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हॉस्टल में शोधार्थी ने फांसी लगाकर दी जान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 06 Apr 2018 01:02 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जेके इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड फिजिक्स के शोधार्थी एसएस पॉल ने बृहस्पतिवार को एएन झा हॉस्टल में फांसी लगाकर जान दी दी। शाम को बहुत देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर किसी परिचित ने पीछे की खिड़की से झांक कर देखा तो कमरे में पॉल फांसी पर लटकता दिखा। सूचना पर बड़ी संख्या में छात्र जुट गए। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
एसएस पॉल मूलत: पश्चिम बंगाल का रहने वाला था। वर्तमान में वह इविवि के जेके इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड फिजिक्स से रिसर्च कर रहा था। यह उसका द्वितीय वर्ष था। वह प्रो. आरआर तिवारी के निर्देशन में शोध कर रहा था। मौजूदा समय में वह एएन झा हॉस्टल के नए भवन में कमरा नंबर 103 में रहता था। पुलिस ने बताया कि छात्रों से पूछताछ में पता चला है कि बृहस्पतिवार को वह आखिरी बार सुबह देखा गया था। शाम को एक परिचित उससे मिलने आया। लेकिन कई बार पुकारने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। काफी देर तक बाहर बैठकर परिचित इंतजार भी करता रहा। इसके बाद उसने पीछे स्थित खिड़की के टूटे कांच से कमरे में झांका तो भीतर शोधार्थी का शव फांसी पर लटका देख उसके होश उड़ गए। उसने शोर मचाया तो हॉस्टल में रहने वाले छात्र जुट गए। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। कमरे का दरवाजा भीतर से बंद था।
दरवाजा तोड़कर पुलिस भीतर घुसी और शव को फंदे से नीचे उतारा। पुलिस ने बताया कि चादर से फंदा बनाकर पंखे में फंसाया गया था। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। सूचना पर इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे और डीएसडब्ल्यू भी पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, जांच पड़ताल में पता चला है कि मृतक छात्र का मनोचिकित्सक से इलाज भी चल रहा था। जिसका पूरा खर्च जेके इंस्टीट्यूट के हेड प्रो. नरसिंह उठाते थे। मृतक के माता-पिता का निधन हो चुका है। परिवार में एक बहन है लेकिन उसका भाई से कोई संपर्क नहीं है। इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल यही लग रहा है कि छात्र ने डिप्रेशन के चलते यह कदम उठाया। जांच-पड़ताल की जा रही है।
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छात्रों से बातचीत में पता चला कि शोधार्थी एसएस पॉल ने एमएनएनआईटी से बीटेक और इविवि से एमटेक किया था। वह पढ़ने में काफी तेज था और गोल्ड मेडलिस्ट भी था। पुलिस की मानें तो उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। हॉस्टल के छात्रों ने बताया कि कई बार उन्होेंने हाथ बढ़ाकर उसकी पैसों से मदद की थी।
शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने को एंबुलेंस नहीं मंगाने पर भड़के छात्रों की चीफ प्रॉक्टर से नोकझोंक भी हुई। दरअसल पुलिस की ओर से शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाने के लिए ऑटो मंगाया गया। यह देख हॉस्टल में मौजूद छात्र भड़क उठे। उनका कहना था कि विवि के पास अपनी एंबुलेंस है। इसके बावजूद एंबुलेंस क्यों नहीं मंगाई गई। इसे लेकर कुछ छात्राेें की चीफ प्रॉक्टर से नोकझोंक भी हुई। हालांकि वहां मौजूद अन्य छात्रों और सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा ने बीचबचाव कर मामला शांत करा दिया। इसके बाद विवि की एंबुलेंस मंगाई गई और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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एसएस पॉल मूलत: पश्चिम बंगाल का रहने वाला था। वर्तमान में वह इविवि के जेके इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड फिजिक्स से रिसर्च कर रहा था। यह उसका द्वितीय वर्ष था। वह प्रो. आरआर तिवारी के निर्देशन में शोध कर रहा था। मौजूदा समय में वह एएन झा हॉस्टल के नए भवन में कमरा नंबर 103 में रहता था। पुलिस ने बताया कि छात्रों से पूछताछ में पता चला है कि बृहस्पतिवार को वह आखिरी बार सुबह देखा गया था। शाम को एक परिचित उससे मिलने आया। लेकिन कई बार पुकारने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। काफी देर तक बाहर बैठकर परिचित इंतजार भी करता रहा। इसके बाद उसने पीछे स्थित खिड़की के टूटे कांच से कमरे में झांका तो भीतर शोधार्थी का शव फांसी पर लटका देख उसके होश उड़ गए। उसने शोर मचाया तो हॉस्टल में रहने वाले छात्र जुट गए। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। कमरे का दरवाजा भीतर से बंद था।
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दरवाजा तोड़कर पुलिस भीतर घुसी और शव को फंदे से नीचे उतारा। पुलिस ने बताया कि चादर से फंदा बनाकर पंखे में फंसाया गया था। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। सूचना पर इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे और डीएसडब्ल्यू भी पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, जांच पड़ताल में पता चला है कि मृतक छात्र का मनोचिकित्सक से इलाज भी चल रहा था। जिसका पूरा खर्च जेके इंस्टीट्यूट के हेड प्रो. नरसिंह उठाते थे। मृतक के माता-पिता का निधन हो चुका है। परिवार में एक बहन है लेकिन उसका भाई से कोई संपर्क नहीं है। इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल यही लग रहा है कि छात्र ने डिप्रेशन के चलते यह कदम उठाया। जांच-पड़ताल की जा रही है।
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छात्रों से बातचीत में पता चला कि शोधार्थी एसएस पॉल ने एमएनएनआईटी से बीटेक और इविवि से एमटेक किया था। वह पढ़ने में काफी तेज था और गोल्ड मेडलिस्ट भी था। पुलिस की मानें तो उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। हॉस्टल के छात्रों ने बताया कि कई बार उन्होेंने हाथ बढ़ाकर उसकी पैसों से मदद की थी।
शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने को एंबुलेंस नहीं मंगाने पर भड़के छात्रों की चीफ प्रॉक्टर से नोकझोंक भी हुई। दरअसल पुलिस की ओर से शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाने के लिए ऑटो मंगाया गया। यह देख हॉस्टल में मौजूद छात्र भड़क उठे। उनका कहना था कि विवि के पास अपनी एंबुलेंस है। इसके बावजूद एंबुलेंस क्यों नहीं मंगाई गई। इसे लेकर कुछ छात्राेें की चीफ प्रॉक्टर से नोकझोंक भी हुई। हालांकि वहां मौजूद अन्य छात्रों और सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा ने बीचबचाव कर मामला शांत करा दिया। इसके बाद विवि की एंबुलेंस मंगाई गई और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।