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मंत्री नंदी पर आरडीएक्स से हमला करने वाले राजेश पायलट की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:57 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर 2010 में रिमोट बम से हमला करने वाले राजेश पायलट की मौत हो गई। पायलट 2010 से ही नैनी जेल में बंद था। उसे इसी साल फरवरी में बुलंदशहर जेल में ट्रांसफर किया गया था। दो सितंबर को उसे वहीं की बैकर में ब्रेन हैमरेज हुआ और गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग हास्पिटल में भेज दिया गया। बुधवार की सुबह पायलट की मौत हो गई। मंत्री नंदी पर हमले के अलावा पायलट पर आधा दर्जन से अधिक हत्याओं, लूट और रंगदारी के मामले दर्ज थे।
इंद्राकक्ष थाना टिमरनी जिला हरदा, मध्य प्रदेश निवासी राजेश पायलट के खिलाफ यूं तो हत्याओं, बैंक और पेट्रोप पंप डकैती, रंगदारी और लूट के मामले दर्ज थे, लेकिन मंत्री नंदी पर हमला कर उसने जरायम की दुनिया में तहलका मचा दिया था। प्रदेश में पहली बार आरडीएक्स का प्रयोग कर घटना को अंजाम देने वाले राजेश पायलट ने 12 जुलाई 2010 को तत्कालीन बसपा सरकार में मंत्री रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर बहादुरगंज स्थित उनके घर के सामने रिमोट बम से हमला किया था। बम को एक स्कूटी में फिट किया गया था। इस हमले में नंदी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि गार्ड मालवीय और पत्रकार विजय प्रताप सिंह की मौत हो गई थी।
इस मामले में पायलट को नामजद किया गया और प्रदेश सरकार ने उस पर ढाई लाख का इनाम घोषित किया। छह अक्तूबर 2010 को एसटीएफ टीम ने मुंबई एयरपोर्ट से आनंद शांडिल्य उर्फ राजेश पायलट को गिरफ्तार किया था। सात अक्तूबर 2010 को उसे सेंट्रल जेल नैनी भेजा गया था। तब से वह नैनी जेल में बंद था। उसके बयान के बाद ही इस हमले में विधायक विजय मिश्रा और पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा का नाम सामने आया था। बाद में विजय मिश्रा और दिलीप मिश्रा को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। कुछ दिनों बाद विजय मिश्रा और राजेश पायलट के बीच किसी को बात लेकर ठन गई थी। उसने विजय मिश्रा पर साजिशन हमले का आरोप लगाया था। इसी के बाद 16 फरवरी 2018 को उसे बुलंद शहर जेल भेज दिया गया। वहीं दो सितंबर को उसे ब्रेन हैमरेज हुआ और बुधवार को दिल्ली के सफदरजंग हास्पिटल में उसकी मौत हो गई।
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राजेश पायलट पर नैनी जेल में तीन बार जानलेवा हमला हुआ था। पहली बार वर्ष 2013 में पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा से उसकी जेल के अंदर झड़प हुई थी। दिलीप पर हमले का आरोप था। उसके बाद वर्ष 2015 में उस पर हमला हुआ था। वर्ष 2016 में उसने कोर्ट में खुद को सुरक्षा मुहैया कराए जाने की अर्जी दी थी। उसके बाद 13 नवंबर 2017 को उस पर जानलेवा हमला हुआ था। इसमें मेरठ के अपराधी ऊधम सिंह का नाम आया था। बताया गया था कि ऊधम सिंह ने नाई की कैंची लेकर राजेश पर प्रहार कर दिया था, जिसमें राजेश पायलट और दूसरा कैदी फहीम घायल हो गए थे। हालांकि राजेश पायलट ने इस हमले में एक पूर्व सांसद व पूर्व विधायक पर साजिशन हमला कराने का आरोप लगाया था। डीआईजी जेल वीआर वर्मा ने बताया कि उसी के बाद से उसे दूसरी जेल में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। 16 फरवरी 2018 को उसे नैनीं सेंट्रल जेल से बुलंदशहर जेल भेज दिया गया था। वहां से उसे पेशी पर लाया जाता था।
राजेश पायलट जिले की जरायम की दुनिया का ऐसा तिलस्म था, जिसे आठ साल तक कोई नहीं तोड़ पाया था। कोई भी पुलिस वाला उसके नाम से ज्यादा उसके बारे में कुछ नहीं जानता था। वह कहां का है, कैसा दिखता है, उसके पीछे कौन है। इस बात का पता लगाने में एसटीएफ को भी सालों लग गए। मंत्री नंदी पर हमले के बाद पहली बार पुलिस उसके घर पहुंची और फोटो पाई। ढाई लाख का इनामी बनने के बाद मुंबई से गिरफ्तार हुआ था। उसके बाद से ही जेल में बंद था।
राजेश पायलट ने इलाहाबाद के कोरांव में 2003 में महेंद्र मिश्रा गिरोह के लिए पहली हत्या की। उस हत्या में किसी और को नामजद कराया गया था। इसके बाद तो राजेश ने एक के बाद एक कई सनसनीखेज हत्याओं को अंजाम दिया। किसी हत्या में उसका नाम नहीं आया लेकिन उन सनसनीखेज हत्याओं के तरीके, हत्या में प्रयुक्त असलहों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के हुलिए के आधार पर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर धनंजय मिश्रा और इंस्पेक्टर अजय सिंह ने इन सब वारदातों के पीछे छिपे राजेश पायलट को खोज निकाला। इसी समय महेंद्र मिश्रा गिरोह का भी खुलासा हुआ। उसका नाम पता होने के बाद भी राजेश पायलट पुलिस के लिए एक पहेली बना रहा। उसकी न तो फोटो किसी के पास थी, न ही यह पता था कि वह रहने वाला कहां का है।
पायलट के बारे में काफी समय तक माना जाता रहा कि वह कोरांव का रहने वाला है। पायलट को बेनकाब करने वाले इंस्पेक्टर धनंजय मिश्रा ने बताया कि 2008 में कोरांव में व्यंकटेश की हत्या में उसे पहली बार नामजद कर इनामी घोषित किया गया लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। नंदी पर आरडीएक्स से हमला करने के बाद पुलिस उसके घर मध्य प्रदेश के हरदा जिले के उमरी गांव पहुंची। इसके बाद उसकी फोटो मिली। इसके बाद उसका मोबाइल नंबर भी एसटीएफ को मिला। उसी मोबाइल नंबर ने एसटीएफ को राजेश पायलट तक पहुंचा दिया। नंदी पर हमला करने के मामले में उसे मुंबई से पहली बार गिरफ्तार किया गया। जब वह गिरफ्तार हुआ तो शासन ने उस पर सबसे बड़ा ढाई लाख का इनाम घोषित कर रखा था।
राजेश पायलट ने मध्य प्रदेश के इंदौर में 2003 में देना बैंक लूट लिया था। होशंगाबाद में भी उसी साल उसने पेट्रोल पंप भी लूटा था। वहां राजेश शांडिल्य के तौर पर नामजद हुआ और मध्य प्रदेश शासन ने उस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया। वह भागकर गुजरात पहुंच गया। वहां सूरत में हत्या की। गुजरात में दीपक पांडेय के रूप में उसकी नामजदगी हुई और इनाम घोषित किया गया 10 हजार। इसी तरह वह कभी नए शहर में कभी राजेश पांडेय बन जाता तो कभी पंडित जी। कभी महाराज के रूप में अपना परिचय देता तो कभी राजेश पायलट के रूप में। 2003 के आखिरी में वह इलाहाबाद आया तो महेंद्र मिश्रा के संपर्क में आ गया। उसने एक प्रधान, लेखपाल, एलआईसी एजेंट समेत कई की हत्या की। 2008 में जिस व्यंकटेश तिवारी की हत्या उसने की थी। उनके दोनों भाइयों को भी वह पहले मार चुका था। सोनभद्र में एक वकील को भी पायलट ने मार डाला था। महेंद्र इसलिए भी लंबे समय तक पकड़ा नहीं गया क्योंकि हत्याओं को अकेले ही अंजाम देता था। अकेले बाइक से जाता और हत्या कर दूसरे शहर भाग जाता।
बताते हैं राजेश शांडिल्य उर्फ पायलट एमएससी टापर था। इसके बाद भी पढ़ाई के बाद वह अपराध की दुनिया में उतर गया। उसके घर वाले काफी सीधे थे। उन्हें राजेश का अपराधी बनना कतई पसंद नहीं था। मां-बाप के अलावा घर में तीन बहनें हैं। घर वालों का रुख देखकर वह 1999 में ही घर छोड़कर चला गया। वह न तो घर जाता था, न ही घर वालों से कोई मतलब रखता था।
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इंद्राकक्ष थाना टिमरनी जिला हरदा, मध्य प्रदेश निवासी राजेश पायलट के खिलाफ यूं तो हत्याओं, बैंक और पेट्रोप पंप डकैती, रंगदारी और लूट के मामले दर्ज थे, लेकिन मंत्री नंदी पर हमला कर उसने जरायम की दुनिया में तहलका मचा दिया था। प्रदेश में पहली बार आरडीएक्स का प्रयोग कर घटना को अंजाम देने वाले राजेश पायलट ने 12 जुलाई 2010 को तत्कालीन बसपा सरकार में मंत्री रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर बहादुरगंज स्थित उनके घर के सामने रिमोट बम से हमला किया था। बम को एक स्कूटी में फिट किया गया था। इस हमले में नंदी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि गार्ड मालवीय और पत्रकार विजय प्रताप सिंह की मौत हो गई थी।
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इस मामले में पायलट को नामजद किया गया और प्रदेश सरकार ने उस पर ढाई लाख का इनाम घोषित किया। छह अक्तूबर 2010 को एसटीएफ टीम ने मुंबई एयरपोर्ट से आनंद शांडिल्य उर्फ राजेश पायलट को गिरफ्तार किया था। सात अक्तूबर 2010 को उसे सेंट्रल जेल नैनी भेजा गया था। तब से वह नैनी जेल में बंद था। उसके बयान के बाद ही इस हमले में विधायक विजय मिश्रा और पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा का नाम सामने आया था। बाद में विजय मिश्रा और दिलीप मिश्रा को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। कुछ दिनों बाद विजय मिश्रा और राजेश पायलट के बीच किसी को बात लेकर ठन गई थी। उसने विजय मिश्रा पर साजिशन हमले का आरोप लगाया था। इसी के बाद 16 फरवरी 2018 को उसे बुलंद शहर जेल भेज दिया गया। वहीं दो सितंबर को उसे ब्रेन हैमरेज हुआ और बुधवार को दिल्ली के सफदरजंग हास्पिटल में उसकी मौत हो गई।
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राजेश पायलट पर नैनी जेल में तीन बार जानलेवा हमला हुआ था। पहली बार वर्ष 2013 में पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा से उसकी जेल के अंदर झड़प हुई थी। दिलीप पर हमले का आरोप था। उसके बाद वर्ष 2015 में उस पर हमला हुआ था। वर्ष 2016 में उसने कोर्ट में खुद को सुरक्षा मुहैया कराए जाने की अर्जी दी थी। उसके बाद 13 नवंबर 2017 को उस पर जानलेवा हमला हुआ था। इसमें मेरठ के अपराधी ऊधम सिंह का नाम आया था। बताया गया था कि ऊधम सिंह ने नाई की कैंची लेकर राजेश पर प्रहार कर दिया था, जिसमें राजेश पायलट और दूसरा कैदी फहीम घायल हो गए थे। हालांकि राजेश पायलट ने इस हमले में एक पूर्व सांसद व पूर्व विधायक पर साजिशन हमला कराने का आरोप लगाया था। डीआईजी जेल वीआर वर्मा ने बताया कि उसी के बाद से उसे दूसरी जेल में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। 16 फरवरी 2018 को उसे नैनीं सेंट्रल जेल से बुलंदशहर जेल भेज दिया गया था। वहां से उसे पेशी पर लाया जाता था।
राजेश पायलट जिले की जरायम की दुनिया का ऐसा तिलस्म था, जिसे आठ साल तक कोई नहीं तोड़ पाया था। कोई भी पुलिस वाला उसके नाम से ज्यादा उसके बारे में कुछ नहीं जानता था। वह कहां का है, कैसा दिखता है, उसके पीछे कौन है। इस बात का पता लगाने में एसटीएफ को भी सालों लग गए। मंत्री नंदी पर हमले के बाद पहली बार पुलिस उसके घर पहुंची और फोटो पाई। ढाई लाख का इनामी बनने के बाद मुंबई से गिरफ्तार हुआ था। उसके बाद से ही जेल में बंद था।
राजेश पायलट ने इलाहाबाद के कोरांव में 2003 में महेंद्र मिश्रा गिरोह के लिए पहली हत्या की। उस हत्या में किसी और को नामजद कराया गया था। इसके बाद तो राजेश ने एक के बाद एक कई सनसनीखेज हत्याओं को अंजाम दिया। किसी हत्या में उसका नाम नहीं आया लेकिन उन सनसनीखेज हत्याओं के तरीके, हत्या में प्रयुक्त असलहों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के हुलिए के आधार पर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर धनंजय मिश्रा और इंस्पेक्टर अजय सिंह ने इन सब वारदातों के पीछे छिपे राजेश पायलट को खोज निकाला। इसी समय महेंद्र मिश्रा गिरोह का भी खुलासा हुआ। उसका नाम पता होने के बाद भी राजेश पायलट पुलिस के लिए एक पहेली बना रहा। उसकी न तो फोटो किसी के पास थी, न ही यह पता था कि वह रहने वाला कहां का है।
पायलट के बारे में काफी समय तक माना जाता रहा कि वह कोरांव का रहने वाला है। पायलट को बेनकाब करने वाले इंस्पेक्टर धनंजय मिश्रा ने बताया कि 2008 में कोरांव में व्यंकटेश की हत्या में उसे पहली बार नामजद कर इनामी घोषित किया गया लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। नंदी पर आरडीएक्स से हमला करने के बाद पुलिस उसके घर मध्य प्रदेश के हरदा जिले के उमरी गांव पहुंची। इसके बाद उसकी फोटो मिली। इसके बाद उसका मोबाइल नंबर भी एसटीएफ को मिला। उसी मोबाइल नंबर ने एसटीएफ को राजेश पायलट तक पहुंचा दिया। नंदी पर हमला करने के मामले में उसे मुंबई से पहली बार गिरफ्तार किया गया। जब वह गिरफ्तार हुआ तो शासन ने उस पर सबसे बड़ा ढाई लाख का इनाम घोषित कर रखा था।
राजेश पायलट ने मध्य प्रदेश के इंदौर में 2003 में देना बैंक लूट लिया था। होशंगाबाद में भी उसी साल उसने पेट्रोल पंप भी लूटा था। वहां राजेश शांडिल्य के तौर पर नामजद हुआ और मध्य प्रदेश शासन ने उस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया। वह भागकर गुजरात पहुंच गया। वहां सूरत में हत्या की। गुजरात में दीपक पांडेय के रूप में उसकी नामजदगी हुई और इनाम घोषित किया गया 10 हजार। इसी तरह वह कभी नए शहर में कभी राजेश पांडेय बन जाता तो कभी पंडित जी। कभी महाराज के रूप में अपना परिचय देता तो कभी राजेश पायलट के रूप में। 2003 के आखिरी में वह इलाहाबाद आया तो महेंद्र मिश्रा के संपर्क में आ गया। उसने एक प्रधान, लेखपाल, एलआईसी एजेंट समेत कई की हत्या की। 2008 में जिस व्यंकटेश तिवारी की हत्या उसने की थी। उनके दोनों भाइयों को भी वह पहले मार चुका था। सोनभद्र में एक वकील को भी पायलट ने मार डाला था। महेंद्र इसलिए भी लंबे समय तक पकड़ा नहीं गया क्योंकि हत्याओं को अकेले ही अंजाम देता था। अकेले बाइक से जाता और हत्या कर दूसरे शहर भाग जाता।
बताते हैं राजेश शांडिल्य उर्फ पायलट एमएससी टापर था। इसके बाद भी पढ़ाई के बाद वह अपराध की दुनिया में उतर गया। उसके घर वाले काफी सीधे थे। उन्हें राजेश का अपराधी बनना कतई पसंद नहीं था। मां-बाप के अलावा घर में तीन बहनें हैं। घर वालों का रुख देखकर वह 1999 में ही घर छोड़कर चला गया। वह न तो घर जाता था, न ही घर वालों से कोई मतलब रखता था।