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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   NEET student suicide case: 'My mind scares me, it is destroying my life' — eight-page suicide note left behind

नीट छात्रा खुदकुशी मामला : मेरा दिमाग मुझे डराता है, जिंदगी तबाह कर रहा, आठ पन्नों का लिखा सुसाइड नोट

Wed, 04 Nov 2026 12:52 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, झूंसी (प्रयागराज)
संवाद न्यूज एजेंसी, झूंसी (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 04 Nov 2026 12:52 PM IST
सार

मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल करने के बावजूद 18 वर्षीय नीट छात्रा ऋतु मानसिक परेशानियों से जूझ रही थी। दो साल से अनचाहे विचारों और बार-बार चीजें दोहराने की मजबूरी ने उसकी पढ़ाई और दिनचर्या को प्रभावित कर दिया था। आठ पन्नों के सुसाइड नोट में उसने अपनी मानसिक स्थिति और संघर्ष का जिक्र किया है।

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NEET student suicide case: 'My mind scares me, it is destroying my life' — eight-page suicide note left behind
ऋतु शर्मा। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

दिनभर मेरे दिमाग में परेशान करने वाले ख्याल आते हैं। मैं ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं। एक ही चीज को बार-बार दोहराती हूं। ऐसा नहीं करने पर मेरा दिमाग डराता है कि कुछ बुरा हो जाएगा। अब मैं थक चुकी हूं। ये अनचाहे विचार मेरी जिंदगी पूरी तरह तबाह कर रहे हैं।ये बातें त्रिवेणीपुरम में सोमवार को आत्महत्या करने वाली 18वर्षीय नीट छात्रा रितु शर्मा के आठ पेज के सुसाइड नोट में लिखी मिली हैं। मेडिकल में चयन होने के बावजूद वह लंबे समय से मानसिक परेशानी से जूझ रही थी।

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सुसाइड नोट में ऋतु ने लिखा है कि वह पिछले दो वर्षों से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) जैसी समस्या से परेशान थी। इसकी शुरुआत 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के दौरान हुई थी। शुरुआत में उसे समझ नहीं आता था कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। वह इसे सामान्य ओवरथिंकिंग और एंग्जायटी समझती थी। कुछ सप्ताह पहले इंटरनेट पर इसके बारे में पढ़ने के बाद उसे अपने अनुभव ओसीडी के लक्षणों से मिलते-जुलते लगे।

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दिमाग में अनचाहे विचार आ रहे

उसने लिखा कि पढ़ाई के दौरान उसके दिमाग में बार-बार अनचाहे विचार और शंकाएं आती थीं। किसी विषय को अच्छी तरह पढ़ लेने के बाद भी मन उसे दोबारा पढ़ने और समझने के लिए मजबूर करता था। ऐसा नहीं करने पर परीक्षा में गलती होने या असफल होने का डर सताता था। वह बार-बार चीजें दोहराती और चेक करती थी। इससे कुछ समय के लिए राहत मिलती, लेकिन थोड़ी देर बाद वही विचार और शंकाएं फिर लौट आती थीं।

ऋतु के आठ पेज के सुसाइड नोट में उसने खुद को असहाय, कमजोर और आत्मविश्वास की कमी से घिरा हुआ महसूस करने की बात भी लिखी। उसे लगता था कि वह दूसरों से पीछे रह गई है और जीवन के लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगी। उसने सवाल किया कि आखिर उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है। वह सामान्य जिंदगी जीना, शांत दिमाग से पढ़ाई करना और अपने कॅरिअर के लक्ष्य हासिल करना चाहती थी।

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तीसरी काउंसिलिंग में मिला था एमबीबीएस कॉलेज में मिला था दाखिला

ऋतु के परिजनों को सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे नीट की तीसरे राउंड की काउंसिलिंग का परिणाम मिला था। इसमें उसे सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में ईडब्ल्यूएस-दिव्यांग (ईडब्ल्यूपीएच) कोटे के तहत एमबीबीएस की सीट आवंटित हुई थी। उसकी आंखों में परेशानी थी, जिसके चलते उसका दिव्यांगता प्रमाणपत्र बना था। इसके बावजूद वह मानसिक परेशानी से जूझ रही थी।

ऋतु ने वर्ष 2022 में प्रयागराज के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) से हाईस्कूल और 2024 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उसने नीट की तैयारी शुरू की। वर्ष 2026 की परीक्षा में उसकी ऑल इंडिया रैंक 10,74,272 आई थी।

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बेटी रातभर पढ़ती थी : देवराज

ऋतु के पिता देवराज शर्मा ने बताया कि वह रातभर अपने कमरे पढ़ाई करती थी और अगले दिन नींद पूरी कर दोपहर दो से ढाई बजे के बीच कमरे से बाहर आती थी। सोमवार को जब वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली तो परिवार के लोगों ने खिड़की से अंदर झांककर देखा। कमरे में ऋतु का शव खून से लथपथ पड़ा हुआ था। सूचना पर पुलिस पहुंची और जांच शुरू की। कमरे से आठ पेज का सुसाइड नोट भी मिला।

इसी बीच ऋतु के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि उसने रविवार की देर रात दो से ढाई बजे के बीच अपने पिता के पिस्टल से खुद को गोली मारी थी। ऐसी भी आशंका है कि उसने तीन गोली चलाई थी। दो गोलियों के निशान कमरे की अलमारी पर मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, झूंसी पुलिस का कहना है कि मौके से गोली का एक ही खोखा मिला है तो उसके सिर से आरपार हुई थी।

ऐसा क्यों किया तुमने ऋतु बोलकर बिलख पड़े पिता और भाई

ऋतु के पिता डॉ. देवराज शर्मा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। उनके पास लाइसेंसी पिस्टल और राइफल है। ऋतु का जुड़वा भाई ऋषिराज देहरादून के एक कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। बहन के मौत की जानकारी उसे मिली तो वह बदहवास हो गया। मंगलवार की सुबह वह घर पहुंचा। पिता देवराज और बेटा ऋषिराज एक-दूसरे से गले लिपकर ऋतु को यादकर बिलखने लगे।

पिता और भाई बार-बार यही कहे जा रहे थे कि आखिर ऋतु तुमने ऐसा क्यों किया। कोई तकलीफ थी तो बताया क्यों नहीं। पिता देवराज ने बताया कि रविवार की रात बेटी ने हम दोनों के साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद वह गुड नाइट बोलकर अपने कमरे में चली गई। तब तक ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि बेटी अगले कुछ घंटों में इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठा लेगी।

वीडियोग्राफी के बीच हुआ पोस्टमार्टम, दारागंज घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

डॉक्टरों के पैनल और वीडियोग्राफी के बीच ऋतु के शव का पोस्टमार्टम मंगलवार की दोपहर में हुआ। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। बाद में पिता देवराज, भाई ऋषिराज, चाचा और अन्य परिजनों ने ऋतु के शव का अंतिम संस्कार दारागंज घाट पर किया। उसके शव को पोस्टमार्टम हाउस से सीधे दारागंज घाट ले जाया गया था।

पिस्टल से चलाई तीन गोली

इसी बीच ऋतु के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि उसने रविवार की देर रात दो से ढाई बजे के बीच अपने पिता के पिस्टल से खुद को गोली मारी थी। ऐसी भी आशंका है कि उसने तीन गोली चलाई थी। दो गोलियों के निशान कमरे की अलमारी पर मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, झूंसी पुलिस का कहना है कि मौके से गोली का एक ही खोखा मिला है तो उसके सिर से आरपार हुई थी।

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