मॉनीटरिंग करेंगे। उधर, कमिश्नर आशीष गोयल ने अपर आयुक्त औषधि और सीएमओ को तलब कर कहा है कि एक सप्ताह में कार्रवाई कर खून के काले कारोबारियों को जेल भेजा जाए। बता दें कि शनिवार को अलोपीबाग स्थित तिलक हॉस्पिटल के मैनेजर हरेंद्र चौबे और वार्ड ब्वाय वसीम ने 12 हजार रुपये में दो यूनिट नकली खून पीड़ित महिला को चढ़ाने के लिए दिया था। महिला की तबियत खराब होने पर उसे उपचार के लिए एसआरएन अस्पताल में दाखिल कराया गया, वहीं पर नकली खून का खुलासा हुआ था।
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जिले के चार ब्लड बैंकों से रोजाना करीब 200 यूनिट खून मरीजों को चढ़ाने के लिए लिया जा रहा है। जबकि यहां के पांच सौ से अधिक अस्पताल और नर्सिंगहोम में मरीजों को औसतन प्रतिदिन 350 यूनिट खून चढ़ाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शेष 150 यूनिट खून इधर-उधर से काला धंधा करने वालों से लिया जा रहा है। शहर के काल्विन, एसआरएन और बेली अस्पताल के अलावा इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के ब्लड बैंक से रोज 200 यूनिट ही खून मरीजों के लिए लिया जाता है।
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