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तो जायदाद केे फेर में हुए दो खून
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 26 Aug 2015 01:44 AM IST
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फाफामऊ। मलाक हरहर में घर के भीतर नीलेश यादव और उसकी पत्नी मोनू की हत्या के पीछे गहरा राज है। पुलिस को फौरी छानबीन के बाद शक है कि उन दोनों को लूट के लिए नहीं बल्कि जायदाद पर कब्जे के लिए मारा गया है। मां-बाप का निधन हो चुका था और वह इकलौता पुत्र था। उसने अपनी जमीन का किसी से सौदा किया था। भैंस भी बेच दी थी। पुलिस इसी एंगल पर जांच कर रही है। कुछ लोगों से थाने में पूछताछ हो रही है।
मलाक हरहर के पचपेड़वा मजरा निवासी नीलेश यादव के पिता अलगू यादव और मां का देहांत हो चुका था। वह इकलौता बेटा था। तीन बहनें हैं, जिनका ब्याह हो चुका है। यूं नीलेश ही पूरी संपत्ति का इकलौता वारिस था। उसके नहीं रहने पर पत्नी को संपत्ति मिलती। बेटे तो अभी बहुत छोटे हैं। परिजनों और रिश्तेदारों से पता चला कि कुछ दिन पहले नीलेश ने अपनी चार बिस्सा जमीन का किसी से साढ़े दस लाख रुपये में सौदा कर लिया था। उसे चेक से ढाई लाख रुपये मिले थे। अभी आठ लाख रुपये और मिलने थे।
तीन रोज पहले उसने अपनी भैंस भी 25 हजार रुपये में बेच दी थी। कत्ल की कोई और ठोस वजह पुलिस को अब तक नहीं मिली है। पत्नी मोनू के कपडे़ अस्त-व्यस्त होने को भी पुलिस ने जांच के दायरे में रखा है। पुलिस ने जमीन का सौदा करने वाले शख्स को संदिग्ध माना है। एसपी क्राइम रमाकांत का कहना है कि फिलहाल तो कोई सुराग नहीं मिला है। नीलेश के एक चाचा कृष्ण प्रताप रेलवे से रिटायर होने के बाद इंदौर में रहते हैं। बुधवार को उनके आने के बाद दंपति के शवों का अंतिम संस्कार होगा।
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मोनू के बारे में पता चला कि वह नीलेश की दूसरी पत्नी थी। उसकी पहली शादी धूमनगंज के कंहईपुर में रहने वाले मक्खनलाल यादव की बेटी से हुआ था। उसकी जलकर मृत्यु के बाद नीलेश ने साली मोनू से ब्याह कर लिया था। तीनों बेटों को मोनू ने ही जन्म दिया था। इस घटना की खबर पाकर कन्हईपुर से मोनू के मायके वाले भी आ गए। उन्होंने तीनों बेटों को संभाला। डेढ़ साल का पुत्र सौरभ तो रोते-रोते बेहाल हो गया था।
नीलेश और उसकी पत्नी मोनू की हत्या से तीन मासूम बेटों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। सात साल के वंश, पांच साल के मयंक और डेढ़ साल के दुधमुंहे सौरभ का गुजारा अब ननिहाल में होगा मगर उनके भविष्य की चिंता सबको सता रही है। इसी वजह से लोगों ने पति-पत्नी के शव उठाने का विरोध करते हुए बेटों की आर्थिक सहायता की मांग रख दी। आखिर में एसडीएम सोरांव डीएस गुप्ता ने लोगों को भरोसा दिया कि बेटों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख, पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत तीन लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 15 लाख रुपये दिलाने की संस्तुति की जाएगी। एसडीएम ने इस बारे में लिखकर दिया।
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मलाक हरहर के पचपेड़वा मजरा निवासी नीलेश यादव के पिता अलगू यादव और मां का देहांत हो चुका था। वह इकलौता बेटा था। तीन बहनें हैं, जिनका ब्याह हो चुका है। यूं नीलेश ही पूरी संपत्ति का इकलौता वारिस था। उसके नहीं रहने पर पत्नी को संपत्ति मिलती। बेटे तो अभी बहुत छोटे हैं। परिजनों और रिश्तेदारों से पता चला कि कुछ दिन पहले नीलेश ने अपनी चार बिस्सा जमीन का किसी से साढ़े दस लाख रुपये में सौदा कर लिया था। उसे चेक से ढाई लाख रुपये मिले थे। अभी आठ लाख रुपये और मिलने थे।
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तीन रोज पहले उसने अपनी भैंस भी 25 हजार रुपये में बेच दी थी। कत्ल की कोई और ठोस वजह पुलिस को अब तक नहीं मिली है। पत्नी मोनू के कपडे़ अस्त-व्यस्त होने को भी पुलिस ने जांच के दायरे में रखा है। पुलिस ने जमीन का सौदा करने वाले शख्स को संदिग्ध माना है। एसपी क्राइम रमाकांत का कहना है कि फिलहाल तो कोई सुराग नहीं मिला है। नीलेश के एक चाचा कृष्ण प्रताप रेलवे से रिटायर होने के बाद इंदौर में रहते हैं। बुधवार को उनके आने के बाद दंपति के शवों का अंतिम संस्कार होगा।
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मोनू के बारे में पता चला कि वह नीलेश की दूसरी पत्नी थी। उसकी पहली शादी धूमनगंज के कंहईपुर में रहने वाले मक्खनलाल यादव की बेटी से हुआ था। उसकी जलकर मृत्यु के बाद नीलेश ने साली मोनू से ब्याह कर लिया था। तीनों बेटों को मोनू ने ही जन्म दिया था। इस घटना की खबर पाकर कन्हईपुर से मोनू के मायके वाले भी आ गए। उन्होंने तीनों बेटों को संभाला। डेढ़ साल का पुत्र सौरभ तो रोते-रोते बेहाल हो गया था।
नीलेश और उसकी पत्नी मोनू की हत्या से तीन मासूम बेटों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। सात साल के वंश, पांच साल के मयंक और डेढ़ साल के दुधमुंहे सौरभ का गुजारा अब ननिहाल में होगा मगर उनके भविष्य की चिंता सबको सता रही है। इसी वजह से लोगों ने पति-पत्नी के शव उठाने का विरोध करते हुए बेटों की आर्थिक सहायता की मांग रख दी। आखिर में एसडीएम सोरांव डीएस गुप्ता ने लोगों को भरोसा दिया कि बेटों को कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख, पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत तीन लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 15 लाख रुपये दिलाने की संस्तुति की जाएगी। एसडीएम ने इस बारे में लिखकर दिया।