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मानसिक रोगी युवती ने अपने दुधमुंहे बेटे की ली जान
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 01 Feb 2015 11:33 PM IST
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कोतवाली के बादशाही मंडी इलाके में पति की मौत से बदहवास एक युवती ने शनिवार रात अपने सवा साल के दुधमुंहे बेटे को जमीन पर पटककर मार डाला। रविवार सुबह घरवालों ने दरवाजा खुलवाया तो मासूम फर्श पर खून से लथपथ पड़ा था। मानसिक संतुलन खो चुकी उसकी मां ने खुद कहा कि उसने बच्चे को पटक दिया था। परिजन बच्चे को उठाकर अस्पताल ले गए लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
बादशाही मंडी का रमेश (नाम काल्पनिक) सात भाइयों में दूसरे नंबर पर था। सभी भाई एक ही मकान में रहते हैं। वह बाइक सर्विसिंग की दुकान के जरिए पत्नी और चार बच्चों का गुजारा करता था। उसक ी पत्नी सुलेखा (नाम बदला है) का छह साल पहले दिमागी संतुलन बिगड़ गया। इसी बीच करीब दस दिन पहले रमेश की आकस्मिक मौत हो गई। ऐसे में उसके भाइयों के परिवार ही सुलेखा और बच्चों की देखभाल कर रहे थे। सुलेखा की खराब दिमागी हालत को देखते हुए घरवाले तीनों बडे़ बेटों को अपने पास रखते थे।
सबसे छोटा सवा साल का बेटा ही सुलेखा के पास रहता था। शनिवार रात सुलेखा बच्चे को लेकर अपने कमरे में सोने चली गई। बाकी तीनों बेटे अपने ताऊ के परिवार के पास थे। रविवार सुबह सुलेखा की जेठानी ने काफी देर तक दस्तक दी तो सुलेखा ने दरवाजा खोला। मगर कमरे में जाते ही सुलेखा की जेठानी चीख पड़ी। सवा साल का मासूम फर्श पर खून से लथपथ पड़ा था। दरवाजा खोलकर सुलेखा फर्श पर बच्चे के पास जाकर बैठ गई थी। पूछने पर जेठानी से कहा कि बच्चे को उसने ही पटक दिया था।
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पता चला तो परिवार के लोग वहां जुट गए। वे बच्चे को लेकर अस्पताल भागे मगर डॉक्टरों ने उसे मृत बता दिया। खबर फैली तो मुहल्ले वाले भी जुट गए। बच्चे की मौत में उसकी मां का हाथ था इसलिए लोग हतप्रभ थे। हालांकि सबका यही कहना था कि सुलेखा का दिमाग ठीक नहीं वरना वो अपने मासूम बेटे को नहीं मारती। दोपहर बाद यमुना के ककरहा घाट ले जाकर मृत बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस बारे में कोतवाली इंस्पेक्टर कोतवाली इंस्पेक्टर पीके राय ने बताया कि परिवार के लोगों ने शिकायत नहीं की इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस घटना से बेहद दुखी पड़ोसियों ने बताया कि सुलेखा पहले भी ऐसी हरकत कर चुकी है। उसने अपनी बेटी बेबी को कुछ साल पहले पटक दिया था। बच्ची के हाथ पैर टूट गए थे। बाद में वह चल बसी। उसने एक और बेटे को पता नहीं कहां ले जाकर छोड़ दिया था। उस बच्चे का भी आज तक कुछ पता नहीं चल सका है। लोगों का मानना है कि उसने बच्चे को शायद गहरे नाले में फेंक दिया था। सुलेखा की इन करतूतों से तंग होकर परिजनों और मुहल्ले वालों ने कई बार पुलिस से आग्रह किया कि उसे मानसिक रोग चिकित्सालय भेज दिया जाए पर पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। मानसिक रूप से बीमार सुलेखा की इस हरकत के बाद उसके तीन बेटों के सामने बड़ी मुसीबत की स्थिति बनी है। पिता रहे नहीं और मां विक्षिप्त है। मासूम की मौत के बाद दिन भर घर में भीड़ लगी रही। तीनों बेटे बार-बार होने लगते तो किसी तरह उन्हें संभाला जाता।
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बादशाही मंडी का रमेश (नाम काल्पनिक) सात भाइयों में दूसरे नंबर पर था। सभी भाई एक ही मकान में रहते हैं। वह बाइक सर्विसिंग की दुकान के जरिए पत्नी और चार बच्चों का गुजारा करता था। उसक ी पत्नी सुलेखा (नाम बदला है) का छह साल पहले दिमागी संतुलन बिगड़ गया। इसी बीच करीब दस दिन पहले रमेश की आकस्मिक मौत हो गई। ऐसे में उसके भाइयों के परिवार ही सुलेखा और बच्चों की देखभाल कर रहे थे। सुलेखा की खराब दिमागी हालत को देखते हुए घरवाले तीनों बडे़ बेटों को अपने पास रखते थे।
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सबसे छोटा सवा साल का बेटा ही सुलेखा के पास रहता था। शनिवार रात सुलेखा बच्चे को लेकर अपने कमरे में सोने चली गई। बाकी तीनों बेटे अपने ताऊ के परिवार के पास थे। रविवार सुबह सुलेखा की जेठानी ने काफी देर तक दस्तक दी तो सुलेखा ने दरवाजा खोला। मगर कमरे में जाते ही सुलेखा की जेठानी चीख पड़ी। सवा साल का मासूम फर्श पर खून से लथपथ पड़ा था। दरवाजा खोलकर सुलेखा फर्श पर बच्चे के पास जाकर बैठ गई थी। पूछने पर जेठानी से कहा कि बच्चे को उसने ही पटक दिया था।
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पता चला तो परिवार के लोग वहां जुट गए। वे बच्चे को लेकर अस्पताल भागे मगर डॉक्टरों ने उसे मृत बता दिया। खबर फैली तो मुहल्ले वाले भी जुट गए। बच्चे की मौत में उसकी मां का हाथ था इसलिए लोग हतप्रभ थे। हालांकि सबका यही कहना था कि सुलेखा का दिमाग ठीक नहीं वरना वो अपने मासूम बेटे को नहीं मारती। दोपहर बाद यमुना के ककरहा घाट ले जाकर मृत बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस बारे में कोतवाली इंस्पेक्टर कोतवाली इंस्पेक्टर पीके राय ने बताया कि परिवार के लोगों ने शिकायत नहीं की इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस घटना से बेहद दुखी पड़ोसियों ने बताया कि सुलेखा पहले भी ऐसी हरकत कर चुकी है। उसने अपनी बेटी बेबी को कुछ साल पहले पटक दिया था। बच्ची के हाथ पैर टूट गए थे। बाद में वह चल बसी। उसने एक और बेटे को पता नहीं कहां ले जाकर छोड़ दिया था। उस बच्चे का भी आज तक कुछ पता नहीं चल सका है। लोगों का मानना है कि उसने बच्चे को शायद गहरे नाले में फेंक दिया था। सुलेखा की इन करतूतों से तंग होकर परिजनों और मुहल्ले वालों ने कई बार पुलिस से आग्रह किया कि उसे मानसिक रोग चिकित्सालय भेज दिया जाए पर पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। मानसिक रूप से बीमार सुलेखा की इस हरकत के बाद उसके तीन बेटों के सामने बड़ी मुसीबत की स्थिति बनी है। पिता रहे नहीं और मां विक्षिप्त है। मासूम की मौत के बाद दिन भर घर में भीड़ लगी रही। तीनों बेटे बार-बार होने लगते तो किसी तरह उन्हें संभाला जाता।