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गांव में घुसा तेंदुआ, हमले में सात लोग जख्मी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 01 Jun 2017 02:04 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सरायइनायत थाना क्षेत्र के दलापुर गांव में बुधवार की सुबह आदमखोर तेंदुए के आने से हड़कंप मच गया। लोगों को देख तेंदुआ हमलावर हो गया। हमले में दो युवतियों समेत सात लोग जख्मी हो गए। खेत में हाहाकार मचाने के बाद तेंदुआ गांव की पटेल बस्ती के एक कच्चे मकान में घुस गया। घर के लोगों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। मकान के मुख्य दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया गया। ग्रामीणों की सूचना पर इलाकाई पुलिस के साथ-साथ वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब आठ घंटे की मशक्कत के बाद शाम को तेंदुए को पकड़ा जा सका।
दलापुर ग्रामसभा के ग्रामीण सुबह अपने रोजमर्रा के कार्यों में जुटे हुए थे। तकरीबन नौ बजे गांव के पीएल दूबे के मकान की बाउंड्री के बगल स्थित गन्ने के खेत से किसी जंगली जानवर के होने के सुगबुगाहट हुई। पड़ोस के कुलदीप पटेल पुत्र शंकर पटेल और शीला पुत्री रामचंद्र उस ओर गए। जब तक दोनों कुछ समझ पाते तेंदुए ने गुर्राहट के साथ उनपर हमला कर दिया। हमले में दोनों जख्मी हो गए। चीख पुकार से वहां हड़कंप मच गया। आदमखोर तेंदुए ने ग्राम प्रधान प्रकाशचंद्र मिश्र के चचेरे भाई रजनीश, कल्लू, राहुल व वरूण पटेल पर भी हमला कर जख्मी कर दिया।
जब तक ग्रामीण उसे दबोचने के लिए इकट्ठे होते, वह वहां से निकलकर सामने की पटेल बस्ती के फूलचंद्र पटेल के कच्चे मकान में दाखिल हो गया। इससे घर के भीतर मौजूद पुरूष, महिलाओं व बच्चों में खलबली मच गई। सभी चीखते चिल्लाते जान बचाकर घर के भीतर से बाहर की ओर भागे। इस दौरान गिरने से प्रमिला नामक युवती जख्मी हो गए। आनन-फानन में ग्रामीणों ने कच्चे मकान का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। इसकी जानकारी पुलिस और वन विभाग को दी गई। पुलिस तो कुछ देर बाद मौके पर पहुंच गई लेकिन वन विभाग के अफसर व कर्मचारी तकरीबन डेढ़ घंटे बाद पहुंचे। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश था। मौके पर पहुंचे उप वन अधिकारी केएस यादव तथा वन विशेषज्ञ पीके टारजन की अगुवाई में तेंदुए को पकड़ने के लिए योजना तैयार की गई।
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कच्चे मकान की रस्सी से चारों तरफ से घेराबंदी की गई। साथ ही जाल भी बिछाया गया। शहर और मिर्जापुर से दो पिंजड़े मंगाए गए। शाम पांच बजे तेंदुए को कच्चे मकान के भीतर से पकड़ लिया गया। तेंदुए को काबू करने के लिए उसे ट्रैंक्यूलाइजर दिया गया था। इस दौरान मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी रही। दोपहर में फूलपुर विधायक प्रवीण सिंह पटेल भी मौके पर पहुंचे।
तेंदुए के गांव में होने से ग्रामीण बुरी तरह डरे-सहमे थे। इसी बीच वन विभाग की टीम गांव की बस्ती में पहुंची। ग्रामीणों ने वन दरोगा पीके यादव को बताया कि पटेल बस्ती के कच्चे मकान में घुसा आदमखोर तेंदुआ है। पर वन दरोगा इससे इंकार करते रहे। उनका मानना था कि कोई दूसरा जंगली जानवर होगा, जिसे ग्रामीणों ने तेंदुआ समझ लिया है। इसी को लेकर ग्रामीणों और वन दरोगा के बीच झड़प हो गई। नाराज ग्रामीणों ने वन दरोगा को दबोचकर पीट दिया। किसी तरह अन्य ग्रामीणों के हस्तक्षेप पर उन्हें बचाया जा सका। घटना को लेकर इलाके में सुबह से लेकर देर शाम तक हड़कंप मचा रहा। गांव की पटेल बस्ती के आसपास दिनभर मेले जैसा जमावड़ा रहा। सैकड़ों लोग दिल थाम कर बैठे रहे कि कब तेंदुआ पकड़ा जाएगा। जो भी गांव के रास्ते से होकर गुरजता, तेंदुए के दाखिल होने की बात सुनकर वहीं रुक जाता। झूंसी से लेकर हनुमानगंज के दो दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीण तेंदुए के देखने के लिए दलापुर गांव पहुंचने लगे। शाम पांच बजे तक भारी भीड़ जमा हो गई। मौके पर दो थानों की पुलिस फोर्स भी भेजी गई थी।
तकरीबन चार दशक पहले हनुमानगंज के दलापुर गांव में तेंदुआ दाखिल हुआ था। तब गांव की आबादी बेहद कम थी। साथ ही गांव के आसपास जंगल जैसे हालात थे। इसी दौरान एक तेंदुआ गांव की बस्ती में घुस गया था। तब ग्रामीणों ने उसे लाठी-डंडे और भाले से मार डाला था। बुधवार को जब फिर से एक तेंदुआ गांव की बस्ती में दाखिल हुआ तो चार दशक पहले की घटना की चर्चा होने लगी।
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दलापुर ग्रामसभा के ग्रामीण सुबह अपने रोजमर्रा के कार्यों में जुटे हुए थे। तकरीबन नौ बजे गांव के पीएल दूबे के मकान की बाउंड्री के बगल स्थित गन्ने के खेत से किसी जंगली जानवर के होने के सुगबुगाहट हुई। पड़ोस के कुलदीप पटेल पुत्र शंकर पटेल और शीला पुत्री रामचंद्र उस ओर गए। जब तक दोनों कुछ समझ पाते तेंदुए ने गुर्राहट के साथ उनपर हमला कर दिया। हमले में दोनों जख्मी हो गए। चीख पुकार से वहां हड़कंप मच गया। आदमखोर तेंदुए ने ग्राम प्रधान प्रकाशचंद्र मिश्र के चचेरे भाई रजनीश, कल्लू, राहुल व वरूण पटेल पर भी हमला कर जख्मी कर दिया।
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जब तक ग्रामीण उसे दबोचने के लिए इकट्ठे होते, वह वहां से निकलकर सामने की पटेल बस्ती के फूलचंद्र पटेल के कच्चे मकान में दाखिल हो गया। इससे घर के भीतर मौजूद पुरूष, महिलाओं व बच्चों में खलबली मच गई। सभी चीखते चिल्लाते जान बचाकर घर के भीतर से बाहर की ओर भागे। इस दौरान गिरने से प्रमिला नामक युवती जख्मी हो गए। आनन-फानन में ग्रामीणों ने कच्चे मकान का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। इसकी जानकारी पुलिस और वन विभाग को दी गई। पुलिस तो कुछ देर बाद मौके पर पहुंच गई लेकिन वन विभाग के अफसर व कर्मचारी तकरीबन डेढ़ घंटे बाद पहुंचे। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश था। मौके पर पहुंचे उप वन अधिकारी केएस यादव तथा वन विशेषज्ञ पीके टारजन की अगुवाई में तेंदुए को पकड़ने के लिए योजना तैयार की गई।
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कच्चे मकान की रस्सी से चारों तरफ से घेराबंदी की गई। साथ ही जाल भी बिछाया गया। शहर और मिर्जापुर से दो पिंजड़े मंगाए गए। शाम पांच बजे तेंदुए को कच्चे मकान के भीतर से पकड़ लिया गया। तेंदुए को काबू करने के लिए उसे ट्रैंक्यूलाइजर दिया गया था। इस दौरान मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी रही। दोपहर में फूलपुर विधायक प्रवीण सिंह पटेल भी मौके पर पहुंचे।
तेंदुए के गांव में होने से ग्रामीण बुरी तरह डरे-सहमे थे। इसी बीच वन विभाग की टीम गांव की बस्ती में पहुंची। ग्रामीणों ने वन दरोगा पीके यादव को बताया कि पटेल बस्ती के कच्चे मकान में घुसा आदमखोर तेंदुआ है। पर वन दरोगा इससे इंकार करते रहे। उनका मानना था कि कोई दूसरा जंगली जानवर होगा, जिसे ग्रामीणों ने तेंदुआ समझ लिया है। इसी को लेकर ग्रामीणों और वन दरोगा के बीच झड़प हो गई। नाराज ग्रामीणों ने वन दरोगा को दबोचकर पीट दिया। किसी तरह अन्य ग्रामीणों के हस्तक्षेप पर उन्हें बचाया जा सका। घटना को लेकर इलाके में सुबह से लेकर देर शाम तक हड़कंप मचा रहा। गांव की पटेल बस्ती के आसपास दिनभर मेले जैसा जमावड़ा रहा। सैकड़ों लोग दिल थाम कर बैठे रहे कि कब तेंदुआ पकड़ा जाएगा। जो भी गांव के रास्ते से होकर गुरजता, तेंदुए के दाखिल होने की बात सुनकर वहीं रुक जाता। झूंसी से लेकर हनुमानगंज के दो दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीण तेंदुए के देखने के लिए दलापुर गांव पहुंचने लगे। शाम पांच बजे तक भारी भीड़ जमा हो गई। मौके पर दो थानों की पुलिस फोर्स भी भेजी गई थी।
तकरीबन चार दशक पहले हनुमानगंज के दलापुर गांव में तेंदुआ दाखिल हुआ था। तब गांव की आबादी बेहद कम थी। साथ ही गांव के आसपास जंगल जैसे हालात थे। इसी दौरान एक तेंदुआ गांव की बस्ती में घुस गया था। तब ग्रामीणों ने उसे लाठी-डंडे और भाले से मार डाला था। बुधवार को जब फिर से एक तेंदुआ गांव की बस्ती में दाखिल हुआ तो चार दशक पहले की घटना की चर्चा होने लगी।