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पिता-पुत्री के खून में करीबियों पर निगाह
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 08 Jan 2017 01:48 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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करेली के नया पूरा में घर के भीतर पिता-पुत्री के कत्ल की जांच कर रही पुलिस मान रही है कि कातिल जो भी हैं वे माधव प्रसाद और अर्चना के करीबी हैं। परिचित होने की वजह से ही दस्तक देने पर अर्चना ने दरवाजा खोला और वे अंदर आ गए। शक है कि पिछले कमरे में आकर बातचीत के दौरान ही अचानक कातिलों ने चापड़ से हमला कर दिया। माधव प्रसाद को कमरे में ही मार डाला। अर्चना जान बचाने के लिए भागी मगर उसे भी कमरे से चंद कदम पर ही आंगन में चापड़ से वारकर ढेर कर दिया। रिश्तेदारों तथा कौशाम्बी के करारी से रोते-कलपते आई बहन वंदना ने भी कहा कि मारने वाले कहीं और से नहीं आए। हमले के वक्त अर्चना ने हाथ में मोबाइल फोन थाम रखा था। मोबाइल आखिरी वक्त तक उसके हाथ में रहा। कत्ल के बाद भागने से पहले कातिलों ने ही अर्चना के शव पर रजाई डाल दी थी। अर्चना का गला आधे से ज्यादा कटा था।
माथे और गाल पर गहरे घाव थे। चोट लगने पर वह गिरी तो कातिलों ने उसकी गर्दन पर चापड़े से दो या तीन वार किए होंगे। शव के पास दस रुपये का सिक्का भी पड़ा मिला। मौके पर खोजी कुत्ते के साथ फोरेंसिक टीम भी पहुंची। हालांकि कुत्ता आंगन में ही भटकता रह गया। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून, मिट्टी समेत जांच के लिए कुछ और नमून तथा साक्ष्य जुटाए हैं। फिंगर प्रिंट भी उठाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार कत्ल दो रोज पहले घटना बृहस्पतिवार रात किया गया। उस शाम सात बजे रिश्तेदार शोभा उन दोनों से मिलकर गई थी। माधवप्रसाद उनके मामा थे। मूल रूप से सैदपुर गांव निवासी शोभा अब नया पूरा में ही रहती है। उसने बताया कि बृहस्पतिवार शाम वह मामा माधव प्रसाद और ममेरी बहन अर्चना से मिलकर लौटी थी। शुक्रवार दोपहर फिर उनके घर गई तो दरवाजे में बाहर ताला लगा था। बेनीगंज में रहने वाले अर्चना के पति विश्वजीत ने भी बताया कि वह फोन नहीं रिसीव कर रही है। वह भी बृहस्पतिवार को अर्चना से मिलकर गया था। बिना बताए वे दोनों कहीं जा भी नहीं सकते थे।
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अचानक घर में ताला लगना और शुक्रवार को आधी रात तक अर्चना के मोबाइल की घंटी बजने के बावजूद कॉल नहीं रिसीव होने पर विश्वजीत को संदेह हुआ। इसी वजह से वह शनिवार सुबह वह नया पूरा पहुंचा और खपरैल पर चढ़कर आंगन में उतरा। उसने आंगन में पड़ी रजाई हटाई तो अर्चना का रक्तंरजित शव दिखा। ऐसे में साफ है कि माधव प्रसाद और अर्चना का कत्ल बृहस्पतिवार रात हुआ था। कातिल बाहर से नया ताला लगाकर भागे थे। पुलिस ने घर में दाखिल होने के लिए ताला तोड़कर दरवाजा खोला।
माधव प्रसाद और उसकी बेटी अर्चना घोर गरीबी से जूझ रहे थे। माधव अखबार बांटकर गुजारा करते थे। बेटी अर्चना भी यही काम करने लगी थी। वे दोनों रोज भोर में साइकिल से रेलवे स्टेशन स्थित सेंटर पर जाकर अखबार के बंडल उठाते, फिर करेली इलाके में घरों में बांटते थे। गरीबी के ही चलते वे खपरैल वाले बेहद कच्चे और जर्जर घर में रह रहे थे। जबकि उनके आसपास के सभी मकान पक्के हैं।
पेट भरने की चुनौती थे तो घर बनवाने के लिए पैसे कहां से आते। आसपास के लोगों और रिश्तेदारों ने बताया कि पिछले साल छोटी बेटी सुलोचना का सुलेमसराय के साहिल उर्फ वीरू से ब्याह करने के लिए पड़ोसियों ने चंदा से पैसे जुटाए थे। बड़ी बेटी अर्चना पहले पति को छोड़कर मायके में रहने लगी। वह पिता का सहारा बनी थी। बेनीगंज में रहने वाले विश्वजीत सिंह से तीन साल पहले उसकी मुलाकात हुई तो उनमें प्यार पनप गया। फिर उन्होंने पति-पत्नी का रिश्ता बना लिया हालांकि शादी नहीं की। विश्वजीत रामबाग के एक डेंटल क्लीनिक में रिशेप्सन पर बैठता है।
अब तक की जांच में पुलिस अफसर यही मान रहे हैं कि इस दोहरे कत्ल का कारण संपत्ति है। माधव प्रसाद तीन भाईयो में मंझले थे। बड़े भाई रामऔतार का बरसों पहले निधन हो गया। वह उनके साथ ही रहते थे। छोटा भाई रामस्वरूप का मकान ठीक सामने है। पता चला है कि माधव प्रसाद के मकान और बगल की एक जमीन पर छोटा भाई रामस्वरूप और भतीजा अशोक कब्जा करने की नीयत बनाए थे। कुछ और लोग भी इसी जुगत में थे।
इस वजह से कई बार झगड़ा हो चुका था। रोज ही जमीन खरीदने वाले आते थे मगर बुलाकर लाते थे भाई और भतीजा। यहां तक कि एक पड़ोसी ने घर के बाहर बोर्ड लगा दिया था कि यह प्लाट बिकाऊ है। इस विवाद के मदद्ेनजर एसपी सिटी विपिन टाडा और सीओ रूपेश सिंह का कहना है कि कत्ल के पीछे संपत्ति का पहलू सामने आया है। सुबह हत्या की जानकारी पाकर आई रिश्तेदार महिलाएं तो इस कदर नाराज थीं कि उन्होंने कहा कि दोनों की लाश मकान में ही दफनाकर ताला लगा दिया जाए ताकि संपत्ति किसी को नहीं मिल सके।
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माथे और गाल पर गहरे घाव थे। चोट लगने पर वह गिरी तो कातिलों ने उसकी गर्दन पर चापड़े से दो या तीन वार किए होंगे। शव के पास दस रुपये का सिक्का भी पड़ा मिला। मौके पर खोजी कुत्ते के साथ फोरेंसिक टीम भी पहुंची। हालांकि कुत्ता आंगन में ही भटकता रह गया। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून, मिट्टी समेत जांच के लिए कुछ और नमून तथा साक्ष्य जुटाए हैं। फिंगर प्रिंट भी उठाए गए हैं।
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पुलिस के अनुसार कत्ल दो रोज पहले घटना बृहस्पतिवार रात किया गया। उस शाम सात बजे रिश्तेदार शोभा उन दोनों से मिलकर गई थी। माधवप्रसाद उनके मामा थे। मूल रूप से सैदपुर गांव निवासी शोभा अब नया पूरा में ही रहती है। उसने बताया कि बृहस्पतिवार शाम वह मामा माधव प्रसाद और ममेरी बहन अर्चना से मिलकर लौटी थी। शुक्रवार दोपहर फिर उनके घर गई तो दरवाजे में बाहर ताला लगा था। बेनीगंज में रहने वाले अर्चना के पति विश्वजीत ने भी बताया कि वह फोन नहीं रिसीव कर रही है। वह भी बृहस्पतिवार को अर्चना से मिलकर गया था। बिना बताए वे दोनों कहीं जा भी नहीं सकते थे।
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अचानक घर में ताला लगना और शुक्रवार को आधी रात तक अर्चना के मोबाइल की घंटी बजने के बावजूद कॉल नहीं रिसीव होने पर विश्वजीत को संदेह हुआ। इसी वजह से वह शनिवार सुबह वह नया पूरा पहुंचा और खपरैल पर चढ़कर आंगन में उतरा। उसने आंगन में पड़ी रजाई हटाई तो अर्चना का रक्तंरजित शव दिखा। ऐसे में साफ है कि माधव प्रसाद और अर्चना का कत्ल बृहस्पतिवार रात हुआ था। कातिल बाहर से नया ताला लगाकर भागे थे। पुलिस ने घर में दाखिल होने के लिए ताला तोड़कर दरवाजा खोला।
माधव प्रसाद और उसकी बेटी अर्चना घोर गरीबी से जूझ रहे थे। माधव अखबार बांटकर गुजारा करते थे। बेटी अर्चना भी यही काम करने लगी थी। वे दोनों रोज भोर में साइकिल से रेलवे स्टेशन स्थित सेंटर पर जाकर अखबार के बंडल उठाते, फिर करेली इलाके में घरों में बांटते थे। गरीबी के ही चलते वे खपरैल वाले बेहद कच्चे और जर्जर घर में रह रहे थे। जबकि उनके आसपास के सभी मकान पक्के हैं।
पेट भरने की चुनौती थे तो घर बनवाने के लिए पैसे कहां से आते। आसपास के लोगों और रिश्तेदारों ने बताया कि पिछले साल छोटी बेटी सुलोचना का सुलेमसराय के साहिल उर्फ वीरू से ब्याह करने के लिए पड़ोसियों ने चंदा से पैसे जुटाए थे। बड़ी बेटी अर्चना पहले पति को छोड़कर मायके में रहने लगी। वह पिता का सहारा बनी थी। बेनीगंज में रहने वाले विश्वजीत सिंह से तीन साल पहले उसकी मुलाकात हुई तो उनमें प्यार पनप गया। फिर उन्होंने पति-पत्नी का रिश्ता बना लिया हालांकि शादी नहीं की। विश्वजीत रामबाग के एक डेंटल क्लीनिक में रिशेप्सन पर बैठता है।
अब तक की जांच में पुलिस अफसर यही मान रहे हैं कि इस दोहरे कत्ल का कारण संपत्ति है। माधव प्रसाद तीन भाईयो में मंझले थे। बड़े भाई रामऔतार का बरसों पहले निधन हो गया। वह उनके साथ ही रहते थे। छोटा भाई रामस्वरूप का मकान ठीक सामने है। पता चला है कि माधव प्रसाद के मकान और बगल की एक जमीन पर छोटा भाई रामस्वरूप और भतीजा अशोक कब्जा करने की नीयत बनाए थे। कुछ और लोग भी इसी जुगत में थे।
इस वजह से कई बार झगड़ा हो चुका था। रोज ही जमीन खरीदने वाले आते थे मगर बुलाकर लाते थे भाई और भतीजा। यहां तक कि एक पड़ोसी ने घर के बाहर बोर्ड लगा दिया था कि यह प्लाट बिकाऊ है। इस विवाद के मदद्ेनजर एसपी सिटी विपिन टाडा और सीओ रूपेश सिंह का कहना है कि कत्ल के पीछे संपत्ति का पहलू सामने आया है। सुबह हत्या की जानकारी पाकर आई रिश्तेदार महिलाएं तो इस कदर नाराज थीं कि उन्होंने कहा कि दोनों की लाश मकान में ही दफनाकर ताला लगा दिया जाए ताकि संपत्ति किसी को नहीं मिल सके।